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धौलपुर

खास भाई से भी ज्यादा अटूट है इस शख्स का अनाथ बहनों के साथ रिश्ता, 450 युवतियों की करवाई शादी

कहते हैं दूसरे की परेशानी को वही समझ सकता हे जो उस परेशानी से गुजरा हो। क्योंकि वह विकट परिस्थितियां इंसान को मजबूत बनाने के साथ दूसरों की मदद करने की प्रेरणा देती हैं।

धौलपुरJun 02, 2024 / 03:25 pm

Kamlesh Sharma

अंबर अग्निहोत्री/धौलपुर। कहते हैं दूसरे की परेशानी को वही समझ सकता हे जो उस परेशानी से गुजरा हो। क्योंकि वह विकट परिस्थितियां इंसान को मजबूत बनाने के साथ दूसरों की मदद करने की प्रेरणा देती हैं। ऐसी ही एक कहानी है जिसके हीरो अनिल अग्रवाल हैं। वह अभी तक छह सामूहिक विवाह समारोह आयोजित करा चुके हैं जिसमें 450 बहनों के पीले हाथ कराकर उनका जीवन संवारने का काम किया है।
अब आगामी 9 जून को यहां मचकुण्ड परिसर में सातवां सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन कराने जा रहे हैं। विवाह समारोह में 61 युवतियों की शादी कराई जाएगी। जिसमें 17 युवती ऐसी हैं जिनके माता-पिता और ना ही भाई-बहन हैं। अनिल बताते हैं कि इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं रहा। भाई बन जरूरतमंद बहनों के हाथ पीले कर उनकी जिंदगी संवारने की प्रेरणा खुद उनकी बहन की शादी के दौरान मिली।
पुराने दिनों को याद करते हुए वह बताते हैं कि जब उनकी बहन की शादी हुई थी। तब कार्यक्रम के लिए रुपए नहीं थे। घर में सब परेशान थे। तब पड़ोसियों के सहयोग से उनको मदद मिली। जिसके बाद उनकी बहन की शादी हुई। अनिल अभी तक छह सामूहिक विवाह आयोजित कर 450 बहनों की शादी कर घर बसा चुके है। इन्होंने 1100 बहनों के हाथ पीले करने का संकल्प लिया है। आगामी 9 जून को सातवां सामूहिक विवाह आयोजन होगा। जिसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं। कार्यक्रम में सभी समाज के लोग भी शामिल होकर बेटियों को कन्यादान करते है।

सभी को एक सामन देते हैं उपहार

सामूहिक विवाह संचालक अग्रवाल ने बताया कि वह जितनी भी बेटियों की शादी विवाह समारोह करते हैं, सभी को एक समान उपहार देते हैं। इस बार 57 वस्तुएं कन्यादान में दी जाएगी। जिसमें घर का सभी समान बेड से लेकर फ्रिज और कूलर बाकि अन्य शामिल है। इसके अलावा वस्त्र दूल्हा-दुल्हन के 17 तरह के और सोने के गहने मंगल सूत्र, नथ, कान के टोप्स, बिछिया चांदी के, अंगूठी, पायल, लिली, कानों की झुमके आदि शामिल है।

बेटे की शादी एक रुपए में की

अनिल अग्रवाल ने अपने बेटे की शादी कुछ ही माह पहले की थी। बेटे की शादी मचकुण्ड पर सीमित आयोजन कर की गई। उन्होंने बेटी के परिवार वालों की ओर से केवल एक रुपए लेकर बेटे की शादी की थी। इसके अलावा अन्य सामान लेने से इनकार कर दिया। आज के दौर में चारों भाई संयुक्त परिवार में रहते हैं। वह वर्तमान में शादी समारोह के नाम हो रहे लाखों रुपए के खर्च को बेफिजूल खर्चा बताते हैं।

यहां से शुरू हुआ कर्मपथ

अनिल सबसे पहले 2009 में करौली के कैला देवी पहुंचे थे। यहां पर उनको एक सामूहिक विवाह का आयोजन किया था। पहली बार यहां पर धर्मेन्द्र शर्मा मिले और मन मिले और फिर गहरी दोस्ती हो गई। जो कार्यक्रम में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। साल 2009 के समारोह में 360 लडक़े-लड़कियों की शादी हुई थी। जिसमें से 160 लोगों के हाथ-पैर से दिव्यांग थे। सरकार इन लोगों को दिव्यांग साइकिल दे सकती है। लेकिन अनिल अग्रवाल ने इनका घर बसाया जो आज तक जोड़े खुशहाल जीवन बिता रहे हैं।

तीन धर्मों की होती शादी

सामूहिक शादी समारोह कार्यक्रम में 11 जातियों की लड़कियां का विवाह कराया जाता है। जिसमें हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख तीनों धर्म की लड़कियां शामिल होती है। जिसके उनके ही धर्म के आचार्य शादी में विवाह पढ़ते है। सभी पंडाल में अलग-अलग विवाह होते हैं।

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