सरसों की फसल गलन से बचाने के लिए किसान अभी से कर सकते हैं उपाय

धौलपुर. जिले में इस बार किसानों की ओर सरसों बुवाई पर जोर दिया जा रहा है। लेकिन इस बार अधिक बारिश व बाढ़ के कारण मौसम तथा खेतों में नमी बनी हुई है। खेत और वातावरण में ज्यादा नमी होने से सरसों में तना गलन रोग लगने की आशंका बढ़ जाती है। इस रोग से सरसों उपज में 10 से 35 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है।

By: Naresh

Published: 11 Oct 2021, 07:09 PM IST

सरसों की फसल गलन से बचाने के लिए किसान अभी से कर सकते हैं उपाय

धौलपुर. जिले में इस बार किसानों की ओर सरसों बुवाई पर जोर दिया जा रहा है। लेकिन इस बार अधिक बारिश व बाढ़ के कारण मौसम तथा खेतों में नमी बनी हुई है। खेत और वातावरण में ज्यादा नमी होने से सरसों में तना गलन रोग लगने की आशंका बढ़ जाती है। इस रोग से सरसों उपज में 10 से 35 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है। कृषि महाविद्यालय बसेड़ी के डीन डॉ. उदयभान सिंह ने बताया कि 2.5 से 3 किग्रा ट्राइकोडर्मा 70-80 किग्रा. गोबर की खाद में भली भांति मिलाकर एक हेक्टर खेत में बुवाई पूर्व मिलाने से इस रोग का प्रभावी नियंत्रण हो जाता है। यदि किसान ऐसा नहीं कर पाते है तो 8-10 ग्राम ट्राइकोडर्मा प्रति कि.ग्रा सरसों बीज में मिलाकर बीजोपचार करके बुवाई कर सकते हैं। सरसों की खड़ी फसल में इस रोग की रोकथाम करना मंहगा और मुश्किल हो जाता है।

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