छह वर्ष बाद शुरू हुआ ऑपरेशन थियेटर, 15 दिन बाद ही हुआ बंद

बाड़ी. सामान्य चिकित्सालय में व्यवस्थाओं को सुधारने में लगे पीएमओ के साथ बाड़ी विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा के अथक प्रयास न जाने किन कारणों से फेल होते नजर आ रहे हैं। जहां अस्पताल में पिछले 15 दिन से सोनोग्राफी मशीन और डिजिटल एक्सरे मशीन खराब पड़ी है। वहीं अब बरसों बाद शुरू हुआ ऑपरेशन थिएटर भी फिर से ताले में बंद होता नजर आ रहा है।

By: Naresh

Updated: 10 Sep 2020, 10:07 AM IST

छह वर्ष बाद शुरू हुआ ऑपरेशन थियेटर, 15 दिन बाद ही हुआ बंद
सर्जन के साथ एनेस्थीसिया के चिकित्सक को मेडिकल विभाग के उच्च अधिकारियों ने लगाया जयपुर

बाड़ी. सामान्य चिकित्सालय में व्यवस्थाओं को सुधारने में लगे पीएमओ के साथ बाड़ी विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा के अथक प्रयास न जाने किन कारणों से फेल होते नजर आ रहे हैं। जहां अस्पताल में पिछले 15 दिन से सोनोग्राफी मशीन और डिजिटल एक्सरे मशीन खराब पड़ी है। वहीं अब बरसों बाद शुरू हुआ ऑपरेशन थिएटर भी फिर से ताले में बंद होता नजर आ रहा है। अस्पताल में करीब 6 वर्ष बाद ऑपरेशन थिएटर शुरू हुआ था। जिसमें उदयपुर से डॉ. संजीव सिंह चौधरी को सर्जन के तौर पर नियुक्त किया था। जिन्होंने आते ही अस्पताल में ओटी को शुरू करा ऑपरेशन प्रारंभ किए थे। करीबन 15 दिन के एक दर्जन से अधिक मरीजों को राहत दी। लेकिन एनेस्थीसिया चिकित्सक डॉ. अजी कुमार के आरबीएचएस जयपुर लगाए जाने के बाद उनका आदेश भी एसएमएस जयपुर हो गए। ऐसे में सर्जन और एनेस्थीसिया दोनों चिकित्सक की अनुपस्थिति में ऑपरेशन थिएटर पर फिर से ताला लगता नजर आ रहा है।
अस्पताल पीएमओ डॉ. शिवदयाल मंगल से मिली जानकारी के अनुसार उच्च अधिकारियों के निर्देश पर दोनों चिकित्सकों को जयपुर भेजा गया है। जहां निश्चेतक चिकित्सक डॉ. अजी कुमार को आरबीएचएस जयपुर में तैनात किया है, वहीं डॉ. संजीव चौधरी को एसएमएस जयपुर लगाया है। ऐसे में दोनों चिकित्सकों के जाने के बाद ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी संबंधी काम नहीं हो सकेगा।
वहीं अस्पताल के संस्थापन शाखा से मिली जानकारी के अनुसार सर्जन चिकित्सक डॉ. संजीव सिंह चौधरी को एसएमएस जयपुर एवं एनेस्थीसिया चिकित्सक डॉ. अजी कुमार को आरबीएचएस जयपुर डेपुटेशन पर लगाया है। जिनकी सैलरी बाड़ी अस्पताल से ही उठेगी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि उच्च अधिकारी आखिर किन परिस्थितियों या एप्रोच के चलते ऐसे निर्णय लेते हैं। जहां बाड़ी अस्पताल में 2 चिकित्सकों के आने से ऑपरेशन थिएटर शुरू हुआ था और तीन उपखंडों के ग्रामीण मरीजों को लाभ मिल रहा था, वहीं डेपुटेशन पर दोनों चिकित्सकों को जयपुर भेज दिया।

क्यों नहीं रुकते हैं कस्बाई अस्पतालों में वरिष्ठ चिकित्सक
बाड़ी, सरमथुरा, बसेड़ी जैसे उपखंड अस्पतालों में सर्जन और फिजिशियन जैसे वरिष्ठ चिकित्सक बहुत कम रुक पाते हैं। वर्ष 2014 में डॉ. रामविलास गुर्जर के धौलपुर स्थानांतरण के बाद से सर्जन का पद रिक्त पड़ा है। जिस पर जुलाई महीने में डॉ. संजीव चौधरी को नियुक्त किया था। ऐसे में सवाल यह उठता है कि ऐसे वरिष्ठ चिकित्सक जिनकी कस्बाई अस्पतालों में विशेष आवश्यकता है, क्यों रुकना पसंद नहीं करते है। इसके पीछे वरिष्ठ चिकित्सकों को मिलने वाली सुविधाओं का टोटा सामने आया है। जिसमे उनके रहने के लिए क्वार्टर नहीं होना और चिकित्सा पद के हिसाब से ऑपरेशन थिएटर का संचालन और सुविधाओं का नहीं होने का मामला सामने आया है। जिसके चलते ऐसे वरिष्ठ चिकित्सक केवल जिला मुख्यालयो या संभाग और प्रदेश की राजधानी जैसे बड़े अस्पतालों में रहना ही पसंद करते है। इसके चलते ही पिछले 6 साल में करीबन आधा दर्जन सर्जन चिकित्सक जो बड़ी अस्पताल लगाए, उन्होंने कार्यभार ग्रहण ही नहीं किया या करने के बाद स्थानांतरण करा कर चले गए।

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