ठंड में ठंडे पानी का 'टॉर्चर'

सर्दी के मौसम में जहां नहाने के नाम से ही कंपकंपी छूट जाती है, वहीं सरकार की ओर से लाखों रुपए खर्च कर संचालित किए जा रहे छात्रावासों में विद्यार्थियों

By: शंकर शर्मा

Published: 23 Dec 2015, 11:55 PM IST

धौलपुर. सर्दी के मौसम में जहां नहाने के नाम से ही कंपकंपी छूट जाती है, वहीं सरकार की ओर से लाखों रुपए खर्च कर संचालित किए जा रहे छात्रावासों में विद्यार्थियों को नहाने के लिए गर्म पानी तो दूर ठंडे पानी के लिए भी तरसना पड़ रहा हैं। छात्रावासों के हालातों के जमीनी हालत जानने के लिए 'पत्रिका' ने मंगलवार को जिले में संचालित पांच छात्रावासों का मौके पर जाकर जायजा लिया। पेश है मनोज कासलीवाल व देवेन्द्र पाल सिंह की रिपोर्ट:

एक रजाई में दो छात्राएं
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, प्रेरणा नगर धौलपुर
सर्व शिक्षा अभियान के तहत कक्षा 6 से 8 तक की छात्राओं के लिए चलाए जा रहे इस आवासीय विद्यालय में मंगलवार को पत्रिका टीम यहां पहुंची तो यहां छात्राएं दैनिक दिनचर्या से निवृत्त होकर पढ़ाई में मशगूल नजर आई। कक्षा छह की विद्यार्थी छात्रा खुशबू, वंदना, शशी ने बताया कि यहां टैंकर से पानी आता है। इसी से नहाने और पीने के पानी के लिए इस्तेमाल किया जाता है। बातचीत में कुछ छात्राओं ने बताया कि ठंडे पानी के कारण कुछ छात्राओं ने तो नियमित नहाने से ही बचना शुरू कर दिया है। सातवीं की छात्रा सीमा दो दिन से बिना नहाए ही काम चला रही है। यहां एक रजाई में दो छात्राएं सोती है।

यहां तैनात वार्डन का कहना था कि विद्यालय पथरीली जमीन पर बनाया गया है। ऐसे में यहां भू-जल के लिए कोई व्यवस्था नहीं हो पाती। ऐसे मेें टैंकरों से ही पानी मंगाना पड़ता हैं। गर्म पानी के लिए आवश्यकतानुसार गर्म पानी करके छात्राओं को उपलब्ध कराया जाता है। 

'79' नहीं लिख पाई 8वीं की छात्रा
विद्यालय की छात्राओं की शैक्षणिक पड़ताल में सामने आया कि कक्षा आठवीं की छात्रा करीना व करिश्मा '79' नहीं लिख सकी, जबकि रीना 'कबड्डी' व सविता 'कलक्टर'नहीं लिख पाई। वहीं कक्षा आठ की केवल एक छात्रा जिला कलक्टर शुचि त्यागी का नाम शुद्ध लिख सकी।

टैंकर के भरोसे पानी की व्यवस्था
शारदे बालिका छात्रावास, प्रेरणा नगर, धौलपुर
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद के तहत शहर में कक्षा 9 से 12वीं तक की छात्राओं के लिए चलाए जा रहे छात्रावास में भी पानी की समस्या मुख्य रूप से मिली। यह भवन भी प्रेरणा नगर की पथरीली भूमि पर ही निर्मित है। ऐसे में यहां पानी की समस्या है। छात्रावास पेयजल के लिए टैंकर का ही सहारा है। इसी से पेयजल और दिनचर्या का काम चलता है। यहां गर्म पानी के लिए कोई संसाधन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में छात्राएं टैंकर के पानी से ही स्नान करती हैं। नवनिर्मित इस छात्रावास में आवास व्यवस्था बेहतर मिली। वार्डन प्रदीप चौधरी का कहना था कि गीजर व जलदाय विभाग की पेयजल लाइन के लिए अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, जिस पर कार्य चल रहा है।   

गर्म पानी की नहीं व्यवस्था
स्थान: कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, हांसई (बाड़ी)
जिले के बाड़ी कस्बे से करीब सात किलोमीटर की दूरी पर बसे छोटे से गांव हांसई में सर्व शिक्षा अभियान के तहत इस आवासीय विद्यालय का संचालन किया जा रहा हैं। नवनिर्मित भवन में पानी से लेकर अन्य सुविधाएं संतोषजनक थी। यहां पानी के लिए सबमर्सिबल लगा है, जिससे निकलने वाले ताजा पानी से ही छात्राएं नहाती हैं। गर्म पानी के लिए यहां कोई व्यवस्था नहीं हैं। यहां की आवास व्यवस्था बेहतर मिली, हालांकि छात्राओं का शैक्षणिक स्तर ज्यादा प्रभावी
नहीं मिला।

जाड़े में कंबल का सहारा
राजकीय अम्बेडकर छात्रावास, तालाबशाही (बाड़ी)
बाड़ी-धौलपुर मार्ग स्थित तालाबशाही के समीप बने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के छात्रावास में जब पत्रिका टीम पहुंंची तो यहां रहने वाले विद्यार्थी शीतकालीन अवकाश पर जा चुके थे। वहां मौजूद कर्मचारी ने बताया कि यहां दो हैंडपम्प काफी समय से खराब पड़े हैं। यहां पानी के लिए डाली गई जलदाय विभाग की पेयजल लाइन को एनएचएआई के माध्यम से हो रहे सड़क निर्माण के कार्य के दौरान तोड़ा जा चुका है, जिसे दुरुस्त कराने का कार्य जलदाय विभाग व एनएचएआई के बीच फंसा हुआ हैं। ऐसे में यहां टैंकरों के माध्यम से पानी मंगाना पड़ता हैं। यहां भी ठंड के मौसम में बच्चों को ठंडे पानी से ही नहाना पड़ता है।

रोशनदान खुले, गद्दे भी काफी पुराने
यहां छात्रों को सर्दी से बचने के लिए केवल कंबलों का सहारा है। कंबल भी काफी पुराने है। रोशनदान खुले हैं, जिनसे ठंडी हवा चीरती हुए अंदर आती हैं। गद्दे भी काफी पुराने हैं। छात्रावास में सफाई व्यवस्था बेहतर नहीं पाई गई।

नहाने जाते हैं कुएं पर
राजकीय देवनारायण ओबीसी छात्रावास, गुर्जर खानपुर (बाड़ी)
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के  तहत संचालित यह छात्रावास वर्ष 2011 में  शुरू हुआ हैं। यहां सुविधाएं तो बेहतर मिली, लेकिन पानी की समस्या के चलते यहां के छात्र खतरा मोल ले रहे हैं। पर्याप्त स्टाफ के अभाव में इन्हें रोकने-टोकने वाला भी कोई नहीं है। केवल चौकीदार के भरोसे यह छात्रावास संचालित है। तालाबशाही स्थित छात्रावास व गुर्जर खानपुर के छात्रावास का जिम्मा एक ही छात्रावास अधीक्षक के ऊपर है, जो दोनों की व्यवस्थाएं संभालते हैं। लाखों रुपए की लागत से बने इस भवन में पानी की सुविधा के लिए बोरिंग किया गया था, लेकिन पथरीली भूमि के कारण यह बोरिंग कुछ दिन में हांफ गया। अब यहां भी पानी के लिए टैंकर का ही सहारा है।

यहां रह रहे कक्षा छह के छात्र सत्यवीर, कृष्ण कुमार व दसवीं कक्षा के छात्र बेताल सिंह ने बताया कि उन्हें नहाने के लिए छात्रावास से कुछ दूरी पर स्थित कुओं पर जाना पड़ता है। छात्रावास के सामने से ही बाड़ी धौलपुर मार्ग पर दिनभर वाहनों की रेलमपेल रहती है। ऐसे में छात्र बिना अनुमति के ही छात्रावास से निकलकर कुएं पर नहाने जाते हैं। छात्रों का कहना था कि टैंकर के पानी को छात्रावास के जिस टैंक में स्टोर किया जाता है, उसकी सफाई को अरसा बीत गया। ऐसे में उसके पानी में कीड़े पड़ जाते हैं। छात्रावास के लिए सोलर हीटर है, लेकिन वह कनेक्शन के अभाव में छत पर पड़ा खराब हो रहा हैं। 50 छात्रों की क्षमता वाले इस छात्रावास में 48 छात्र रहते हैं।

इनका कहना है...
प्रेरणा नगर के छात्रावास में पानी के स्थाई समाधान के लिए जलदाय विभाग को लिखा जा चुका है। गर्म पानी के लिए गीजर उपलब्ध कराने के लिए हमारे पास अलग से कोई बजट नहीं है। इसके लिए राजस्थान प्रारंभिक शिक्षा परिषद को लिखा जाएगा। प्रेमसिंह कुंतल, एडीपीसी, एसएसए धौलपुर

छात्रावासों में छात्रों के लिए केवल कंबल उपलब्ध कराने का ही प्रावधान है। छात्र आवश्यकतानुसार दो या तीन कंबलों की मांग कर सकते है। पर्याप्त कंबल उपलब्ध हैं। बाड़ी के देवनारायण ओबीसी छात्रावास में अनुपयोगी पड़े सोलर गीजर को छुट्टियों में ही दुरुस्त करा दिया जाएगा। नहाने के लिए जहां बोरिंग चालू हालात में है, वहां छात्रों के लिए ताजा पानी उपलब्ध कराया जाता है।मनोजकुमार आर्य, समाज कल्याण अधिकारी, धौलपुर
शंकर शर्मा
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