ना सजे गणेश पाण्डाल ना मंदिरों में उमड़ी भीड़, घरों पर विराजे गजानन


धौलपुर. जिला मुख्यालय पर गणेश चतुर्दशी पर कोरोना के चलते ना तो शहर में पाण्डाल सजे और ना ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। कोरोना के चलते जिला प्रशासन की ओर से मंदिरों में आयोजनों पर रोक होने के कारण मंदिरों में श्रद्धालु नहीं पहुंचे

By: Naresh

Published: 23 Aug 2020, 12:40 PM IST

ना सजे गणेश पाण्डाल ना मंदिरों में उमड़ी भीड़, घरों पर विराजे गजानन
जिला मुख्यालय पर चौराहों पर सजते हैं विशाल गणेश पाण्डाल
अनन्त चतुर्दशी को कराते हंै विसर्जित

धौलपुर. जिला मुख्यालय पर गणेश चतुर्दशी पर कोरोना के चलते ना तो शहर में पाण्डाल सजे और ना ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। कोरोना के चलते जिला प्रशासन की ओर से मंदिरों में आयोजनों पर रोक होने के कारण मंदिरों में श्रद्धालु नहीं पहुंचे। वहीं चौराहों पर भी गणेश पाण्डाल भी नहीं सजाए गए। ऐसे में लोगोंं ने बाजारों से गणेशी जी छोटी प्रतिमाएं खरीदकर घर पर विराजमान की और पूजा अर्चना की बूंदी का भोग लगाया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने घरों पर गणेश जी को चोला चढ़ाया। पकवान बनाए और गणेश की आरती कर प्रसादी का वितरण भी किया।
बाड़ी. भाद्र मास शुक्ल पक्ष चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के चलते विघ्नहर्ता के जन्मदिन पर भी संकट आ गया है। शनिवार को गणेश चतुर्थी पर जहां सामूहिक रूप से गणेश स्थापना कार्यक्रमों पर रोक रही, वहीं भगवान गणेश के भक्तों ने अपने घरों पर ही गणपति की स्थापना की। जिसमें आरती के साथ भोग प्रसादी लगाई गई। शहर के घंटाघर सहित बाजार के अलावा कई स्थानों पर भगवान गणेश की छोटी से लेकर बड़ी प्रतिमाएं भी बिक्री के लिए दुकानदारों द्वारा लाई गई। जिनमें से ज्यादातर प्रतिमाएं बिना बिके ही रह गई, क्योंकि सामूहिक आयोजनों पर रोक होने के चलते इस बार केवल घरों पर ही भगवान गणेश की पूजा अर्चना की जा रही है। ऐसे में प्रतिमाओं की कम बिक्री हुई है।
शहर के विभिन्न गणेश मंडल, उनके सदस्य पदाधिकारी भी इस बार कोरोना संक्रमण के चलते जिला प्रशासन द्वारा सामूहिक आयोजनों पर लगाई रोक से मायूस दिखे। ऐसे में वे सामूहिक आयोजन तो नहीं कर सके, लेकिन उनके द्वारा भगवान गणेश की प्रतिमाओं की स्थापना अपने घर पर की गई है। शहर के अलग अलग स्थानों पर कोई भी सामूहिक आयोजन देखने को नहीं मिला है, जो गत वर्ष देखने को मिलता था। करीब 4 दर्जन से अधिक सामूहिक आयोजन शहर के अलग-अलग स्थानों पर होते थे, जो इस बार कहीं भी दिखाई नहीं दे रहे। केवल घरों पर ही भगवान गणेश की प्रतिमाओं को लाकर विराजित किया गया है। शनिवार से शुरू हुए यह आयोजन पूजा, अर्चना, भोग, प्रसादी एवं सुबह शाम महाआरती के साथ अनंत चतुर्दशी तक चलेंगे।गणेश चतुर्थी पर विध्नहर्ता के सामूहिक आयोजनों पर कोरोना का संकट
प्रशासन की रोक से शहर में नहीं हुए सामूहिक आयोजन
-भक्तों ने अपने घरों पर की भगवान गणेश की स्थापना
बाड़ी. भाद्र मास शुक्ल पक्ष चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के चलते विघ्नहर्ता के जन्मदिन पर भी संकट आ गया है। शनिवार को गणेश चतुर्थी पर जहां सामूहिक रूप से गणेश स्थापना कार्यक्रमों पर रोक रही, वहीं भगवान गणेश के भक्तों ने अपने घरों पर ही गणपति की स्थापना की। जिसमें आरती के साथ भोग प्रसादी लगाई गई। शहर के घंटाघर सहित बाजार के अलावा कई स्थानों पर भगवान गणेश की छोटी से लेकर बड़ी प्रतिमाएं भी बिक्री के लिए दुकानदारों द्वारा लाई गई। जिनमें से ज्यादातर प्रतिमाएं बिना बिके ही रह गई, क्योंकि सामूहिक आयोजनों पर रोक होने के चलते इस बार केवल घरों पर ही भगवान गणेश की पूजा अर्चना की जा रही है। ऐसे में प्रतिमाओं की कम बिक्री हुई है।
शहर के विभिन्न गणेश मंडल, उनके सदस्य पदाधिकारी भी इस बार कोरोना संक्रमण के चलते जिला प्रशासन द्वारा सामूहिक आयोजनों पर लगाई रोक से मायूस दिखे। ऐसे में वे सामूहिक आयोजन तो नहीं कर सके, लेकिन उनके द्वारा भगवान गणेश की प्रतिमाओं की स्थापना अपने घर पर की गई है। शहर के अलग अलग स्थानों पर कोई भी सामूहिक आयोजन देखने को नहीं मिला है, जो गत वर्ष देखने को मिलता था। करीब 4 दर्जन से अधिक सामूहिक आयोजन शहर के अलग-अलग स्थानों पर होते थे, जो इस बार कहीं भी दिखाई नहीं दे रहे। केवल घरों पर ही भगवान गणेश की प्रतिमाओं को लाकर विराजित किया गया है। शनिवार से शुरू हुए यह आयोजन पूजा, अर्चना, भोग, प्रसादी एवं सुबह शाम महाआरती के साथ अनंत चतुर्दशी तक चलेंगे।

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