निगरानी पर नहीं 'नजर'

जिले में टीकाकरण कार्यक्रम की सफलता को लेकर संदेह हैं। इसकी बजह यह है कि जिले में यह कार्यक्रम जिन अधिकारियों की मॉनिटरिंग के भरोसे टिका है वो ही नियमों  को धता बताकर इसमें रुचि नहीं दिखा रहे हैं

By: शंकर शर्मा

Published: 15 Apr 2016, 11:53 PM IST

धौलपुर. जिले में टीकाकरण कार्यक्रम की सफलता को लेकर संदेह हैं। इसकी बजह यह है कि जिले में यह कार्यक्रम जिन अधिकारियों की मॉनिटरिंग के भरोसे टिका है वो ही नियमों  को धता बताकर इसमें रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इस स्थिति के चलते टीकाकरण को लेकर सरकार भले ही करोड़ों रुपए खर्च कर रही हो लेकिन जिले में यह कार्यक्रम अपने उद्देश्य से भटक रहा है।

नियमित टीकाकरण कार्यक्रम की मॉनिटरिंग का जिम्मा एमओईसी, बीसीएमओ व एलएचवी पर होता है। लेकिन इस जिम्मेदारी को निभाने में वे कन्नी काट रहे हैं।

यही वजह है कि टीकाकरण जैसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रम पर सवालियां निशान लग रहे हैं। बिना मॉनिटरिंग के फील्ड में टीकाकरण के लिए जाने वाली एएनएम भी इसका फायदा उठाती है और अपनी मनमर्जी से टीकाकरण करती है। इस दौरान न तो टीकाकरण दिवस में निर्धारित समय-सीमा का ध्यान रखा जाता है और न ही विभागीय गाइडलाइन का।

बढ़ जाती है आशंका
नियमित टीकाकरण कार्यक्रम और मिशन इन्द्रधनुष  में टीकाकरण से वंचित रहे बच्चों का इंफेक्शन अन्य बच्चों के लिए खतरा बन सकता है। ऐसे में पूरे कार्यक्रम को लेकर की जा रही मशक्कत बेकार जा सकती है।

टीम की भी मिली खामी
मॉनिटरिंग की खामी अभियान के निरीक्षण के लिए भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय से आई डॉ. मनोरमा बख्शी को भी मिली। उन्हे धौलपुर अरबन, बाड़ी व राजाखेड़ा में निरीक्षण के दौरान जो सबसे बड़ी खामी मिली वह टीकाकरण कार्यक्रम का जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से मॉनिटरिंग न करना था।  जिसका फायदा फील्ड में जाने वाली एएनएम उठाती है। वो अपनी मनमर्जी से फील्ड में जाती-आती हैं।

शहर में सामने आई थी लापरवाही
मिशन इन्द्रधनुष के दूसरे दिन 8 व 9 अप्रेल को  अधिकारियों की नाक के नीचे शहर के छह इलाकों में टीकाकरण के लिए लगाए गए विभाग के कार्मिक इन स्थानों पर टीकाकरण के लिए पहुंचे ही नहीं थे। इसका खुलासा पत्रिका ने किया था। इसके बाद अधिकारियों ने तीन कार्मिकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा।

ये है वंचितों का आंकड़ा
जिले में नियमित टीकाकरण से छूटे बच्चों में बाड़ी ब्लॉक में 2080, बसेड़ी में 1750, धौलपुर में 2129 व राजाखेड़ा में 4101 बच्चे शामिल है।
शंकर शर्मा
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