चार धाम यात्रा के बीच रास्ते से गायब हुआ रामभरोसी, रेलवे के कर्मचारियों ने खोज निकाला बुजुर्ग

बाड़ी. जिले के सरमथुरा कस्बे के सेढ़ पाड़ा निवासी 85 वर्षीय बुजुर्ग रामभरोसी धोबी पुत्र बसंता अपने परिवारिजनों के साथ 24 फरवरी को चार धाम यात्रा से एकत्रित जल को रामेश्वरम चढ़ाने ट्रेन से निकले थे।

By: Naresh

Published: 08 Mar 2021, 11:35 AM IST

चार धाम यात्रा के बीच रास्ते से गायब हुआ रामभरोसी, रेलवे के कर्मचारियों ने खोज निकाला बुजुर्ग
पांच दिन बाद रेलवे के धौलपुर कर्मचारियों ने तिरूचिरापल्ली में खोज निकाला 85 वर्षीय बुजुर्ग
-परिवार से मिलते ही जीभर कर रोया बुजुर्ग, जीने की छोड़ दी थी आस
बाड़ी. जिले के सरमथुरा कस्बे के सेढ़ पाड़ा निवासी 85 वर्षीय बुजुर्ग रामभरोसी धोबी पुत्र बसंता अपने परिवारिजनों के साथ 24 फरवरी को चार धाम यात्रा से एकत्रित जल को रामेश्वरम चढ़ाने ट्रेन से निकले थे। चेन्नई से जब वे 26 फरवरी को रामेश्वरम की गाड़ी में बैठे तो रात्रि के समय तिरछी स्टेशन पर गाड़ी जब आधा घंटे के लिए रुकी तो वे गायब हो गए। इसके बाद परिजनों ने उन्हें ढूंढने का काफी प्रयास किया, लेकिन हर जगह से निराशा हाथ लगी। ऐसे में परेशान परिजन उनके एक बेटे को चेन्नई छोड़ वापस लौट आए। बाद में जब गुम होने की खबर धौलपुर तक उनके बाड़ी के अग्रसेन कॉलोनी में रहने वाले बेटी और दोहिते हरदयाल तक पहुंची तो उन्होंने रेलवे में तैनात उनसे और उनके दोस्तों से जुड़े हुए जिले के रेलवे कार्मिकों को यह जानकारी दी। उन्होंने अपने ग्रुपों पर गुम हुए रामभरोसी का फोटो शेयर करते हुए उनको ढूंढने का प्रयास किया।
पांच दिन की मेहनत आखिर रंग लाई और बुजुर्ग रामभरोसी को रेलवे में तैनात सरमथुरा के हुलासपुरा निवासी राजपाल मीणा ने ढूंढ निकला। बुजुर्ग रामभरोसी 3 मार्च को तिरूचिरापल्ली रेलवे स्टेशन पर बदहवास अवस्था में मिले। जिनको उसने पहले खाना खिलाया और रेलवे क्र्वाटर पर ले जाकर रखा। दूसरे दिन ट्रेन में कुहावनी के टीटीई रामनिवास मीणा के सुपुर्द किया। जिन्होंने रामभरोसी को चेन्नई पहुंचाया, जहां से चेन्नई में मौजूद उनका बेटा मुकेश उनको अपने साथ लेकर आया है। शनिवार रात धौलपुर पहुंचे गुम हुए बुजुर्ग रामभरोसी जब अपने परिवार से मिले तो जीभर कर रोये, क्योंकि उन्होंने अपने जीवन की आस छोड़ दी थी। अब वे अपने परिवार से मिलकर खुश है। उन्होंने रेलवे के हर उस कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने उनको वापस उनके घर पहुंचाया है। इस कार्य में उनके दोहिते और अस्पताल के लेब कर्मचारी हरदयाल और उनके सीनियर पुनीत जिंदल का भी विशेष सहयोग रहा है।

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