सबसे ज्यादा आए बारहेडेड गीज

सबसे ज्यादा आए बारहेडेड गीज
dholpur

Mukesh Kumar Sharma | Updated: 03 Feb 2016, 11:48:00 PM (IST) Dholpur, Rajasthan, India

सर्दी के मौसम में प्रवासी परिंदों की शरण स्थली बने जलाशयों में इस बार सबसे अधिक बारहेडेड गीज पक्षियों

धौलपुर।सर्दी के मौसम में प्रवासी परिंदों की शरण स्थली बने जलाशयों में इस बार सबसे अधिक बारहेडेड गीज पक्षियों का कलरव सुनाई दे रहा है। यह पक्षी तिब्बत से यहां प्रवास पर आते हैं। इस बार इनकी संख्या धौलपुर के जलाशयों में करीब दो हजार से अधिक रही है, लेकिन आगामी वर्षों में यह संख्या बरकरार रहने या बढऩे पर संकट मंडराने लगा है। कारण बांधों में समय से पहले ही पानी कम होने लगा है। कम बारिशऔर सिंचाई के लिए पानी की बढ़ती आवश्यकता व बांधों के पेटे में सिंचाई के चलते आगामी सीजन में इनकी संख्या कम होने की आशंका है।


जिले के जलाशयों में वन विभाग की ओर से 12 से 24 जनवरी तक कराई गई प्रवासी परिंदों की गणना में यह जानकारी सामने आई है। यह गणना धौलपुर में पहली बार कराई गई है, जिसमें वनकर्मियों व पक्षी प्रेमियों ने भाग लिया था। इस गणना में यहां के जलाशयों में सबसे अधिक प्रवासी पक्षी बारहेडेड गीज मिले हैं।

शाकाहारी पक्षी

बारहेडेड गीज शाकाहारी प्रवासी पक्षी है। यह यहां जलाशयों में पाई जाने वाली वनस्पति व जलाशयों के आस-पास खेतों में उगने वाली घास व फसल के छोटे पौधों को खाकर ही अपना पेट भरता है। खेतों में मार्च तक फसल बड़ी हो जाती है और जलाशयों में पानी सूखने लगता है। तब यह यहां से उड़ जाते हैं।

इन जलाशयों में दिखा सबसे अधिक

गणना के दौरान सबसे अधिक बारहेडेड गीज पार्वती बांध में 950 की संख्या में दिखाई दिया। इसके बाद तालाब शाही बांध में 700, उर्मिला सागर बांध में 50 व चंबल में करीब 393 बारहेडेड गीज दिखाई दिए।

नवम्बर से मार्च तक प्रवास


वनकर्मियों व पक्षी प्रेमियों ने बताया कि बारहेडेड गीज तिब्बत के पहाड़ी इलाके में पाया जाता है। वहां बर्फबारी होने व सर्दी अधिक पडऩे पर हर साल नवम्बर माह के दूसरे सप्ताह तक तिब्बत को छोड़ देते हैं। इसके बाद यहां के जलाशयों में शरण लेते हैं।

इनका कहना है

 पक्षियों की गणना के दौरान जलाशयों में सबसे अधिक संख्या में बारहेडेड गीज दिखाई दिए हैं। इनकी संख्या दो हजार से अधिक है।
आई.पी. सिंह, डीएफओ धौलपुर

 बारहेडेड गीज की इनकी सुरक्षा एवं संरक्षण पर ध्यान दिया जाए तो संख्या बढ़ सकती है। राजीव तोमर, मानद वन्यजीव प्रतिपालक धौलपुर

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