scriptDirt dominates the city, how will our name be in the cleanliness surve | शहर में गंदगी का बोलबाला, स्वच्छता सर्वेक्षण में कैसे होगा नाम हमारा | Patrika News

शहर में गंदगी का बोलबाला, स्वच्छता सर्वेक्षण में कैसे होगा नाम हमारा

-जगह-जगह लगे गंदगी के ढेर आवारा जानवर मारते रहते हैं मुंह

धौलपुर. जिला मुख्यालय पर इन दिनों कचरा-गंदगी का साम्राज्य पसरा पड़ा है। पैदल चलना तो दूर वाहनो से निकलना भी दूभर होता जा रहा है। बीचोंबीच सडक़ों पर पड़े कचरे को भी नियमित रूप से नहीं उठाया जा रहा है। ऐसे में कई जगह तो स्थिति बद से बदतर हो रही है। जबकि जिला मुख्यालय पर आला प्रशासनिक अधिकारी निवास करते हैं।

धौलपुर

Published: February 21, 2022 05:55:39 pm

शहर में गंदगी का बोलबाला, स्वच्छता सर्वेक्षण में कैसे होगा नाम हमारा

-जगह-जगह लगे गंदगी के ढेर आवारा जानवर मारते रहते हैं मुंह

धौलपुर. जिला मुख्यालय पर इन दिनों कचरा-गंदगी का साम्राज्य पसरा पड़ा है। पैदल चलना तो दूर वाहनो से निकलना भी दूभर होता जा रहा है। बीचोंबीच सडक़ों पर पड़े कचरे को भी नियमित रूप से नहीं उठाया जा रहा है। ऐसे में कई जगह तो स्थिति बद से बदतर हो रही है। जबकि जिला मुख्यालय पर आला प्रशासनिक अधिकारी निवास करते हैं। इतना ही नहीं जहां पर कचरा पात्र रखे हुए हैं, उनको भी नियमित रूप से खाली नहीं करने के कारण उनमें कचरा बाहर आकर सडक़ों पर फैल जाता है। जिसे आवारा जानवर इधर-उधर खसीटते हुए दिखाई पड़ते हैं। इस कारण पूरी सडक़ पर कचरा ही कचरा पड़ा दिखाई देता है। स्थानीय लोगों का बदबू के बीच रहना मजबूरी बन गई है। जबकि नगरपरिषद का पहला काम ही शहर को स्वच्छ रखना है। इसके लिए केन्द्र सरकार की ओर से मार्च माह में स्वच्छता सर्वेक्षण के भी टीम आने की संभावना है। जिसमें उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्थाओं का अंक दिए जाएंगे। अगर यही हाल रहे तो सर्वेक्षण में भी पीछे ही हमारा नाम दिखाई देगा। 300 सफाई कर्मचारी, फिर भी व्यवस्था फैल नगरपरिषद के पास 200 स्थायी सफाई कर्मचारी हैं, तो वहीं 100 कर्मचारियों को ठेके पर अस्थायी तौर पर लगाया हुआ है। इसके बाद भी शहर की सफाई व्यवस्था रामभरोसे है। नगरपरिषद के अधिकारी मुख्य सडक़ों को साफ करा देते हैं, जिससे प्रशासनिक अधिकारियों के नजर में शहर में सफाई दिखाई दे, लेकिन कॉलोनियों में कचरा साफ नहीं होता है। वहीं नालियां तो कभी-कभार ही साफ होती हंै। ठेके के 100 कर्मचारियों के पेटे नगरपरिषद हर माह करीब 6 लाख रुपए खर्च करती है। लेकिन इसका फायदा भी आमजन को नहीं मिल पा रहा है। नालियां फुल, सडक़ों पर बहता पानीजिला मुख्यालय पर कई कॉलोनियों तथा मुख्य मार्गों पर नालियों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण पानी व कीचड़ से अटी नालियों से निकल कर पानी सडक़ पर फैल जाता है। ऐसे में राहगीरों को गंदे पानी के बीच से निकलना पड़ता है। तलैया रोड चौराहे पर कचरा प्वॉइंट पर कचरा उठाने के दौरान वह नालियों में भर जाता है। ऐसे में नालियों से पानी निकल कर सडक़ पर जमा रहता है, जिससे हाल ही बनाई गई सडक़ भी क्षतिग्रस्त हो गई है। इससे एक ओर से लोग परेशान होते हैं, वहीं दूसरी ओर से सडक़ खराब होने के कारण परिषद को भी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। कचरागाह बने खाली भूखण्ड शहर के मुख्य मार्गों तथा कॉलोनियों में खाली भूखण्ड आसपास के लोगों के लिए कचरागाह बन गए हंै। कई लोगों ने तो नालियों का निकास ही भूखण्डों में कर रखा है। ऐसे में पानी जमा होने के कारण वहां पर मच्छरों की तादात बढ़ जाती है। ऐसे में बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है। हर वार्ड में औसत 3 कार्मिक, कैसे हो सफाईनगरपरिषद की ओर से औसत तौर पर हर वार्ड में तीन सफाईकर्मचारियों को लगाया हुआ है। बड़े वार्ड होने के बाद भी केवल तीन सफाईकर्मचारियों के लगाने से पूरे वार्ड की सफाई नहीं हो सकती है। ऐसे में लोगों को गंदगी के बीच ही रहना पड़ता है। गंभीर बात तो यह है कि शहर के बाहरी इलाकों के वार्डों में तो साप्ताहिक रूप से सफाई कराई जाती है। ऐसे में लोग सफाईकर्मियों का इंतजार ही करते रहते हैं। यह है संसाधनों का गठित200- स्थायी सफाईकर्मी100- ठेका सफाईकर्मी14- ट्रिपर (घर-घर कचरा संग्रहण)8- कचरा-पात्र उठाने के वाहन3-सीवर सफाई वाहन शहर में नहीं उचित ड्रेनज सिस्टम जिला मुख्यालय पर ड्रेनेज सिस्टम भी सही प्रकार से नहीं है। नालों के पानी निकासी के लिए उचित माध्यम नहीं होने के कारण सडक़ों पर पानी फैलता रहता है। कई जगह तो नालों के मुंह ही बंद हैं। राणा मैरिज गार्डन के पास तो हर समय पानी भरा रहता है। बोर्ड बैठक में भी यही बना मुद्दागत दिनों हुई नगरपरिषद की बोर्ड बैठक में भी पार्षदों की ओर से प्रमुख तौर पर यही मु्द्दा उठाया गया। जिसमें पार्षद सफाईकर्मियों की संख्या बढ़ाने के साथ वार्डों में सफाई कराने की मांग करते दिखाई दिए। इनका कहना है जिला मुख्यालय पर 1.5 लाख की आबादी है। प्रति हजार व्यक्ति पर 4 कर्मचारी होने का नियम है। इस हिसाब से 600 कार्मिकों की जरूरत है, लेकिन मुख्यालय पर 300 सफाई कर्मी ही हंै। जिनसे सफाई व्यवस्था कराई जा रही है। ज्यादा गंदगी वाले इलाकों में अभियान चलाया जाता है। प्रकाश श्रीवास्वत, मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक, नगरपरिषद, धौलपुर।
Dirt dominates the city, how will our name be in the cleanliness survey
शहर में गंदगी का बोलबाला, स्वच्छता सर्वेक्षण में कैसे होगा नाम हमारा

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

Trending Stories

बुध जल्द वृषभ राशि में होंगे मार्गी, इन 4 राशियों के लिए बेहद शुभ समय, बनेगा हर कामज्योतिष: रूठे हुए भाग्य का फिर से पाना है साथ तो करें ये 3 आसन से कामजून का महीना किन 4 राशियों की चमकाएगा किस्मत और धन-धान्य के खोलेगा मार्ग, जानेंमान्यता- इस एक मंत्र के हर अक्षर में छुपा है ऐश्वर्य, समृद्धि और निरोगी काया प्राप्ति का राजराजस्थान में देर रात उत्पात मचा सकता है अंधड़, ओलावृष्टि की भी संभावनाVeer Mahan जिसनें WWE में मचा दिया है कोहराम, क्या बनेंगे भारत के तीसरे WWE चैंपियनफटाफट बनवा लीजिए घर, कम हो गए सरिया के दाम, जानिए बिल्डिंग मटेरियल के नए रेटशादी के 3 दिन बाद तक दूल्हा-दुल्हन नहीं जा सकते टॉयलेट! वजह जानकर हैरान हो जाएंगे आप

बड़ी खबरें

Asia Cup में भारत ने इंडोनेशिया को 16-0 से रौंदा, पाकिस्तान का सपना चूर-चूर करते हुए दिया डबल झटकामानसून ने अब तक नहीं दी दस्तक, हो सकती है देरखिलाड़ियों को भगाकर स्टेडियम में कुत्ता घुमाने वाले IAS अधिकारी का ट्रांसफर, पति लद्दाख तो पत्नी को भेजा अरुणाचलमहंगाई का असर! परिवहन मंत्रालय ने की थर्ड पार्टी बीमा दरों में बढ़ोतरी, नई दरें जारी'तमिल को भी हिंदी की तरह मिले समान अधिकार', CM स्टालिन की अपील के बाद PM मोदी ने दिया जवाबहिन्दी VS साऊथ की डिबेट पर कमल हासन ने रखी अपनी राय, कहा - 'हम अलग भाषा बोलते हैं लेकिन एक हैं'अजमेर शरीफ दरगाह में मंदिर होने के दावे के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा, पुलिस बल तैनातबोरवेल में गिरा 12 साल का बालक : माधाराम के देशी जुगाड़ से मिली सफलता, प्रशासन ने थपथपाई पीठ
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.