'यहां आके पतो लगी संगठन की ताकत'

'संगठन मे कित्ती शक्ति है या को हमकूं यहां आके पतो पड़ो, यहां सब अधिकारी आके हमारी बात सुनरे हैं। जब हम जाते तो कोउ नाए सुनते

By: शंकर शर्मा

Published: 22 Dec 2015, 11:56 PM IST

धौलपुर. 'संगठन मे कित्ती शक्ति है या को हमकूं यहां आके पतो पड़ो, यहां सब अधिकारी आके हमारी बात सुनरे हैं। जब हम जाते तो कोउ नाए सुनते।

यह बात शहर के शास्त्री कॉम्प्लेक्स में चल रहे एकल नारी शक्ति संगठन के तीन दिवसीय सदस्य सम्मेलन के दूसरे दिन बाड़ी से आई ग्रामीण महिला प्रेमवती ने अपने ठेठ अंदाज में जाहिर की। सम्मेलन में  जिले के तीन ब्लॉक बाड़ी, बसेड़ी व धौलपुर की 97 एकल महिलाओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम में संगठन की समन्वयक चन्द्रकला शर्मा ने 'संगठन क्या है और इसके महत्वÓ विषय पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जब तक हम एकजुट होकर अपनी समस्याओं व अधिकारों के लिए नहीं लड़ेंगे, तब  तक हमें सम्मान व गुणवत्तापूर्ण जीवन नहीं मिलेगा। हमारे संगठन ने 450 महिलाओं से शुरुआत की और आज 50 हजार महिला सदस्य इस संगठन से जुड़ी हैं।

संगठन के नेतृत्व में कई महिलाओं को हिंसा मुक्त करवाया, उनको उनका जमीन, सम्पत्ति का अधिकार दिलवाया, सरकार से पैरवी कर एकल महिला हितैषी योजनाएं लागू करवाईं। यह अकेले का काम नहीं था, सब सफलताएं संगठन की शक्ति से मिली। इस मौके पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग से सहायक उपनिदेशक मनोज कुमार आर्य ने संभागियों को विधवा, परित्यकता, विकलांग, वृद्धा पेंशन, पालनहार , विधवा पुनर्विवाह, विधवा महिला पुत्री विवाह योजना के बारे में जानकारी दी।

राजस्थान आजीविका कौशल विकास निगम के जिला प्रबन्धक मनीष शर्मा ने आजीविका प्रशिक्षण के बारे में जानकारी दी। वहीं संगठन की संगठक रीना शर्मा ने राजनीतिक व प्रशासनिक ढांचे के बारे मे संभागियों को जानकारी दी। मंशा देवी ने संगठन की 16 साल की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक व सरकार की एकल महिलाओं को लेकर नीति में आए बदलाव, उपलब्धियों व सफलताओं के बारें मे संभागियों को बताया।

आज निकालेंगे रैली
सम्मेलन के अन्तिम दिन बुधवार को शास्त्री कॉम्प्लेक्स से 12 बजे गुलाब बाग जिला कलक्ट्रेट तक संभागियों की ओर से रैली निकाली जाएगी। साथ ही सम्मेलन के दौरान निकल कर आई एकल
महिलाओं की समस्याओं को लेकर ज्ञापन दिया जाएगा।

केस -1      
बसेड़ी तहसील के गांव अंताकापुरा निवासी रामवती कोली के  दो बेटे थे। बेटा-बहू की मृत्यु हो गई और उनके तीन बच्चे हैं। छोटे बेटे की भी मृत्यु हो गई। उसकी विधवा पत्नी व दो बच्चे हैं। सभी को बुजुर्ग रामवती पाल रही है। घर में कोई कमाने वाला नहीं है। पालनहार फॉर्म भरा, कुछ नहीं हुआ, बहू की पेंंशन का फॉर्म भरा, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। एक बेटी है जो 16 साल की उम्र में मजदूरी करके सबका पेट पाल रही है।

 केस - 2
बाड़ी तहसील के गांव कोरीपुरा निवासी जयकुमारी की पीड़ा भी कुछ ऐसी ही हैं। उसके तीन बच्चे हैं। बड़ी मुश्किल से संघर्ष कर वो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बनी। चार माह आंगनबाड़ी में कार्य किया, लेकिन गांव के दबंगों ने उसे हटवा दिया। मामले की शिकायत महिला बाल विकास विभाग में की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो सकी।
शंकर शर्मा
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