7 दिन में भी नहीं आ रही कोरोना रिपोर्ट, विभाग की लापरवाही पड़ रही भारी

राजाखेड़ा. क्षेत्र से लिए गए कोरोना सैम्पलों की रिपोर्ट 5 से 7 दिन में भी नहीं आ पा रही है। ऐसे में सैम्पल दिए व्यक्ति के कोरोना पॉजिटिव होने पर एक सप्ताह में दर्जनों व्यक्तियों तक कोरोना का संक्रमण फैल सकता है। हालांकि नियम यह है कि सैम्पल दिए व्यक्ति को क्वारन्टीन किया जाए,

By: Naresh

Published: 18 Sep 2020, 10:48 AM IST

7 दिन में भी नहीं आ रही कोरोना रिपोर्ट, विभाग की लापरवाही पड़ रही भारी

राजाखेड़ा. क्षेत्र से लिए गए कोरोना सैम्पलों की रिपोर्ट 5 से 7 दिन में भी नहीं आ पा रही है। ऐसे में सैम्पल दिए व्यक्ति के कोरोना पॉजिटिव होने पर एक सप्ताह में दर्जनों व्यक्तियों तक कोरोना का संक्रमण फैल सकता है। हालांकि नियम यह है कि सैम्पल दिए व्यक्ति को क्वारन्टीन किया जाए, लेकिन राज्य सरकार द्वारा क्वारन्टीन व्यवस्था लंबे समय से स्थगित कर दी गई है। वे होम कवारन्टीन की व्यवस्था तो कार्यवाही के अभाव में संक्रमित और उनके परिजन तक ठीक तरीके से पूरा नहीं कर पा रहे। सैम्पल लिए संदिग्ध कहां से पूरा कर करेंगे। ऐसे में चैत्र में कोरोना का कहर कम होने के स्थान पर और ज्यादा बढऩे का खतरा पैदा हो रहा है
क्वारन्टीन सेंटर बहाली की मांग

होम कवारन्टीन व्यवस्था प्रभावी न होने से अब एक बार फिर संस्थागत क्वारन्टीन सेंटर की मांग जोर पकडऩे लगी है, जहां पॉजिटिव व्यक्ति सही तरीके से कवारन्टीन किए जा सके। साथ ही सैम्पल लिए गए व्यक्तियों को भी सुरक्षित क्वारन्टीन किया जा सके।
दूसरे दिन रिपोर्ट की मांग
हाल फिलहाल रिपोर्ट 5 से 7 दिन के बीच आ रही है। जबकि यह दूसरे दिन आ जानी चाहिए। जैसे-जैसे समय बीतता है सैम्पल देने वाला तनाव और अवसाद का शिकार होने लगता है। गत 10 सितंबर को संक्रमित पाए गए व्यक्ति ने बताया कि उसने अगले दिन 11 सितंबर को पूरे परिवार के सैम्पल दिए, जिनकी रिपोर्ट बुधवार अपराह्न तक प्राप्त नही हुई थी। ऐसे में सभी सदस्य अलग अलग कमरों में कवारन्टीन होने से एक सप्ताह तक जबरदस्त तनाव के माहौल में है। बकौल पीडि़त ‘मेरे पास तो भाग्यवश बढ़ा घर है, लेकिन 90 फीसदी परिवारों के पास नहीं है। ऐसे में संक्रमित घर के ओर सदस्यों को निश्चित ही संक्रमित कर देगा।
अब तक नही है बीसीएमओ
उपखंड को दिवंगत बीसीएम ओ डॉ. महेश वर्मा के दुखद निधन के बाद नया बीसीएमओ तक नहीं मिल पाया, जो कोरोना काल मे चिकित्सा विभाग की संवेदनहीनता की पराकस्था है। क्योंकि डॉ. वर्मा को 24 अगस्त को ही जयपुर ले जाया गया था, तभी से पद पर कोई पूर्णकालिक अधिकारी नहीं है। जो उपखंड में चिकित्सा सेवाओं का समन्वय कर सके। ऐसे में बिना मुखिया का विभाग दिशाहीन होता जा रहा है।
नियमों का नहीं हो रहा पालन
क्षेत्र में कोरोना की गाइड लाइन का पालन न होना भी एक बढ़े खतरे का संदेश दे रहा है। जहां खुद मुख्यमंत्री ने अपील की है कि 4 सप्ताह कोई भी व्यक्ति बिना मास्क घर से न निकलें, तो ही कोरोना पर नियंत्रण किया जा सकता है। वहीं जमीनी हालात बिल्कुल इसके उलट है। मास्क तो इक्का-दुक्का व्यक्ति ही लगा रहे हैं। ऐसे में कोरोना पर नियंत्रण एक दूर की कौड़ी साबित हो रहा है। देर रात तक नियम विरुद्ध सजते बाजार बिल्कुल उलट कहानी कह रहे है।

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