बिजली संकट के बीच बेकार खड़ा ११ सौ करोड़ का सफेद हाथी

धौलपुर. यहां शहर के पास स्थापित धौलपुर कंबाइंड साइकिल पॉवर प्रोजेक्ट ‘सफेद हाथी’ साबित हो रहा है। करीब 1100 करोड़ रुपए की लागत से बना गैस आधारित यह पॉवर प्रोजेक्ट मंहगी गैस के कारण कई वर्षों से लगभग बंद ही पड़ा है।

By: Naresh

Published: 13 Oct 2021, 11:23 AM IST

बिजली संकट के बीच बेकार खड़ा ११ सौ करोड़ का सफेद हाथी

गैस आधारित धौलपुर कंबाइंड साइकिल पॉवर प्रोजेक्ट
- पिछले तीन साल से लगभग शून्य बिजली का हुआ उत्पादन
- महंगा पड़ता है गैस से बिजली उत्पादन, खरीदार ही नहीं मिलते

नितिन भाल
धौलपुर. यहां शहर के पास स्थापित धौलपुर कंबाइंड साइकिल पॉवर प्रोजेक्ट ‘सफेद हाथी’ साबित हो रहा है। करीब 1100 करोड़ रुपए की लागत से बना गैस आधारित यह पॉवर प्रोजेक्ट मंहगी गैस के कारण कई वर्षों से लगभग बंद ही पड़ा है। हालात यह है कि कोयला आधारित बिजलीघरों में कोयले की कमी से आए संकट के समय में भी यह सरकार और लोगों की कोई मदद नहीं कर पा रहा है। एक ओर पूरा राज्य बिजली की कमी से परेशान है वहीं, धौलपुर का बंद पॉवर प्रोजेक्ट बिना उत्पादन के खड़ा है।

महंगा उत्पादन

गैस आधारित बिजली का उत्पादन महंगा होना इस प्लांट की बेकद्री का सबसे बड़ा कारण है। दरअसल, दुनियाभर में प्राकृतिक गैस के दाम बढऩे से गैस से बिजली बनाना महंगा सौदा हो गया है। वर्तमान में गैस से बिजली उत्पादन की लागत करीब 20 से 21 रुपए बैठती है। प्रतिस्पद्र्धा के दौर में कोई भी इतनी महंगी बिजली खरीदना वहन नहीं कर सकता। ऐसे में यह प्लांट बंद ही पड़ा है।

गैस आपूर्ति नहीं

केन्द्र सरकार की पॉलिसी के अनुरूप पेट्रोलियम मंत्रालय तय करता है कि किस सेक्टर को कितनी गैस आपूर्ति की जानी चाहिए। इस क्षेत्र के जानकारों ने बताया कि देश के कृषि प्रधान होने के कारण मंत्रालय ने फर्टिलाइजर जैसे सेक्टरों को गैस वितरण के मामले में प्राथमिकता पर रखा है, जबकि विद्युत उत्पादन जैसे सेक्टर खिसक कर निचले पायदान पर आ गए हैं। इस कारण इन्हें इनकी मांग के अनुरूप गैस की आपूर्ति भी नहीं मिल पाती है।

हर माह लाखों का खर्च

वर्तमान में बंद पड़े इस प्लांट की देखरेख और कर्मचारियों का वेतन आदि मिला कर हर महीने लाखों रुपए का खर्च होता है। वर्तमान में प्लांट में करीब 90 कर्मचारी और 200 से 250 संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं। प्लांट की नियमित देखरेख भी की जाती है। ऐसे में सरकार को हर माह करोड़ों रुपए का खर्च इन सब पर करना पड़ता है।

अदूरदर्शी प्रयास

जानकारों का कहना है कि वर्ष 2007 में स्थापित यह संयंत्र तत्कालीन सरकार का अदूरदर्शी निर्णय था। प्राकृतिक गैस के संबंध में भारत विदेशों से आपूर्ति पर निर्भर है। ऐसे में गैस आधारित संयंत्र स्थापित करना एक अदूरदर्शी निर्णय था।

यह है क्षमता

करीब 143 बीघा जमीन पर बने इस प्लांट में 110 मेगावाट की तीन उत्पादन यूनिट हैं। जिनसे प्रतिदिन 7.92 मिलियन यूनिट बिजली पैदा की जा सकती है। इससे एक माह में 500 यूनिट खर्च करने वाले 16 हजार घरों को रोशन किया जा सकता है।

यह उपलब्धियां रहीं

धौलपुर पावर स्टेशन का अब तक का स्वर्णिम काल वर्ष 2009-10 माना जाता है। पूरे देश में गैस से संचालित प्लांटों में से धौलपुर स्टेशन ने बिजली उत्पादन में दूसरा स्थान प्राप्त किया था। इसके अलावा इस प्लांट को राजस्थान के बेस्ट पावर प्लांट के सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। साथ ही वर्ष 2014 व 2015 में इसने ऊर्जा बचत के क्षेत्र में सम्मान भी हासिल किए हैं।

इनका कहना है

संयंत्र पूरी तरह से तैयार है। सरकार के आदेश पर कभी भी विद्युत उत्पादन शुरू किया जा सकता है। गैस की कमी से संयंत्र लंबे समय तक बंद रहता है। शुरू किया जाए तो वर्तमान बिजली संकट में संयंत्र काम आ सकता है।
- प्रेमराज बाकोलिया, चीफ इंजीनियर, धौलपुर कंबाइंड साइकिल पॉवर प्रोजेक्ट

पिछले वर्षों में उत्पादन

वर्ष उत्पादन (मिलियन यूनिट)
2018-19 20.9288
2019-20 ०
2020-21 110.38
20021-22 (सितंबर तक) ०

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