एयर क्वालिटी इंडेक्स ने दिल्ली को भी पीछे छोड़ा, राजाखेड़ा में एक्यूआई 312 पहुंचा

राजाखेड़ा. देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार राजधानी दिल्ली में जहां एक्यूआई 300 के आसपास चल रहा है, वहीं राजस्थान की आखिरी सीमा पर बसे राजाखेड़ा में एक्यूआई बुधवार को 312 पर पहुंच कर प्रदूषण फैलाने के मामले में राजधानी को भी पीछे छोड़ दिया। प्रथम दृष्ट्या ये बातें आम आदमी के लिए सामान्य हो सकती हैं,

By: Naresh

Updated: 29 Oct 2020, 06:45 PM IST

एयर क्वालिटी इंडेक्स ने दिल्ली को भी पीछे छोड़ा, राजाखेड़ा में एक्यूआई 312 पहुंचा
घुटन और बीमारियों की आशंका के बीच जीने की मजबूरी

राजाखेड़ा. देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार राजधानी दिल्ली में जहां एक्यूआई 300 के आसपास चल रहा है, वहीं राजस्थान की आखिरी सीमा पर बसे राजाखेड़ा में एक्यूआई बुधवार को 312 पर पहुंच कर प्रदूषण फैलाने के मामले में राजधानी को भी पीछे छोड़ दिया। प्रथम दृष्ट्या ये बातें आम आदमी के लिए सामान्य हो सकती हैं, लेकिन इस स्तर पर बुजुर्गों के साथ अब युवा और बच्चों के लिए भी आबोहवा खतरनाक ओर जहरीली हो चुकी है। जहां स्वस्थ व्यक्तियों के लिए भी गंभीर बीमारियों के लिए हालात तैयार होते जा रहे है। जहां दिल्ली मेंं प्रदूषण काबू करने के लिए ऑड इवन लागू किया जाता है। वहीं राजाखेड़ा जैसे शहरों में प्रदूषण का स्रोत जानते हुए भी लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया जाता है।
क्या है मसला
आगरा में ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए न्यायालय द्वारा लागू ताज ट्रीपोजियम योजना में 30 किलोमीटर की परिधि में धुंआ उत्सर्जन करने वाले उद्योगों को जबरन बंद कराकर सीमा से निष्काषित कर दिया गया था। जिनमें वंहा संचालित ईंट भट्टे भी थे। यह सभी बड़े व्यापारी राजाखेड़ा को सबसे सुगम स्थल मानकर यहां आते चले गए। 2010 तक यहां भट्टों की संख्या 60 से ऊपर पहुंच गई। मृतप्राय प्रशासत और सस्ती जमीन के अलावा राज्य में विविध विभागों में समन्वय न होने से इनके अवैध कार्यो का पर्यवेक्षण न होना इनके लिए मुफीद साबित हुआ। जिससे ये भट्टे मोटे मुनाफे का केंद्र बनते चले गए। जिसके बाद तो दिन प्रतिदिन धन उगलने वाला उद्योग यहां फैलता चला गया और मात्र 10 किलोमीटर की परिधि में ही 100 से अधिक भट्टे स्थापित हो चुके हैं।
उगल रहे जहरीला धुंआ

भट्टे जहां व्यापारियों के लिए धन उगल रहे है, वहीं यहां निवास करने वाली लाखों की आबादी के लिए जहरीला धुआं उगल कर आबोहवा को जहरीला बना रहे हैं। यहां की आबोहवा में जहरीले तत्वों की मात्रा दिल्ली के सघन प्रदूषण से ज्यादा हो चुकी है। जिसकी कहीं चर्चा तक नहीं होती। वहीं जिम्मेदार सब कुछ जानकर भी अनजान बने हुए हैं।

यों बने प्रदूषण के मानक
राजकीय चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजकुमार यादव ने बताया कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत 17 अक्टूबर 2014 को पर्यावरण का जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने वायु गुणवत्ता सूचकांक जारी किया था। जिसमें 8 प्रमुख प्रदूषक तत्वों को शामिल किया गया था। जिनमें पीएम 2.5 और पीएम 10 भी शामिल थे। इसके लिए 6 वर्ग बनाए गए। जिनमें 0 से 50 तक अच्छा, 51 से 100 तक संतोषजनक, 101 से 200 तक सामान्य, 201 से 300 तक खराब और 301 से ऊपर तो अतिखराब की श्रेणी रेड जोन माना गया। जो मानव स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा पैदा करता है। इन हालात में श्वसन संबंधी रोग फैलने लगते है। फेफड़े व हृदय संबंधी रोगियों के लिए तो यह काफी खतरनाक होता है। लंबे समय तक अगर मनुष्य ऐसे वातावरण में रहे तो स्वस्थ व्यक्तियों के लिए भी गंभीर खतरा पैदा हो जाता है ।
नियमों का कर रहे उल्लंघन
क्षेत्र में स्थापित ईंट भट्टे सरकार के नियमों का खुला उल्लंघन भी कर रहे हैं। इन पर बिहार और उत्तरप्रदेश के श्रमिक परिवार बेहद अमानवीय हालात में काम करते हैं। जिनके छोटे छोटे बच्चों को भी भट्टों के खतरनाक कार्यो में लगा दिया जाता है। राजस्व की चोरी की तो कोई सीमा ही नहीं है। बड़ी संख्या में तो प्रभावशालियों के भट्टों का भू उपयोग परिवर्तन तक नहीं कराया गया है। जिन्होंने कराया है वो केवल चिमनी की भूमि का है, जबकि इससे 20 गुना भूमि तक व्यावसायिक कार्यो में प्रयुक्त करते है। खनन नियमो का तो ये खुला उल्लंघन कर ही रहे हैं। अगर जांच की जाए तो ये सारी अनियमितताएं सामने आ जाएंगी। लेकिन इनकी जांच और कार्यवाही के नाम पर सिर्फ प्रशासन और प्रभावशाली व्यवसायियों की नूरा कुश्ती ही होकर रह जाती है।

अब जागे अधिकारी

ईंट भट्टों का सर्वे कराया जा रहा है। इनके द्वारा किए गए खनन और प्राप्त की गई स्वीकृतियों का भी मिलान कराया जाएगा। प्रदूषण की जांच के लिए उपखंड अधिकारी द्वारा प्रदूषण नियंत्रण मंडल को लिखा जा चुका है।
नाहर सिंह , तहसीलदार, राजाखेड़ा।
इनका कहना है

नि:संदेह प्रदूषण मानवीय जीवन के लिए बड़ा खतरा है। अगर एक्यूआई 300 पार कर रहा है तो बेहद चिंताजनक है। सभी संबंधितों को इसे काबू में लाया जाना चाहिए।

डॉ. धीरेंद्र दुबे, ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी राजाखेड़ा।

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