भगवान भरोसे भविष्य

शहरी क्षेत्र के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय भमरौली के छात्र-छात्राओं का भविष्य भगवान भरोसे है। इस स्कूल की आठ कक्षाओं को पढ़ाने की जिम्मेदारी

By: कमल राजपूत

Published: 04 Dec 2015, 11:21 PM IST

धौलपुर। शहरी क्षेत्र के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय भमरौली के छात्र-छात्राओं का भविष्य भगवान भरोसे है। इस स्कूल की आठ कक्षाओं को पढ़ाने की जिम्मेदारी एकमात्र शारीरिक शिक्षक पर है, जिसे संबंधित विषयों को पढ़ाने का प्रशिक्षण ही नहीं मिला है। यह शारीरिक शिक्षक पिछले पांच वर्ष से शिक्षण व्यवस्था को संभाल रहा है। नतीजन, पहले जहां इस विद्यालय का नामांकन 250 से 300 के बीच था, वह आज 129 पर आ टिका है।

शहर से 12 किलोमीटर दूर इस स्कूल में शिक्षक नहीं लगाने के चलते यहां से छात्र-छात्राएं विमुख होकर अन्य सरकारी या निजी विद्यालयों का रुख कर रहे हैं। राज्य सरकार एवं शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने एवं स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के दावों की पोल यह विद्यालय खोलता नजर आ रहा है। वर्ष 2010 से एक मात्र शारीरिक शिक्षक सत्यप्रकाश शर्मा यहां तैनात हैं। पिछले शैक्षिक सत्र में एक-दो शिक्षक यहां शैक्षिक व्यवस्था के तहत लगाए गए, लेकिन उनको बाद में हटा लिया गया। इससे विद्यालय में विद्यार्थियों की पढ़ाई चौपट हो रही है, लेकिन विभाग यहां व्यवस्थाएं सुधारने के मूड में नहीं दिख रहा।

शहरी स्कूल होना बना अभिशाप
शिक्षा विभाग की अदूरदर्शी नीतियों का खमियाजा भमरौली गांव के बालकों को भुगतना पड़ रहा है। शिक्षा विभाग ने इस विद्यालय को शहरी विद्यालयों की श्रेणी में शुमार कर लिया है। यह ग्राम पंचायत भैंसेना एवं पंचायत समिति राजाखेड़ा में आता है। यह विद्यालय शहरी क्षेत्र में ब्लॉक शिक्षा अधिकारी धौलपुर के अधीन आता है। बेमेल परिसीमन यहां अव्यवस्थाओं का कारण बना हुआ है। जिला परिषद की ओर से समय-समय पर की गई भर्तियों में यहां शिक्षक शहरी स्कूल होने के कारण नहीं लगाए गए, जबकि विद्यालय डांग व चम्बल के बीहड़ों में होने के कारण कोई शिक्षक यहां स्वेच्छा से जाना नहीं चाहता है।

भत्ता हो गया खत्म
पूर्व में शहरी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को विशेष भत्ता मिलता था, जिससे यहां पर्याप्त स्टाफ रहता था, लेकिन छठे वेतन आयोग में भत्ता खत्म होने से शिक्षकों का यहां से मोह भंग होता गया। वर्ष 2010 से पूरा स्कूल एक मात्र शारीरिक शिक्षक के हवाले रह गया है। यहां शारीरिक शिक्षक को ही संस्था प्रधान से लेकर सहायक कर्मचारी तक का काम करना पड़ रहा है।

बाहर बैठने की मजबूरी
शिक्षकों के अभाव में विद्यार्थियों की पढ़ाई तो चौपट हो ही रही है। खास बात है कि विद्यालय भवन की स्थिति ठीक नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को बाहर बैठना पड़ता है। इस संबंध में भी विभाग को अवगत कराया गया है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

इनका कहना है
 विद्यालय में एक मात्र शिक्षक के रूप में कार्यरत हूं। विद्यालय की आठ कक्षाओं में 129 विद्यार्थी हैं। विद्यालय में सहायक कर्मचारी तक नहीं है। इसको लेकर सभी को अवगत कराया है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसका असर नामांकन पर भी पड़ रहा है। सत्यप्रकाश शर्मा, शारीरिक शिक्षक (प्रधानाध्यापक), राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, भमरौली

स्कूल की बिल्डिंग खराब थी, जिसका जीर्णोद्धार कराने के निर्देश दिए हैं। अध्यापकों की व्यवस्था के लिए ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से बात करूंगा। गणेश धाकरे, जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) धौलपुर
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