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धौलपुर

चिकित्सक के 24 पद खाली, मरीज झोलाछापों के पास जाने पर मजबूर

dholpur, बाड़ी सामान्य चिकित्सालय जिसे स्थापित हुए तकरीबन 62 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं और जिले का दूसरा सबसे बड़ा अस्पताल होने का तमगा भी हासिल है। लेकिन बिना कर्मचारियों की तैनाती के यह अस्पताल मरीजों का इलाज करने में मजबूर है।

धौलपुरJun 12, 2024 / 06:04 pm

Naresh

चिकित्सक के 24 पद खाली, मरीज झोलाछापों के पास जाने पर मजबूर 24 posts of doctors vacant, patients forced to go to quacks
dholpur, बाड़ी सामान्य चिकित्सालय जिसे स्थापित हुए तकरीबन 62 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं और जिले का दूसरा सबसे बड़ा अस्पताल होने का तमगा भी हासिल है। लेकिन बिना कर्मचारियों की तैनाती के यह अस्पताल मरीजों का इलाज करने में मजबूर है। क्योंकि अस्पताल में मरीजों की आवक के अनुपात में तैनात चिकित्सक बेहद ही कम हैं। यही कारण है कि कोई भी मरीज यहां से संतुष्ट पूर्ण इलाज पाकर वापस नहीं जाता बल्कि रेफर की पर्ची बनवाना उसके लिए जरूरी हो जाता है। मौजूदा समय में सामान्य चिकित्सालय में कुल 42 पद स्वीकृत हैं जिनमें से 24 पद रिक्त हैं और तो और फिजीशियन जैसे महत्वपूर्ण पद को भी सरकार अब तक नहीं भर पाई है। यही कारण है कि सभी सुविधाओं से लैस बाड़ी सामान्य चिकित्सालय आसपास के मरीजों को इलाज मुहैया कराने तक में असमर्थ है।
फायदा उठा रहे हैं झोलाछाप डॉक्टर

बाड़ी सामान्य चिकित्सालय में चिकित्सकों के पद रिक्त होने का फायदा झोलाछाप डॉक्टरों के साथ-साथ अवैध रूप से संचालित होने वाले क्लीनिक संचालक उठा रहे हैं क्योंकि अस्पताल में इलाज ना मिलने के कारण मजबूर होकर मरीज इन्हीं झोलाछाप डॉक्टरों का शिकार बनते हैं। तो निजी क्लिनिको में जाने के लिए मजबूर हो जाते हैं।
क्षमता 200 बेड की, स्टाफ 100 बेड के लिए भी नहीं

बाडी सामान्य चिकित्सालय को 200 बेड का कर दिया गया है। जिसे रेकॉर्ड के मुताबिक जिले का दूसरा सबसे बड़ा अस्पताल माना जाता है। लेकिन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ मानवीय संसाधनों की भी आवश्यकता होती है चिकित्सकों के पद रिक्त होने के साथ-साथ चिकित्सा विभाग में कर्मचारियों की कमी भी दूसरे बड़े अस्पताल को सक्षम नहीं बना पा रहा।
30 से खुला अस्पताल, अब पहुंचा 200 बेड तक

यह अस्पताल 62 वर्ष पुराना है जो कि 30 बेड से शुरू हुआ था। लेकिन वर्तमान में इसे 200 बेड तक पहुंचा दिया गया है। सारी सुविधाओं से लैस होने के बावजूद भी अस्पताल में चिकित्सकों की कमी सबसे बड़ी अवरोध बन के खड़ी हुई है। जिसे लेकर समय-समय पर मांग उठाई जाती रही है। पीएमओ हरि किशन मंगल ने बताया कि वर्तमान में अस्पताल का ओपीडी रुटीन में 1000 से ऊपर चलता है जबकि मौसमी बीमारियों के दौरान 1500 तक पहुंच जाता है। ऐसे में अस्पताल में जगह की भी कमी हो जाती है।
50 करोड़ की लागत बनेगा नया अस्पताल भवन

बता दें कि बाड़ी कस्बे में अब 50 करोड़ रुपए की लागत से नया भवन बनेगा। गत दिनों नवीन भवन को लेकर यहां कृषि उपज मण्डी स्थित आवंटित जमीन पर कार्य शुरू हो गया। नक्शा व डिजायन में तकनीकी खामी के चलते निर्माण में देरी से हुई। लेकिन माना जा रहा है कि इस भवन के बनने से बाड़ी में इलाज की सुविधाओं का विस्तार होगा और रैफर वाली स्थिति थमेगी।
अस्पताल में चिकित्सकों के पद रिक्त होने से समस्या बनी हुई है। पदों को भरने के लिए लगातार विभाग से पत्राचार किया जाता है। वर्तमान में ओपीडी एक हजार से ऊपर चली जाती है। इससे दिक्कतें आती हैं। अस्पताल में 24 चिकित्सक के पद रिक्त हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधि भी लगातार प्रयास करते हैं, लेकिन पद रिक्त के चलते बेहतर इलाज में दिक्कतें आती हैं।
– डॉ.हरि किशन मंगल, पीएमओ बाड़ी सामान्य अस्पताल

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