न धूप की चिंता, न सुरक्षा का डर, बिना किसी मानदेय पुलिस के साथ मिला रहे कंधा

राजाखेड़ा. उत्तरप्रदेश की सीमाएं हों या आवागमन पर लगाम लगानी हो या बाजार में उमड़ रही भीड़ पर लगाम लगानी हो। या फिर सोशिल डिस्टेंसिंग की करानी हो पालना। प्रशासन और पुलिस को हर जगह हाजिर रहकर पूरी जिम्मेदारी से अपने कार्य को अंजाम दे रहे है ये युवा पुलिस मित्र।

By: Naresh

Published: 10 May 2020, 04:57 PM IST

न धूप की चिंता, न सुरक्षा का डर

बिना किसी मानदेय पुलिस के साथ मिला रहे कंधा

लॉकडाउन में पुलिस के मजबूत हाथ बने पुलिस मित्र

राजाखेड़ा. उत्तरप्रदेश की सीमाएं हों या आवागमन पर लगाम लगानी हो या बाजार में उमड़ रही भीड़ पर लगाम लगानी हो। या फिर सोशिल डिस्टेंसिंग की करानी हो पालना। प्रशासन और पुलिस को हर जगह हाजिर रहकर पूरी जिम्मेदारी से अपने कार्य को अंजाम दे रहे है ये युवा पुलिस मित्र।

कुछ समय पहले पुलिस अधीक्षक मृदुल कछावा ने युवाओं में पुलिस से जुड़ाव को बढ़ाकर उन्हें पुलिसिंग की चुनौतियों के बारे में जानकार बना कर एक जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिए पुलिस मित्र योजना आरम्भ की थी। जिसमे प्रत्येक थाना स्तर पर अधिकतम 40 पुलिस मित्रों का चयन कर तैनात किया जाना था। ये पद अवैतनिक, बिना किसी मानदेय था। जिसमे पुलिस की मदद के लिए वॉलंटियर्स तैयार किए जाने थे। इसी योजनांतर्गत राजाखेड़ा में भी 30 पुलिस मित्रो का चयन किया गया। अब ये चयनित युवा बखूबी अपने कर्तव्यों को बिना किसी साधन, सुविधा के ही पूरा कर रहे हैं।

सेवा के दायरे में बड़ी भूमिका का निर्वहन

कोरोना महामारी के दौरान पुलिस के समक्ष एक बड़ी चुनौती आ गयी उत्तरप्रदेश की सीमाओं को सील करना। जो एक दर्जन जगहों पर वहां ाके नागरिकों को राजखेड़ा में प्रवेश करा रही थी। पुलिसकर्मियों की कमी के चलते इससे क्षेत्र के लिए खतरा बढ़ता जा रहा था। ऐसे में विदार, क्षीतापुरा, मंसुख पुरा, गनहेदी, कान्तरपुरा, धनोला सीमाओं पर पुलिस के साथ साथ इन युवा पुलिस मित्रों को तैनात किया गया। जिससे आवागमन को प्रभावी ढंग से रोक दिया गया।

ओर भी है इनकी सेवाए


सीमाओं के अलावा लॉकडाउन की पालना, सोशिल डिस्टेंसिनग की पालना, बाजारों की बंदी के बाद जांच, खुले में घूमने वाले लोगों को रोकना आदि कार्य भी ये पुलिस के साथ जिम्मेदारी से निर्वाह रहे हैं।


पैसे से बढ़ी देश की सुरक्षा


ऐसे ही एक पुलिस मित्र मनोज से मुलाकात हुई विदार गांव कि सीमा पर बनाई गई अस्थायी पुलिस चौकी पर। जो वहां एक पुलिसकर्मी और 3 अन्य पुलिस मित्र बंगाली, रामखिलाड़ी, भोलाराम के साथ तैनात किया गया था। ये सभी सीमा पर आवागमन को तो काबू कर ही चुके थे। स्थानीय गांवों का होने के चलते इस मार्ग पर राजस्थान के गांवों के लोगो की पहचान पुख्ता करने का भी प्रयास कर रहे थे। मनोज ने बताया कि वे मानदेय के लिए इस पद पर नहीं आए, बल्कि देश मे घुस आए महामारी में अपनी उचित भूमिका के निर्वाहन के लिए भर्ती हुए है। इसीलिए चारों लोग यहां 24 घंटे ड्यूटी करने का प्रयास करते है। केवल नहाने धोने के लिए घर जाते है, वो भी एक बार मे दो। खाना भी यहीं मंगवा लेते है। हालांकि इन्हें किसी भी प्रकार की सुविधा सरकार द्वारा नहीं दी गई है। न वर्दी न सेनिटाइजर, यहां तक की डंडा भी पेड़ों की टहनियों को काट कर बना लिया है।

इनका कहना है

जिले में पुलिस मित्रों की ओर से सराहनीय कार्य किया जा रहा है। अति सराहनीय कार्य करने वालों को मेरी ओर से प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। साथ ही पुलिस मित्रों को शीघ्र ही सेनेटाइजर व मास्क उपलब्ध कराए जाएंगे।
मृदुल कच्छावा, पुलिस अधीक्षक, धौलपुर।

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