शहर के गंदे पानी से मैली हो रही स्वच्छ चम्बल नदी, नदी में गिर रहे शहर के गंदे नाले

धौलपुर. साफ व स्वच्छ नदी में शुमार चम्बल नदी में शहर का गंदा पानी समा रहा है। धौलपुर जिला मुख्यालय पर आधा शहर का गंदा पानी नालों के माध्यम से चम्बल नदी में गिर रहा है। राजघाट के समीप तीन नालों से बेहताशा गंदा पानी जाने से स्वच्छ पानी में गंदगी समा रही है।

By: Naresh

Published: 25 Sep 2020, 05:52 PM IST

शहर के गंदे पानी से मैली हो रही स्वच्छ चम्बल नदी, नदी में गिर रहे शहर के गंदे नाले

जलीय जीव जन्तुओं के जीवन पर संकट

धौलपुर. साफ व स्वच्छ नदी में शुमार चम्बल नदी में शहर का गंदा पानी समा रहा है। धौलपुर जिला मुख्यालय पर आधा शहर का गंदा पानी नालों के माध्यम से चम्बल नदी में गिर रहा है। राजघाट के समीप तीन नालों से बेहताशा गंदा पानी जाने से स्वच्छ पानी में गंदगी समा रही है। इससे जहां जलीय जीवों के जीवन पर संकट के बादल छाए हैं, वहीं शहरवासियों पर भी चिंता की लकीरें खिंच रही है। चम्बल नदी से ही धौलपुर शहर ही नहीं, बल्कि भरतपुर तक पानी पहुंच रहा है। इससे शुद्ध पेयजल की बात कहना बेमानी साबित हो रही है। चम्बल नदी में स्वच्छ पानी होने के कारण ही इसे घडिय़ाल संरक्षित क्षेत्र घोषित किया हुआ है। घडिय़ाल स्वच्छ पानी में ही निवास करते हैं। इस नदी को नगरपरिषद ने गंदा कर रखा है। चम्बल नदी स्थित राजघाट के पास तीन नालों के माध्यम से शहर का पानी जा रहा है, लेकिन इस ओर न तो नगरपरिषद का ध्यान है और ना ही जिला प्रशासन का। गंभीर विषय तो यह है कि इसे बंद करने के लिए किसी ने भी पहल नहीं की है। इससे चम्बल दूषित होती जा रही है।

पुराना शहर, सागरपाड़ा से जा रहा पानी

शहर का बड़ा भाग पुराना शहर, सागरपाड़ा, कोटला, महात्मानंद की बगीची, मदीना कॉलोनी, राजकीय सामान्य चिकित्सालय से निकलने वाला पानी चम्बल नदी में ही समा रहा है। जबकि आधा पानी राजाखेड़ा बाइपास स्थित खंदकों में जाता है। एक तरफ जहां गंदे पानी से चम्बल नदी दूषित हो रही है, वहीं दूसरी ओर राजाखेड़ा बाइपास पर खेतों में पानी भरने से लोगों की फसल ही नहीं होती है। साथ ही कई कॉलोनियों में पानी भर जाता है। बारिश के दिनों में आगे करीब एक दर्जन गांवों में पानी पहुंच जाता है, ऐसे में खड़ी फसल बर्बाद हो जाती है, लेकिन नगरपरिषद अभी तक इसका समाधान नहीं तलाश कर पाई है।

सीवर लाइन फिर भी गंदा पानी चम्बल में
जिला मुख्यालय पर करीब-करीब पूरे शहर में सीवर लाइन डली हुई है। जहां छोटी गलियां थीं, वहां पर अमृत योजना के तहत सीवर लाइन डाली जा चुकी है। साथ ही करीब दस से बारह हजार मकानों में कनेक्शन भी कर दिए गए हैं। इसके बाद भी गंदा पानी निकल कर चम्बल में नालों के माध्यम से जा रहा है। इससे सीवर लाइन का औचित्य दिखाई नहीं पड़ रहा है।
नमामि गंगे में शामिल चम्बल
केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना नमामि गंगे में चम्बल नदी भी शामिल हैं। इससे आसपास के स्थान को विकसित किया जाएगा। जिससे पानी भी स्वच्छ रहे और लोगों के लिए सहूलियत भी रहे। लेकिन नगरपरिषद को इसका भी ख्याल नहीं है। ऐसे में जहां चम्बल को बचाने के लिए रेत उत्खनन पर भी प्रतिबंध है, उसी नदी में गंदा पानी छोडऩा बहुत गंभीर विषय है।

इनका कहना है
सीवर लाइन में केवल घरों का पानी जाता है। लेकिन सार्वजनिक स्थानों का पानी नालों में जा रहा है। इसके लिए डब्ल्यूटीपी (वाटर ट्रीटमेंट प्लांट) बनाया जाएगा। इसके लिए डीपीआर बनाई जा रही है। इसके बाद नाले को बंद कर दिया जाएगा।
सौरभ जिंदल, आयुक्त, नगरपरिषद, धौलपुर।

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