बिन स्टाम्प नहीं चलेगी 'बंदूक'

हथियार रखने का शौक रखने वाले लोगों को हथियार नवीनीकरण के आए नए आदेशों ने झमेले में डाल दिया है

By: शंकर शर्मा

Published: 22 Dec 2015, 11:57 PM IST

धौलपुर. हथियार रखने का शौक रखने वाले लोगों को हथियार नवीनीकरण के आए नए आदेशों ने झमेले में डाल दिया है। नए आदेशों के तहत अब बंदूक बिना स्टाम्प के नहीं चल सकेगी। नवीनीकरण के लिए न्यायालय से स्टाम्प के साथ शपथ पत्र और पुलिस सत्यापन के लिए बीट प्रभारी से लेकर पुलिस उपाधीक्षक तक की रिपोर्ट ली जा रही है। यह नवीनीकरण तीन साल में एक बार हो रहा है। इसके लिए तिथि 31 दिसम्बर तय की गई है। ऐसे में पुलिस अधीक्षक कार्यालय, न्यायालय परिसर और कलक्ट्रेट कार्यालय में लाइसेंसधारियों का जमावड़ा हो रहा है।

पूर्व में जिले के शस्त्र अनुज्ञापत्रधारियों के लिए थानावाइज शिविर लगाकर उनका नवीनीकरण कर दिया जाता था, लेकिन इस बार नए नियम-कायदों ने इसको खासा पेचीदा बना दिया है। नियमों में आए बदलाव के कारण लाइसेंसधारी पुलिस अधीक्षक कार्यालय, अतिरिक्त जिला कलक्टर कार्यालय, थाना एवं कचहरी परिसर में इधर से उधर चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिल पा रही है। नए आदेशों की वजह से अब हर थाना क्षेत्र के लोगों को यहां हाजिरी देनी पड़ रही है। इसके बाद भी रिपोर्ट पर अधिकारी पूरी तरह 'गौरÓ नहीं फरमा रहे हैं। ऐसे में लोगों को बेहद दिक्कत हो रही है।

इस बार यह आए नए आदेश
शस्त्रों का नवीनीकरण कराने के लिए इस बार पुलिस अधीक्षक कार्यालय की रिपोर्ट की अनिवार्यता कर दी है, जो पहले नहीं थी। एसपी कार्यालय की ओर से अब रिपोर्ट संबंधित थाने से ली जाती है। बीट प्रभारी मौका देखकर दो गवाहों के फोटो और पहचान पत्र के साथ थाना प्रभारी और पुलिस उपाधीक्षक के हस्ताक्षर कराने के बाद रिपोर्ट एसपी कार्यालय पहुंचाता है। इसके अलावा रिवाल्वर के लिए 1 हजार, राइफल के लिए 750 तथा 12 बोर की बंदूक के लिए 500 रुपए का शपथ पत्र और सभी हथियारों के नवीनीकरण के लिए 10 रुपए का शपथ पत्र लिया जा रहा है। इसके अलावा शहरी क्षेत्र के व्यक्तियों से पार्षद का तथा ग्रामीण क्षेत्र में सरपंच का चरित्र प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाइसेंस शाखा से रिवाल्वर के लिए 150, राइफल के लिए 100 एवं बंदूक के लिए 60 रुपए की रसीद काटी जा रही है। 

एक मात्र जिले में आदेेश!
लाइसेंसधारियों ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से इस बार सिर्फ स्टाम्प मांगे गए हैं, लेकिन अधिकारियों ने एसपी कार्यालय की रिपोर्ट का झमेला लगा दिया है, जो अन्य जिलों में नहीं है। अन्य जिलों में सिर्फ संबंधित थाने की रिपोर्ट ही मान्य की जा रही है।

पुराने केसों का विवरण
लाइसेंसधारियों का कहना है कि संबंधित थाने की रिपोर्ट के साथ अब पिछले मुकदमे में हुए निस्तारण की रिपोर्ट भी चाही जा रही है। मसलन, किसी व्यक्ति पर वर्ष 2009 में कोई केस लगा और उसका एक वर्ष में निस्तारण हो गया। इसके बाद उसका वर्ष 2012 में शस्त्र का नवीनीकरण हो गया। इसके बाद अब वर्ष 2009 वाले केस का विवरण 2015 में भी चाहा जा रहा है। इससे लोगों को मुश्किल हो रही है।

नवीनीकरण के लिए स्टाम्प अनिवार्य कर दिया है। प्रदेशभर में एसपी कार्यालय की रिपोर्ट लेने के मामले की तो मुझे जानकारी नहीं है, लेकिन जहां भी मैं रहा हूं। वहां नवीनीकरण के यही नियम रहे हैं।
अनिल कुमार वाष्र्णेय, अतिरिक्त जिला कलक्टर धौलपुर
शंकर शर्मा
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