संक्रमण के खतरे से भयभीत मोहल्लेवासियों ने नहीं खुलने दी पीएचसी

बाड़ी. धौलपुर जिले में भले ही स्वास्थ्य विभाग लगातार कोरोना महामारी से जंग कर रहा हो, लेकिन इस दौरान अब कहीं ना कही लापरवाही भी सामने आ रही है। जिसको लेकर खुद चिकित्सा महकमे के कार्मिक अपनी जांच और अस्पताल को सेनेटाइज करने की बात कर रहे है और मामले को लेकर उपखण्ड के ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी और जिले के सीएमचओ को पत्र भी लिखा जा चुका है।

By: Naresh

Published: 17 Jun 2020, 11:31 AM IST

संक्रमण के खतरे से भयभीत मोहल्लेवासियों ने नहीं खुलने दी पीएचसी

मोहल्लेवासियों ने कायस्थ पाड़ा शहरी पीएचसी को कराया बंद
- स्टाफ मेलनर्स पॉजिटिव निकलने के बाद ना हुआ स्टाफ का सैम्लप और ना सेनेटाइज
संक्रमण के खतरे से भयभीत मोहल्लेवासियों ने नहीं खुलने दी पीएचसी

बाड़ी. धौलपुर जिले में भले ही स्वास्थ्य विभाग लगातार कोरोना महामारी से जंग कर रहा हो, लेकिन इस दौरान अब कहीं ना कही लापरवाही भी सामने आ रही है। जिसको लेकर खुद चिकित्सा महकमे के कार्मिक अपनी जांच और अस्पताल को सेनेटाइज करने की बात कर रहे है और मामले को लेकर उपखण्ड के ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी और जिले के सीएमचओ को पत्र भी लिखा जा चुका है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं है। ऐसे में लापरवाही से आक्रोशित मोहल्ले के लोगों ने जहां मंगलवार को पीएचसी को नहीं खुलने दिया, वहीं स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही पर आक्रोश व्यक्त किया है। स्थानीय प्रशासन को भी मामले से अवगत कराया है।
जिले में लगातार फैल रहे कोरोना के बीच केवल बाड़ी शहर में सात दिन में 19 मामले सामने आए है। जिनमें दो महिलाओं सहित बाड़ी सामान्य चिकित्सालय के पांच चिकित्साकर्मी कोरोना पॉजिटिव आ चुके हैं। जिसके कारण ही इतिहास में पहली बार बाड़ी का सामान्य चिकित्सालय सेनेटाइज और साफ सफाई के लिए तीन दिन के लिए बंद किया गया है। दूसरी और शहर के कायस्थ पाड़ा मोहल्ले में एक शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित है। जिसमें तैनात एक मेलनर्स तीन दिन पूर्व कोरोना पॉजिटिव मिला है। जिसके चलते पीएचसी के सभी कार्मिक भयभीत है। उन्होंने पीएचसी की साफ सफाई और सेनेटाइज कराए जाने के लिए विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन स्वास्थ विभाग की तरफ से अब तक ना तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सैनिटाइज किया गया और ना ही स्टाफ की सैंपलिंग की जरूरत समझी। इस स्वास्थ्य केंद्र पर प्रतिदिन 50 से 60 मरीज की ओपीडी बतायी गई है। यह घनी आबादी के बीच स्थित है।
मंगलवार को पीएचसी के सेनेटाइज नहीं होने और स्टाफ की सैंपलिंग ना होने पर मोहल्ले के नागरिकों का धैर्य जवाब दे गया। उन्होंने अस्पताल को खोलने आए कर्मचारियों को भगा दिया और पीएचसी को खोलने नहीं खोलने दिया। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है की जब तक पीएचसी का पूरा भवन और आसपास का क्षेत्र सही तरीके से सेनिटाइज नहीं होता है। अस्पताल के चिकित्सक सहित पूरे स्टाफ की सैंपलिंग रिपोर्ट कराने और नेगेटिव नहीं आती है, तब तक पीएचसी को नहीं खुलने दिया जाएगा।
गौरतलब है कि यह पीएचसी पिछले 3 सालों से पीपीपी मोड पर कायस्थ पाड़ा के सरकारी स्कूल की खाली बिल्डिंग में संचालित हो रही है। जिसमें कई नर्सिंगकर्मी, सहायक कर्मचारी के साथ एक चिकित्सक भी तैनात है। ऐसे में पीएचसी स्टाफ में से जब कोरोना पॉजिटिव निकला है तो पूरे स्टाफ की सैंपलिंग उसी दिन होनी चाहिए थी, लेकिन ना तो सैम्पलिंग हुई और ना ही उस अस्पताल को सेनिटाइज किया गया। ऐसे में लगातार चल रहे अस्पताल में कितने मरीज दिखाने आए और कितने संक्रमित होकर गए, पता नहीं है। जब कोरोना से लड़ रहे स्वास्थ्य विभाग के योद्धाओं के साथ यह खिलवाड़ हो रहा है तो आम जनता के साथ कैसा व्यवहार होगा।

स्टाफ ने कराया अवगत, लेकिन नहीं हुई सुनवाई
अस्पताल के स्टाफ द्वारा शनिवार को मेलनर्स के कोरोना पॉजिटिव आने पर खंड चिकित्सा अधिकारी व मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र लिखकर अवगत कराया जा चुका है। पीएचसी ना तो सेनिटाइज हुई और ना स्टाफ की सेंपलिंग हुई। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने कोई ध्यान नहीं दिया है।

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