धौलपुर से एक कविता रोज...... स्वतंत्रता

मान स्वाभिमान हेतु,सब ही खड़े थे संग
*तब इस देश को मिली है ये स्वतंत्रता*
ऊधम के हौसले से गोरे हो गये थे दंग
*तब इस देश को मिली है ये स्वतंत्रता*
साहस भगत सिंह सुखदेव की उमंग

By: Naresh

Published: 21 Sep 2020, 04:58 PM IST

धौलपुर से एक कविता रोज...... स्वतंत्रता


मान स्वाभिमान हेतु,सब ही खड़े थे संग
*तब इस देश को मिली है ये स्वतंत्रता*
ऊधम के हौसले से गोरे हो गये थे दंग
*तब इस देश को मिली है ये स्वतंत्रता*
साहस भगत सिंह सुखदेव की उमंग
*तब इस देश को मिली है ये स्वतंत्रता*
झाँसी वाली रानी मर्दानी ने लड़ी थी जंग
*तब इस देश को मिली है ये स्वतंत्रता।।*
मात भारती ने दे दिए अनेक ही प्रसून
*तब इस देश को मिली है ये स्वतंत्रता*
बन्धनों को तोड़ने का लेकर चले जुनून
*तब इस देश को मिली है ये स्वतंत्रता*
बाग जालियाँ में लोग लाखों भी दिए थे भून
*तब इस देश को मिली है ये स्वतंत्रता*
अशफ़ाक लाहिड़ी का हमने दिया था खून
*तब इस देश को मिली है ये स्वतंत्रता।।*
हमने हराये मीर जाफ़र व जयचन्द
*तब इस देश को मिली है ये स्वतंत्रता*
गोरों का चमकता सा सूर्य हो गया था मन्द
*तब इस देश को मिली है ये स्वतंत्रता*
करो या मरो का नारा हमने किया बुलन्द
*तब इस देश को मिली है ये स्वतंत्रता*
गरदन कितनी ही झूली फाँसियों के फन्द
*तब इस देश को मिली है ये स्वतन्त्रता।।*

लड़ के बचाई मात भारती की आन बान
*तब इस देश को मिली है ये स्वतंत्रता*
हमने दिए हैं नन्हे नौनिहाल व जवान
*तब इस देश को मिली है ये स्वतंत्रता*
गुरु और गूजरी माँ त्याग से हुए महान
*तब इस देश को मिली है ये स्वतंत्रता*
चार-चार बेटे चारों कर दिए बलिदान
*तब इस देश को मिली है ये स्वतंत्रता।।
होली खेलते रहे हैं खून को बना अवीर
*तब इस देश को मिली है ये स्वतंत्रता*
क्रूर नीतियों के आगे भी नहीं हुए अधीर
*तब इस देश को मिली है ये स्वतंत्रता*
बार - बार भारत का घायल हुआ शरीर
*तब इस देश को मिली है ये स्वतंत्रता*
खोये हैं सुभाष और शेखर अनोखे वीर
तब इस देश को मिली है ये स्वतंत्रता।।


विवेक कुशवाह कवि निवासी सैंपऊ

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