आगे आएं 'आप, हम रहेंगे साथ: डॉ. गुलाब कोठारी

धौलपुर. भौगोलिक, सामाजिक व राजनीतिक दृष्टि से सुदृढ़ होते हुए भी जिले में जनमानस का आगे नहीं आना, विकास को प्रभावित कर रहा है। जनता को सामूहिक रूप से आगे आना होगा, तभी विकास संभव है। चाहे यहां पर डाकुओं का खौफ रहा, पत्रकारों पर हमले हुए, लेकिन पत्रिका अपना योगदान देने में कभी पीछे नहीं रहा। पत्रिका आज भी स्वयं को चौथा स्त

By: Naresh

Updated: 21 Jan 2021, 10:19 AM IST

धौलपुर. भौगोलिक, सामाजिक व राजनीतिक दृष्टि से सुदृढ़ होते हुए भी जिले में जनमानस का आगे नहीं आना, विकास को प्रभावित कर रहा है। जनता को सामूहिक रूप से आगे आना होगा, तभी विकास संभव है। चाहे यहां पर डाकुओं का खौफ रहा, पत्रकारों पर हमले हुए, लेकिन पत्रिका अपना योगदान देने में कभी पीछे नहीं रहा। पत्रिका आज भी स्वयं को चौथा स्तम्भ नहीं समझकर केवल जनता और सरकार के बीच सेतु बनने का कार्य कर रहा है।

यह विचार बुधवार को राजस्थान पत्रिका समूह के चेयरमैन तथा प्रधान सम्पादक डॉ. गुलाब कोठारी ने वर्चुअल माध्यम से हुए संवाद सेतु कार्यक्रम में धौलपुर के प्रबुद्धजन पाठकों के मध्य रखे। उन्होंने कहा कि धौलपुर ने मुख्यमंत्री, वित्तमंत्री सहित हर सरकार में प्रतिनिधित्व दिया, इसके बाद भी जो स्थिति जिले में होनी चाहिए थी, वह दिखाई नहीं देती है।

इसका आंकलन करने की जरूरत है। यहां उन्हीं जगहों का विकास हुआ है, जिनको विकसित करने के लिए पत्रिका की ओर से अभियान चलाए गए और उनमें जनता जुड़ती चली गई। लेकिन जिनमें जनता नहीं जुड़ी हैं, वहां पर विकास की अलख नहीं जलाई जा सकती है। केवल अभियान चलाने से काम नहीं चलता है, इसके लिए जनमानस को भी साथ आने की जरूरत है। इसके लिए पत्रिका हमेशा लोगों के साथ खड़ा हुआ है। आमजन को यह आंकलन करना होगा कि 70 साल में हमने अपनी माटी को क्या दिया। आज धौलपुर अवैध बजरी खनन, दस्यु, हाइवे पर वसूली आदि के लिए बदनाम है। इससे बड़ी बात क्या होगी, कि एक पुलिस अधीक्षक को जिले से बदर करना पड़ा हो। यह तकलीफ देने वाली बात है।

ऐसा नहीं है कि धौलपुर जिला किसी भी बात में कमजोर रहा हो, लेकिन स्वार्थवश आया पैसा माफियाओं को पैदा करता चला गया। आज बेरोजगारी पैदा हो गई, कारखाने बंद हो गए, बिजली की चोरी बढ़ गई, बड़े उद्योगपति तक बिजली चोरी में शामिल रहे हैं। लेकिन बात यह है कि हम क्या करें? हमे आगे आना होगा। सभी चीजों को सरकार पर नहीं छोड़ा जा सकता है। पत्रिका ने लोगों को जोडऩे के लिए अकाल समय में एक मुट्ठी अनाज योजना चलाई, इससे बच्चों मेंं सहयोग की भावना पैदा हुई। सरकार की तरफ ताकना ठीक नहीं है, लेकिन सरकार को जगाने का काम जनता ही करेगी।

छोटी-छोटी बने समितियां
कोठारी ने सुझाव दिया कि समस्याओं के निराकरण के लिए शहर के लोग दस-दस जनों की समितियां बनाएं, जो हर विकास कार्य को गंभीरता से देखें तो काम भी ठीक होगा और गुणवत्तापूर्ण भी होगा।

समझना होगा माटी का महत्व
कोठारी ने कहा कि लोग अंधी दौड़ में चले जा रहे हैं। हमारे पांव के नीचे जमीन है या नहीं, यह ही नहीं पता कि हम क्यों जी रहे हैं। खुद के लिए हर कोई जी रहा है, लेकिन अपनी माटी के लिए जीना सीखना होगा। लोगों को संकल्प लेना होगा कि हमने धौलपुर जिले के लिए कुछ करना होगा, तभी विकास का सपना साकार होगा।

पत्रिका की विश्वसनीयता आज भी बरकरार
पत्रिका धौलपुर जिले में बड़ी बड़ी खबरों का साक्षी रहा है। पत्रिका की छवि कभी फेक न्यूज, पेड न्यूज की नहीं रही। समस्या है तो पत्रिका छापेगा, इसके लिए कलम की कीमत चुकानी पड़ती है। यह हमारा सामाजिक, नैतिक दायित्व है। हमारा पाठकों से आत्मा का जुड़ाव है। आज भी दूसरी भाषा निवासी राजस्थान पत्रिका पढ़कर ही अपने बच्चों को हिन्दी सिखाते हैं।

यह जिले की प्रति गुलाब कोठारी का प्रेम है कि उन्होंने जिले की मर्म को पकड़ कर पीड़ा जाहिर की है। इसके विकास के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। यह संवाद सेतु जिले को नई दिशा देगा। जिले में सामूहिक प्रयासों से विकास को गति दी जाएगी।
डॉ. मनोज राजोरिया, सांसद, करौली-धौलपुर।

शिक्षा का स्तर सुधारने की जरूरत है, अगर विकास की अलख जगानी है तो अच्छे स्कूल खुलने आवश्यक है। वहीं नेताओं को लोगों की निजी स्वार्थ की पूर्ति करने के अलावा सार्वजनिक कार्यांे की ओर ध्यान देना होगा।
पीसी पाठक, चिकित्सक, धौलपुर।

बेरोजग़ारी की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। राजनेताओं और अधिकारियों में इच्छा शक्ति का अभाव है। बजरी खनन को कानूनी रूप व सुनियोजित तरीके से चालू करवाया जाए, यह धौलपुर में रोजग़ार का सबसे बड़ा साधन बन सकता है।
लोकेन्द्र सिंह चौहान, पार्षद, राजाखेड़ा।

धौलपुर में उठे मुद्दे
जिले में सड़कों की हालत बहुत बुरी है। आगरा से राजाखेड़ा पहुंचने में चार घण्टे लग जाते हैं। स्कूली शिक्षा में पर्याप्त संख्या में शिक्षक नहीं है। ऐसे लगता है कि आजादी के 70 साल बाद भी धौलपुर धूलपुर बना हुआ है।
डीपी शर्मा, यूनाइटेड नेशंस की आईएलओ में अन्तरराष्ट्रीय परामर्शक, मूल निवासी राजाख्ेाड़ा

जिल में रोजगार की महती आवश्यकता है। सबसे बड़ा खनन व्यवसाय है, लेकिन इनका सीमांकन नहीं होने के कारण अवैध खनन होता है। इस कारण रोजगार के संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, जिससे जिले के लोगों को पलायन नहीं करना पड़े।

धनेश जैन, प्रवक्ता, जैन समाज, धौलपुर।

पत्रिका सामाजिक सरोकारों में हमेशा अग्रणी रहा है। पत्रिका संवाद सेतु में सामने आए मुद्दों को लेकर प्रशासन गंभीर है और विश्वास दिलाता हूं कि समस्याओं के निराकरण के लिए प्रशासन तत्पर रहेगा। जिले ने राज्य में कई नवाचार किए हैं, जिससे जिले की नई पहचान बनी है।
आरके जायसवाल, जिला कलक्टर, धौलपुर।

जिले में जागरूकता की कमी है। अच्छे व बड़े कॉलेज नहीं है। इसके लिए सभी को प्रयास करने चाहिए। जिससे प्रतिभाएं पलायन नहीं करें।
मीनल भार्गव, अधिवक्ता, धौलपुर।

जिले में अधिकारियों में आपसी सामंजस्य नहीं होने के कारण आए दिन सड़कों को क्षतिग्रस्त कर दिया जाता है। जिले में भारी सम्पदा होने के बाद भी राजस्व की प्राप्ति नहीं हो पाती है। इसके लिए प्रयास करने होंगे।
विमल भार्गव, जिला सचिव, रोटरी क्लब, धौलपुर।

राज्य सरकार ने हर ब्लॉक में स्कूल-कॉलेज तो खोल दिए, लेकिन उनमें शैक्षणिक स्टाफ नहीं लगा है।
पंकज तिवारी, छात्र नेता

संवाद सेतु में जिले को विकास के लिए नई दिशा मिली है। जिले में लोगों में जागरूकता की कमी है। प्रबुद्धजनों को प्रशासन का सहयोग करते हुए आगे आना होगा। तभी समस्याओं का निराकरण हो सकेगा।
सत्यपाल मीणा, आईआरएस, इंदौर, मध्यप्रदेश।

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