जानवरों की जान का दुश्मन बन रहा 'लेपा'

सरमथुरा. उपखण्ड क्षेत्र के गैंगसा मशीनों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ 'लेपा जानवरों के लिए जान का दुश्मन बन गया है। आए दिन कोई ना कोई जानवर लेपा में फिसलकर अपनी जान गंवा रहा है। इसके चलते ही जगह-जगह पड़े होने से बने दलदल में रात को चार नीलगाय फंस गई। जिन्हें 2 घंटे की मशक्कत के बाद वन विभाग के कर्मचारियों ने ग्रामीणों की मदद से निकाला।

By: Naresh

Published: 03 Apr 2021, 11:52 AM IST

जानवरों की जान का दुश्मन बन रहा 'लेपा'
लेपा में फंसी 4 नीलगाय, ग्रामीणों की मदद से वन विभाग ने किया रेस्क्यू

सरमथुरा. उपखण्ड क्षेत्र के गैंगसा मशीनों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ 'लेपा जानवरों के लिए जान का दुश्मन बन गया है। आए दिन कोई ना कोई जानवर लेपा में फिसलकर अपनी जान गंवा रहा है। इसके चलते ही जगह-जगह पड़े होने से बने दलदल में रात को चार नीलगाय फंस गई। जिन्हें 2 घंटे की मशक्कत के बाद वन विभाग के कर्मचारियों ने ग्रामीणों की मदद से निकाला।
जानकारी के अनुसार बीती रात्रि को स्थानीय राधा-कृष्ण गौशाला झिरी रोड पर लेपा से बने दलदल में चार नीलगाय फंस गई। जिनमें दो छोटे थे। निकलने की कोशिश में वह पूरी तरह दलदल में फंसते चले गए। सुबह जब ग्रामीणों को पता लगा तो उन्होंने तुरंत उप वन संरक्षक केसी मीणा को सूचना दी। इस पर उन्होंने स्थानीय वन विभाग के कर्मचारियों को तुरंत रेस्क्यू करने के निर्देश दिए। इस पर स्थानीय वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों को अपने साथ लेकर 2 घंटे की मशक्कत के बाद उन्हें बमुश्किल दलदल से बाहर निकाला। जिससे उनकी जान बच सकी।
कभी भी हो सकता है हादसा
गौरतलब है कि झिरी रोड पर पत्थर की खदानों में यह लेपा डाला जा रहा है। 10 से 30 फीट गहरी खदानों में आए दिन जंगली जानवर व पशुपालकों के पशु फंसते हैं। ऊपर सतह पर कठोर दिखने वाला यह दलदल नीचे से नरम होता है। जिससे पशुओं के लिए यह काल बनता जा रहा है। साथ ही इसी रास्ते से ग्रामीणों का आवागमन भी है। ग्रामीण बच्चे भी पैदल सरमथुरा की तरफ आते जाते है। जिससे कभी भी कोई भी बड़ा हादसा होने का अंदेशा बना रहता है।
नहीं काम आई कलक्टर की चेतावनी
बीते सप्ताह जिला कलक्टर की जनसुनवाई के दौरान व्यापारियों एवं कलक्टर के मध्य हुई इस विषय पर बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला। हालांकि जिला कलक्टर ने व्यापारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि वह कोई इसका समाधान निकालें और इस अपशिष्ट पदार्थ को अच्छी सुरक्षित जगह पर भिजवाने की व्यवस्था करें, नहीं तो कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। लेकिन एक सप्ताह गुजरने के बाद भी वही पुराना ढर्रा अपनाया जा रहा है।
उपजाऊ भूमि हो रही खराब
कस्बे के आसपास कृषि भूमि भी इस लेपा की वजह से बंजर होती जा रही है। बरसात के दिनों में यह लेपा पानी में घुलकर खेतों में पहुंचता है और फिर खेतों की उर्वरा शक्ति खत्म कर रहा है।

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