षष्ठी नन्दा संज्ञक तिथि अद्र्धरात्र्योत्तर २.५२ तक, तदुपरान्त सप्तमी भद्रा संज्ञक तिथि प्रारम्भ हो जाएगी। षष्ठी तिथि में काठ की दातुन, यात्रा, उबटन व चित्रकारी के कार्यों को छोडक़र युद्ध, वास्तु, अलंकार व अन्य मांगलिक कार्यादि सिद्ध होते हैं।

नक्षत्र: अश्लेषा ‘तीक्ष्ण व अधोमुख’ संज्ञक नक्षत्र सायं ६.२८ तक, तदुपरान्त मघा ‘उग्र व अधोमुख’ संज्ञक नक्षत्र रहेगा। दोनों ही गण्डांत मूल संज्ञक नक्षत्र भी हैं। अत: इन नक्षत्रों में जन्मे जातकों के संभावित अरिष्ट निवारण की दृष्टि से २७ दिन बाद जब पुन: इन्हीं नक्षत्रों की आवृत्ति हो, उस दिन नक्षत्र शांति करा लेना हितकर रहेगा।

योग: ऐन्द्र नामक नैसर्गिक अशुभ योग प्रात: ९.०९ तक, इसके बाद वैधृति नामक अत्यंत उपद्रवकारी अशुभ योग अंतरात्रि ६.३१ तक है। वैधृति योग में सभी शुभ व मांगलिक कार्य सर्वदा वर्जित हैं। विशिष्ट योग: कुमार योग नामक शुभ योग सायं ६.२८ से रात्रि २.५२ तक तथा दोष समूह नाशक रवियोग नामक शक्तिशाली शुभ योग भी सायं ६.२८ से प्रारम्भ हो जाएगा। करण: गर नामकरण अपराह्न ३.४८ तक, इसके बाद रात्रि २.५२ तक वणिज नामकरण है, तदुपरान्त भद्रा प्रारम्भ हो जाएगी।

शुभ विक्रम संवत् : 207४
संवत्सर का नाम : साधारण
शाके संवत् : 193९
हिजरी संवत् : 143९, मु.मास: रवि-उल-अव्वल-१८
अयन : दक्षिणायन
ऋतु : हेमन्त
मास : पौष। पक्ष - कृष्ण।

शुभ मुहूर्त: उपर्युक्त शुभाशुभ समय, तिथि, वार, नक्षत्र व योगानुसार आज मघा नक्षत्र में विवाह का अतिआवश्यकता में (वैधृति व भद्रा दोषयुक्त) अशुद्ध मुहूर्त है।

श्रेष्ठ चौघडि़ए: आज सूर्योदय से पूर्वाह्न ११.०१ तक क्रमश: चर, लाभ व अमृत, दोपहर १२.१९ से दोपहर बाद १.३६ तक शुभ तथा सायं ४.१२ से सूर्यास्त तक चर के श्रेष्ठ चौघडि़ए हैं एवं दोपहर ११.५८ से दोपहर १२.३९ तक अभिजित नामक श्रेष्ठ मुहूर्त है, जो आवश्यक शुभकार्यारम्भ के लिए अत्युत्तम हैं।

व्रतोत्सव: आज वैधृति पुण्यं है। चन्द्रमा: चन्द्रमा सायं ६.२८ तक कर्क राशि में, इसके बाद सिंह रशि में रहेगा।

दिशाशूल: शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा में दिशाशूल है। चन्द्र स्थिति के अनुसार आज उत्तर दिशा की यात्रा लाभदायक व शुभप्रद रहेगी।

राहुकाल: प्रात: १०.३० से दोपहर १२.०० बजे तक राहुकाल वेला में शुभकार्यारंभ यथासंभव वर्जित रखना हितकर है।

आज जन्म लेने वाले बच्चे
आज जन्म लेने वाले बच्चों के नाम (डे, डो, म, मी, मू) आदि अक्षरों पर रखे जा सकते हैं। सायं ६.२८ तक जन्मे जातकों की जन्म राशि कर्क है तथा इसके बाद जन्मे जातकों की जन्म राशि सिंह होगी। इन सभी का जन्म रजतपाद से हुआ है। सामान्यत: ये जातक अस्थिर, यात्राएं अधिक, थोड़े स्वभाव से निरस, नेक कार्यों की नकल, सदैव अपना हित साधने, नेकी व बुराई की परवाह नहीं करने वाले, धन कमाने में होशियार व चतुर होते हैं। इनका भाग्योदय लगभग ३४ वर्ष की आयु तक होता है। कर्क राशि वाले जातकों को आज शत्रुओं से बचकर चलना चाहिए। आपका बनता हुआ कार्य बिगाड़ सकते हैं।

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