रूठे इंद्रदेव को मानने के लिए किया गया दाल-अंगा का भंडारा

बाड़ी. उमस भरी गर्मी के बीच आधा आषाढ़ बीतने को है, लेकिन पानी के कहीं दर्शन नहीं है। मानसून ऐसा रूठा है, अभी तक जिलेवासियों को पानी देने के लिए राजी नहीं, यही कारण है कि इन दिनों लोग उमस भरी गर्मी से परेशान हैं। लोगों की माने तो हर वर्ष जुलाई माह में जिलेभर में झमाझम बारिश होती थी,

By: Naresh

Published: 12 Jul 2021, 08:48 PM IST

रूठे इंद्रदेव को मानने के लिए किया गया दाल-अंगा का भंडारा
-सुबह से शाम तक एक हजार से अधिक लोगों ने पाई बिन पानी प्रसादी

बाड़ी. उमस भरी गर्मी के बीच आधा आषाढ़ बीतने को है, लेकिन पानी के कहीं दर्शन नहीं है। मानसून ऐसा रूठा है, अभी तक जिलेवासियों को पानी देने के लिए राजी नहीं, यही कारण है कि इन दिनों लोग उमस भरी गर्मी से परेशान हैं। लोगों की माने तो हर वर्ष जुलाई माह में जिलेभर में झमाझम बारिश होती थी, लेकिन इस बार बारिश के कहीं दर्शन नहीं है। ऐसे में रूठे इंद्रदेव को मनाने के लिए अब लोग विज्ञान को भूल पुरानी परंपरागत मान्यताओं की ओर रुख रहे हैं। जिसके तहत उपखंड क्षेत्र में दाल-अंगा का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें गरीब असहाय लोगों के साथ छोटे बच्चों को भोजन कराया जाता है।
शहर के गुम्मट मोहल्ले के हनुमान मंदिर स्कूल परिसर में दाल अंगा का आयोजन किया गया। जिसमें शहर के एक हजार के अधिक लोगों को भोजन की व्यवस्था की गई। ऐसे में यहां छोटे बच्चों और जरूरतमंद लोगों के साथ शहर के आम और खास हर नागरिक को भोजन कराया गया, लेकिन खाने के दौरान पीने के लिए पानी नहीं दिया गया। आयोजकों के अनुसार पानी के लियए तो आपको इंदर राजा से ही प्रार्थना करनी होगी। मंदिर के सेवक बल्ली बिंदल के साथ भंडारे से जुड़े भामाशाह और शहर के समाजसेवियों के आर्थिक सहयोग से यह आयोजन किया गया।
पूरे आयोजन के दौरान भले ही हजारों लोगों को भोजन कराया गया हो और मानसून को मनाने और इंद्रदेव को रिझाने का प्रयास किया गया हो, लेकिन इतनी भीड़ के बीच किसी ने भी कोरोना संक्रमण या बीमारी को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया। और न तो मौके पर मास्क लगाया गया और ना ही सोशल डिस्टेंस की पालना की गई।

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