धौलपुर से एक कविता रोज......पापा

पापा, दो शब्दों में सारी दुनिया सी बसी है
जमाना सब छोटा सा लगता है, सामने गर उनकी हसीं है
हां, वो शायद बेहद कम हंसते हंै
हां दिल में जाने के उनके बेहद कम रस्ते है

By: Naresh

Published: 20 Sep 2020, 04:43 PM IST


धौलपुर से एक कविता रोज......पापा

पापा, दो शब्दों में सारी दुनिया सी बसी है
जमाना सब छोटा सा लगता है, सामने गर उनकी हसीं है
हां, वो शायद बेहद कम हंसते हंै
हां दिल में जाने के उनके बेहद कम रस्ते है
हां वो खड़े जैसे कोई बडे दरख़ते हैं
वो पापा कहां, वो तो फरिश्ते है

हां, वो कभी कभार झुंझला भी जाते होंगे
शायद मारे, एकाध-दो चांटें भी होंगे
वो भी तो कहीं परेशान होते होंगे
वो भी तो बैठे अकेले रोते होंगे
हां पर वह किसी को बताते नहीं
हां वो किसी को जताते नहीं है
पर क्या तुमने उनकी आखों में कभी देखा है
खबाव जो उहोंने तुम्हारे लिए सेकां है।
कभी वक्त मिले तो पूछना सुकून से
क्यूं करते हो मेहनत इतने जुनूं से
जवाब शायद खामोशी में आ सकता है
शायद पलकें भी तुम्हारी भिगा सकता है

सचिन मंगल, सरमथुरा
मंगल, सरमथुरा निवासी हैं और कॉलेज के विद्यार्थी हैं। उनको बचपन से ही कविता लिखने का शोक है। साथ ही कई बार मंचों पर भी कविता पढ़ी हैं, इससे उनका हौसला बढ़ता गया। अब बड़ी कविताएं समसामयिक विषयों के अलावा मार्मिक वाली कविता भी लिखते हैं।

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