4.50 लाख लोगों को घर बैठे बांट दिए 100 करोड़, नतीजा: स्थानीय स्तर पर नहीं फैला कोरोना संक्रमण

धौलपुर. जिले में लॉकडाउन से लेकर अब तक खातों में पहुंची विभिन्न मदों की राशि को घर बैठे उपभोक्ताओं तक पहुंचाया गया है। इसका परिणाम यह मिला कि तीन तरफ से रेड जोन से घिरे जिले में स्थानीय स्तर पर कोरोना संक्रमण नहीं फैल पाया।

By: Naresh

Published: 30 May 2020, 05:30 PM IST

4.50 लाख लोगों को घर बैठे बांट दिए 100 करोड़, नतीजा: स्थानीय स्तर पर नहीं फैला कोरोना संक्रमण

- देश भर में बना मॉडल, बंैक सर्वर तक ठप होने की स्थिति में पहुंचा
-कारपोरेट बीसी, आईपीपीबी व बैक प्रतिनिधियों के माध्यम से किया राशि का वितरण
धौलपुर. जिले में लॉकडाउन से लेकर अब तक खातों में पहुंची विभिन्न मदों की राशि को घर बैठे उपभोक्ताओं तक पहुंचाया गया है। इसका परिणाम यह मिला कि तीन तरफ से रेड जोन से घिरे जिले में स्थानीय स्तर पर कोरोना संक्रमण नहीं फैल पाया। जिले में 28 मई तक 4.50 लोगों को 100 करोड़ रुपए की राशि का वितरण किया गया है। यह वितरण जिला प्रशासन ने डाकघर की इण्डिया पोस्ट पेमेंट बैक, कॉरपोरेट बीसी तथा बैंक बीसी के माध्यम से घर-घर पहुंचाई गई। इसमें जनधन खातों में आई अनुग्रह राशि, सामाजिक पेंशन तथा अन्य प्रकार की सरकारी सहायता शामिल थीं। राशि मिलने के बाद उपभोक्ताओं को एकबारगी तो आश्चर्य हुआ, कि सरकारी तंत्र भी घर बैठे कोई मदद कर सकता है। इसका सबसे बड़ा फायदा एकल व्यक्ति, एकल महिला, वृद्ध, लाचार, बीमार व्यक्तियों को हुआ। शुरुआत में जिला आगरा, मुरैना तथा बयाना क्षेत्र में रेड जोन में होने के कारण घिरा हुआ था। अगर उस वक्त यह व्यवस्था नहीं होती तो संक्रमण की स्थित भयावह होती।

यूं शुरू की व्यवस्था
दरअसल, लॉकडाउन शुरू होने के बाद अपे्रल माह की प्रथम सप्ताह में जैसे ही लोग बैंक में राशि निकालने पहुंचे तो लम्बी कतार लग गई और लोग पहले लेने के चक्कर में एक-दूसरे से सटकर खड़े रहने लगे। इस पर जब प्रशासनिक अधिकारियों दौरा किया तो स्थिति भयावह दिखने लगी और संक्रमण का खतरा पनपने की आशंका खड़ी हो गई। महत्वपूर्ण तथ्य यह था कि जिला मुख्यालय सहित जिले में अधिकांश बैंक संकरी गलियों में स्थित है। इस कारण सोशल डिस्टेंसिंग कतई संभव नहीं था। इसे देखते हुए जिला कलक्टर ने जहां अधिक भीड़ थीं, उन बैंकों को उस दिन के लिए बंद कर दिया। साथ ही बंैकों से जनधन व पेंशन खातों से निकासी पर रोक लगा दी। लेकिन दूसरी ओर गरीब तबके के लोगों को जरूरत पूरी करने के लिए राशि की आवश्यकता तो थी। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने घर बैठे राशि पहुंचाने की प्रक्रिया अपनाई। इस पर डाकघर की आईपीपीबी, बैंकों के प्रबंधकों की बैठक लेकर उनको बीसी के माध्यम से राशि पहुंचाने के निर्देश दिए।

सफाईकर्मी, वॉलिंटियर्स, निगरानी दल भी बने मददगार
घर-घर राशि पहुंचाने के लिए बीसी, आईपीपीबी तैयार थे, लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह आई कि खाताधारकों को तलाशें कैसें। इस पर प्रतिनिधियों ने निगरानी दल, सफाईकर्मियों के दल तथा मोहल्लों में बनाए गए वॉलिंटियर्स की मदद ली और खाताधारकों तक राशि पहुंचाने का कार्य किया। इससे लोगों को शीघ्र ही राशि मिलने लगी।

दिन में गांव, सुबह-शााम शहर में भुगतान

घर-घर राशि बांटने के लिए जिला प्रशासन ने साढ़े चार सौ से अधिक दल बनाए। लेकिन एक दो दिन में देखने में आया कि बैंक प्रतिनिधि गांवों में अधिक और शहरों में कम है। इस पर जिला प्रशासन ने बैंका प्रतिनिधियों को सुबह-शाम शहर में अलग से लगाया। वहीं दिन भर गांवों में भुगतान कराया। इतना ही नहीं बीसी की राशि निकासी की सीमा कुल 25 हजार से बढ़ाकर एक लाख 60 हजार रुपए की। जिससे अधिक से अधिक लोगों को राशि का भुगतान हो सके।

बैंक सर्वर निचले स्तर पर पहुंचा

जिले में जनधन, पेंशन के करीब 6.50 लाख खाते हैं। इनमें से अधिकांश लोग बैंकों के माध्यम से राशि निकासी करते हैं। लेकिन अपे्रल-मई माह में जब जिले की बैंकों से निकासी नहीं के बराबर हुई तो बैंक के सर्वर भी निचले स्तर पर पहुंच गया। इस पर बैंक के उच्च अधिकारियों ने भी जिला प्रशासन से बात तो उनको इसका पता चला। जिस पर मालूम हुआ कि उत्तर भारत में सबसे कम बैंक लेनदेन धौलपुर में हुआ है।

यह भी थी भ्रांति
जनधन खातों में केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से डाली गई अनुग्रह राशि के बारे में सोशल मीडिया पर यह भी भ्रांति पैदा कर दी गई कि अगर यह राशि निकाली नहीं गई तो लेप्स हो जाएगी। इस पर जिला प्रशासन ने एडवाइजरी जारी की। लेकिन जब घर बैठे भुगतान होने लगा तो लोगों को विश्वास भी हो गया कि राशि वापस नहीं जाएगी और लोगों ने बैंक आना बंद कर दिया।
यह बने सूत्रधार, क्रियान्वयन पर दिया ध्यान

घर बैठे राशि पहुंचाने की कार्ययोजना बनाने, बैंक, आईपीपीबी, बीसी के मध्य समन्वयक करने का कार्य अतिरिक्त जिला कलक्टर नरेन्द्र कुमार वर्मा ने किया। उन्होंने भुगतान के लिए निरंतर मॉनिटरिंग की। साथ ही वे नजदीकी तौर पर बीसी तक निरंतर सम्पर्क में रहे। जिससे शीघ्र ही भुगतान हो सके और कोई दिक्कत नहीं आए। उनके पास अब भी लोगों के निरंतर फोन आ रहे हैं। उनका कहना था कि यह देश में अनोखा मॉडल विकसित किया गया था। जिसमें सभी का सहयोग रहा।


इनका कहना है

राशि भी जरूरी थी और सोशल डिस्टेंसिंग भी

लॉकडाउन के बाद खातों में राशि आई तो लोग बैंकों में उमड़ पड़े, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करानी थी। इस पर बैंकों पर भीड़ नहीं जुटने को लेकर सख्ती की गई। लेकिन राशि भी जरूरी थी, इस पर घर बैठे ही राशि पहुंचाई गई, यह निर्णय देश भर में अनोखा था। बंैक सर्वर भी निचले स्तर पर पहुंच गया। इससे स्थानीय स्तर पर कोरोना संक्रमण का खतरा टल गया।

राकेश कुमार जायसवाल, जिला कलक्टर, धौलपुर।

यूं पहुंची राशि
ब्लॉक लाभार्थी राशि
धौलपुर शहर 24643 401.31
धौलपुर ग्रामीण 67501 1244.03
बाड़ी शहर 20019 408.71
बाड़ी ग्रामीण 54381 1211.92
राजाखेड़ा शहर 11389 184.60
राजाखेड़ा ग्रामीण 59443 1225.29
सैंपऊ 65912 1366.37
बसेड़ी 49728 1259.09
सरमथुरा 26480 536.67
बैंक-एटीएम- 75308 2209 लाख
कुल 454805 10047.04

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