कुंडली में गुरु ग्रह दोष से बचने का अचूक उपाय

कुंडली में गुरु ग्रह दोष से बचने का अचूक उपाय

By: Shyam

Published: 07 Jun 2018, 04:01 PM IST

कुंडली में गुरु ग्रह दोष के बारे में ज्योतिषाचार्य पं. विष्णु राजोरिया ने बताया की अगर किसी की कुंडली में यदि गुरू चारों केंद्र में से किसी एक केंद्र में स्थित हो जाये तो उस जातक को केंद्राधिप दोष लगता हैं । अर्थात गुरू जिस भाव में रहता हैं उसका फल कम हो जाता है, जिस कारण जातक के कई कार्य विलंब से होते है । गुरु ग्रह दोष से पीड़ित जातक किसी योग्य गुरू से गुरू दीक्षा लेकर, गुरु की पूजा वंदना कर, गुरु के द्वारा दिये गये मंत्र का जप करने से पर गुरू ग्रह के दोष से मुक्ति मिल सकती हैं । साथ भगवान लक्ष्मीनाराण का पूजन भी इसमें सहायक होता हैं । गुरु यदि तीसरे, छटवें या बारहवें भाव में हो तो भी गुरु कृपा मिलने में कठिनाई होती है, अगर गुरू की दृष्टियां पांचवे, सातवें और नवम भाव में हो तो जातक को शुभ फल की प्राप्ति होती हैं ।


अगर किसी की कुंडली में गुरु ग्रह का दोष हो जाए तो उक्त जातक को शादी और भाग्य जैसी समस्याओं का सामना करना पडता है और यदि अनूकुल स्थितियां होते हुए भी आपके विवाह में समस्या उत्पन्न हो रही है तो ऐसे जातकों को गुरुवार के दिन का अस्वाद व्रत उपवास करना अति लाभकारी सिद्ध होता हैं ।

 

गुरू की पूजन करें

पं. राजोरिया के अनुसार गुरु ग्रह दोष के निवारण के लिए जातक को अपने गुरु की पूजा अर्चना के साथ गुरू मंत्र का चिंतन और जप करना चाहिए । गुरूवार के दिन भगवान बृहस्पति देव की पूजा का विधान हैं, इस दिन पूजा करने से धन, विद्या, पुत्र तथा मनोवांछित फल की प्राप्ति होने के साथ परिवार मे सुख और शांति बनी रहती है । साथ ही जिनके विवाह में बाधाएं उत्पन्न हो रही हो उन्हें गुरूवार का व्रत अनिवार्य करना चाहिए । इस दिन पूजा में एक समय ही अस्वाद भोजन करें । पीले वस्त्र धारण करें, पीले पुष्प एवं माला भगवान श्रीलक्ष्मीनारायण को अर्पित करना चाहिए । भोजन भी चने की पीली दाल का करें और इस दिन नमक का परहेज करना चाहिए । भगवान की पूजा में पीले रंग का फूल, चने की दाल, पीले कपड़े और पीले चन्दन का प्रयोग करने से गुरु और भगवान की शीघ्र कृपा के साथ मनोवांछित फल भी मिलता हैं ।

 

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गुरु मंत्र


गायत्री मंत्र को गुरु मंत्र कहा जाता है अगर किसी जातक ने गुरु नहीं बनाया है तो वे भी सूर्य भगवान को अपना गुरु मानकर गायत्री मंत्र का नित्य 108 बार जप करने से गुरू ग्रह दोष सहित सभी समस्याओं की निराकरण स्वतः ही हो जाता हैं ।


ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्


इस मंत्र का भी जप कर सकते हैं


गुरू ग्रह दोष से पीड़ित जातक गुरुवार के दिन नहाते वक्त पानी में एक चुटकी हल्दी, एवं गंगाजल डालकर स्नान करने के बाद 108 बार "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जप करने के बाद, इसी मंत्र का उच्चारण करते हुए शुद्ध केसर का तिलक लगाए और केले के वृक्ष में जल अर्पित कर उसकी धूप- दीप से पूजा करे, आपकी सभी समस्या दूर होगी ।

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