जन्मकुंडली में लिखा होता है हमारे इष्टदेव का नाम, पूजा करने से होते हैं प्रसन्न

जन्मकुंडली में लिखा होता है हमारे इष्टदेव का नाम, पूजा करने से होते हैं प्रसन्न

Shyam Kishor | Updated: 17 Jul 2018, 04:41:09 PM (IST) धर्म कर्म

जन्मकुंडली बता देती है हमें किस देवी-देवता की करना चाहिए पूजा

हिन्दू धर्म में तैंतीस कोटि देवी देवताओं की विभिन्न शक्तियों के रूप में उपासना की जाती है । आजकल परेशानियों, कठिनाइयों के चलते हम ग्रह शांति के उपायों के रूप में कई देवी-देवताओं की आराधना, मंत्र जप एक साथ करते जाते हैं । परिणाम यह होता है कि किसी भी देवता को प्रसन्न नहीं कर पाते, एक कहावत है- ‘एकै साधै सब सधै, सब साधै सब जाय’ ज्योतिष शास्त्र में जन्मकुंडली के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति के इष्ट देवी या देवता निश्चित होते हैं ।


अगर हमे अपने ईष्ट के बारे में सही सही ज्ञात हो तो, कुंडली में कितने भी प्रतिकूल ग्रह हो, आसानी से उनके दुष्प्रभावों से रक्षा की जा सकती है । उदाहरण के रूप में- हमें काम तो बिजली विभाग में होता है और चले जाते हैं जल-विभाग में ! जब हम गलत कार्यालय में जायेंगे तो काम कैसे होगा । इसी प्रकार हर कुंडली के अनुसार उसके अपने अनुकूल देवी देवता भी होते हैं । लग्नानुसार इष्ट देव एवं लग्न स्वामी ग्रह इष्ट देव ।

 

राशि के देवी देवता

 

मेष एवं वृश्चिक राशि के जातक मंगल हनुमान जी, राम जी की उपासना करें ।

 

वृषभ एवं तुला राशि के जातक शुक्र दुर्गा जी की पूजा करें ।

 

मिथुन एवं कन्या राशि के जातक बुध गणेश जी, विष्णु जी की उपासना करें ।

 

कर्क राशि के जातक चंद्र शिव जी जी की उपासना करें ।

 

सिंह राशि के जातक सूर्य गायत्री, हनुमान जी जी की उपासना करें ।

 

धनु एवं मीन राशि के जातक गुरु विष्णु जी (सभी रूप), लक्ष्मी जी जी की उपासना करें ।

 

मकर एवं कुंभ राशि शनि, हनुमान जी, शिव जी जी की उपासना करें ।

 

लग्न के अतिरिक्त पंचम व नवम भाव के स्वामी ग्रहों के अनुसार देवी-देवताओं का ध्यान पूजन भी सुख-सौहार्द्र बढ़ाने वाला होता है । इष्ट देव की पूजा करने के साथ रोज एक या तीन माला इष्ट के मंत्र का जप करना चमत्कारिक फल देने के साथ संकटों से रक्षा करता है । व्यक्ति यदि अपने लग्र के देवता की पूजा करें तो उनको अपने हर काम में सफलता मिलने लगती हैं ।

 

देव मंत्र


हनुमान जी- ।। ऊँ हं हनुमंताय नम: ।।


शिव जी- ।। ऊँ रुद्राय नम: ।।


गणेश- ।। ऊँ गंगणपतयै नम: ।।


दुर्गा- ।। ऊँ दुं दुर्गाय नम: ।।


राम- ।। ऊँ रां रामाय नम: ।।


विष्णु- ।। विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ ।।


लक्ष्मी- ।। लक्ष्मी चालीसा एवं ऊँ श्रीं श्रीयै नम: ।।

 

राशि अनुसार इन मंत्रों का जप करने से इष्ट देव शीघ्र प्रसन्न होते हैं ।

 

janam kundli
खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned