धौलपुर से एक कविता रोज......बाद मेरे..

मेरे कमरे में अकेली
दिल को दीवाना किये,
आँसू भरी आंखें लिए
मेरी आवाजों के कतरों को

By: Naresh

Published: 07 Sep 2020, 06:55 PM IST

धौलपुर से एक कविता रोज......बाद मेरे..
मेरे कमरे में अकेली
दिल को दीवाना किये,
आँसू भरी आंखें लिए
मेरी आवाजों के कतरों को
इकट्ठा कर रही हो,
जो मेरे कपडों, क़िताबों,
बिस्तरों में बस गई है
उस महक में जल रही हो
शाम के बजरे किनारे आ लगे
पर
रतजगों में गल रही हो
माज़ियों ने जो कभी
वापस किये ना
उन लम्हों में पिघल रही हो
लाख कोशिश कर के भी तो
रेज़ा रेज़ा बदल रही हो
संभल रही हो , बहल रही हो
मेरे ही साए में ढल रही हो....
ये आज तुमको ,
हुआ है क्या जो....
ख़्वाबीदा नींदों में चल रही हो...
संजीव राजसिंह परमार लेखक, धौलपुर निवासी हैं। इनको कला के साथ कविता का भी बेहद शोक है। व्यस्तम समय में भी अपने शौक का पूरा करते हैं। वहीं पेड़ पौधों से भावनात्मक जुड़ाव, बागवानी, खेती बाड़ी, वस्त्र विन्यास करना, इंटीरियर डिजाइनिंग, प्रकृति के सानिध्य में विचरण, अपनो के संग समय गुजारना भी इनको अच्छा लगता है। कला के क्षेत्र में अच्छे कीर्तिमान स्थापित किए हैं। शहर के बाहर भले ही चले गए, लेकिन शहर की यादें अभी संजेाए हुए हैं। कविताएं लिखने का बचपन से ही शौक रहा है। इस कारण अब भी कविता लिखते हैं। हर विषय पर लिखने का प्रयास करते हैं, जिससे मन आ रहे विचारों को उकेरा जा सके।

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