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धौलपुर

एमबीबीएस छात्र अब ग्रामीण क्षेत्र की सेहत का रखेंगे ख्याल

– मेडिकल छात्र तीन-तीन परिवार को लेगा गोद

– प्रथम चरण में 100 छात्र गांव में गोद लिए परिवार की करेंगे देखभाल

– शहर से सटे गांव पचगांव का चयन, किया भ्रमण

धौलपुरJun 30, 2024 / 07:23 pm

Naresh

एमबीबीएस छात्र अब ग्रामीण क्षेत्र की सेहत का रखेंगे ख्याल MBBS students will now take care of the health of rural areas
– मेडिकल छात्र तीन-तीन परिवार को लेगा गोद

– प्रथम चरण में 100 छात्र गांव में गोद लिए परिवार की करेंगे देखभाल

– शहर से सटे गांव पचगांव का चयन, किया भ्रमण

धौलपुर. ग्रामीण क्षेत्रों से चिकित्सकों की बढ़ती दूरी को लेकर अब नई पहल शुरू की जा रही है। जिससे ग्रामीण क्षेत्र में भी बेहतर इलाज की सुविधाएं मिल सकें। ग्रामीण क्षेत्रों से चिकित्सकों को जोडऩे के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने नया प्रस्ताव रखा है। जिसमें मेडिकल कॉलेज में पढऩे वाले छात्रों को गांव के परिवार से जोड़ेगा। जो इनके रहन-सहन से लेकर इनकी सेहत का ध्यान रखेंगे। जिले के राजकीय मेडिकल कॉलेज में प्रत्येक एमबीबीएस छात्र गांव के तीन-तीन परिवार को गोद लेकर इनकी परिवार की तरह देखभाल करेगा।
मेडिकल कॉलेज में 2023 के 100 एमबीबीएस छात्रों को अब धौलपुर ब्लॉक के गांव पचगांव में निवास करने वाले ग्रामीण परिवार के सदस्यों की देखरेख करेंगे। मेडिकल का प्रत्येक छात्र तीन-तीन परिवार को गोद लेगा। जो तीन साल के कोर्स के दौरान हर माह गांव में गोद लिए परिवार के सदस्य से मिलेगा। जो प्री फाइनल तक इनकी जिम्मेदारी उठाएंगे। छात्र उस गांव व परिवार का व्यवहार, बीमारियों, रहन-सहन एवं व्यवहार से जुड़े मुद्दों का अध्ययन कर आंकड़े एकत्र करेंगे। चार साल के बाद वह इन आंकड़ों के आधार पर एक रिपोर्ट भी पेश करेंगे। जो एनएमसी को भेजी जाएगी। एनएमसी के निर्देश पर मेडिकल कॉलेज की टीम ने पचगांव में जाकर यहां के व्यवहार को समझा और आमजन से मिले। माना जा रहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए यह नई व्यवस्था की है। जिससे मेडिकल छात्र ग्रामीण एरिया से वाकिफ हो सकेंगे।
पचगांव का कॉलेज टीम ने लिया जायजा

मेडिकल कॉलेज की टीम ने ब्लॉक के गांव पचगांव का निरीक्षण किया। कॉलेज के डॉक्टरों ने बताया कि विद्यार्थियों को गोद लेने के बाद समुदाय को लेकर दायित्व भी समझा। छात्र यहां पर तैनात आशा सहयोगिनी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का भी सहयोग लेंगे। इस गांव के 300 परिवारों की सेहत की निगरानी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस करने वाला छात्र करेगा। जुलाई माह के दूसरे सप्ताह से गांव में प्रत्येक छात्र को तीन परिवार को गोद लेने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
पांच साल बाद सौंपनी होगी रिपोर्ट

आयोग की ओर से बताया कि पारिवारिक एडिनोमेटस पॉलीपोसिस (एफएपी) कार्यक्रम की प्राथमिक जिम्मेदारी मेडिकल कॉलेजों की है। पांच वर्ष तक कॉलेज प्रबंधन इस पर काम करेगा और अंतिम वर्ष तक पहुंचने के बाद छात्रों को गोद लिए परिवारों की पांच साल की स्थिति को लेकर एक रिपोर्ट भी सौंपनी होगी। इसकी पहली समीक्षा 2027 को होगी।
एक छात्र को तीन परिवारों को गोद लेने की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके लिए 100 छात्र तीन सौ परिवारों में गर्भवती महिला, बच्चों, नौजवानों की स्वास्थ्य पर नजर रखेंगे। तीन साल तक बराबर निगरानी करेंगे। छात्र-छात्राएं लगातार गांव का गोद लिया परिवारों को स्वास्थ्य के प्रति जागरुक करेंगी।
– डॉ. दीपक कुमार दुबे, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज धौलपुर

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