स्वच्छ भारत मिशन अभियान; अब मल-कीचड़ निस्तारण में जुटी सरकार

धौलपुर. स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय निर्माण के बाद सरकार अब सैप्टिक टेंकों के मल-गाद कीचड़ प्रबंधन में जुट गई है। इसके लिए ग्रामीण एवं पंचायती राज विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत फिलहाल चार जिलों को शामिल किया है। इन चार जिलों में धौलपुर जिले के अलावा जयपुर

By: Naresh

Updated: 27 Jun 2021, 10:30 AM IST

स्वच्छ भारत मिशन अभियान; अब मल-कीचड़ निस्तारण में जुटी सरकार

धौलपुर. स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय निर्माण के बाद सरकार अब सैप्टिक टेंकों के मल-गाद कीचड़ प्रबंधन में जुट गई है। इसके लिए ग्रामीण एवं पंचायती राज विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत फिलहाल चार जिलों को शामिल किया है। इन चार जिलों में धौलपुर जिले के अलावा जयपुर, सीकर तथा दौसा जिला शामिल हैं। प्रबंधन के लिए मिशन से जुड़े अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण सेंटर फॉर साइंस एण्ड एनवायरमेंट संस्थान, नई दिल्ली की ओर से आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान मल-गाद कीचड़ (फेकल स्लग प्रबंधन एफएसएम) प्रबंधन के क्षेत्र में उपयोग ली जा रही आधुनिक तकीनीक एवं कार्यप्रणाली बताई जा रही है।

मल-कीचड़ प्रबंधन की आवश्यकता क्यों?

अभियान के तहत ग्रामीणों को शौचालय बनाने के दौरान सोख्ता गड्ढा बनाने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन ग्रामीणों ने सेप्टिक टेंक बना लिए।
- इन टेंक में मल कीचड़ का उपचार नहीं होता है।
- एकल गड्ढे में मल कीचड़ का उपचार करने में बहुत समय की जरूरत होती है।
- जब एकल गड्ढा और सेप्टिक टेंक भरा हो, तो शौचालय अवरुद्ध हो जाता है।
- भरे हुए सेप्टिक टेंकों से ओवरफ्लो पानी और मल कीचड़ से बीमारियों और पर्यावरण प्रदूषण होता है।
- सेप्टिक टेंक व एकल गड्ढा खाली कब कराना है, परिवार को इसकी जानकारी नहीं होती है।
- वैक्यूम ट्रक आम तौर पर सेप्टिक टेंक व एकल गड्ढे को खाली करने के बाद गांव के बाहर जल निकायों के पास असुरक्षित तरीके से मल को प्रवाहित कर देते हैं। उल्लेखनीय है कि कच्चे सीवेज और सेप्टिक टेंक से निकलने वाले कीचड़, कच्चे सीवेज की तुलना में 100 गुना अधिक खतरनाक होते हैं। इस कारण इनके प्रबंधन की जरूरत है।

यूं होगा प्रबंधन

- पहले शौचालय की सफाई होगी
- फिर सेप्टिक टेंक से मल-गाद-कीचड़ की निकासी
- ट्रक से सुरक्षित परिवहन करके ट्रीटमेंट प्लांट तक ले जाया जाएगा।
- वहां पर ट्रीट होने के बाद इसका रियूज किया जाएगा। इसमें खाद, बायोगैस, ऊर्जा या डिस्पोजल शामिल हैं।

खाद में किया जा सकेगा उपयोग

अनप्लांटेड ड्राइंग बेड तकनीक
इस सरल तकनीक का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में किया जा सकता है। बेड पानी को नष्ट कर देता है और कीचड़ शीर्ष पर रहेगा, जो वाष्पीकरण द्वारा सूख जाता है। सुखाने के 10 से 15 दिनों के बाद नमी की मात्रा 60 प्रतिशत रहने पर इस सूखे कीचड़ का उपयोग कृषि उद्देश्य या सह खाद के लिए किया जा सकता है।

इनका कहना है

स्वच्छ भारत मिशन अभियान के ठोस एवं तरल पदार्थ प्रबंधन के तहत ही मल-गाद-कीचड़ प्रबंधन किया जाना है। इसके लिए फिलहाल चार जिलों को शामिल किया गया है। इनका प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मल गाद कीचड़ प्रबंधन से सेप्टिक टेंकों से निकलने वाले मलबे का निस्तारण किया जा सकेगा, जिसे अभी लोग गांव के पास या नदी-नालों में ही प्रवाहित कर देते हैं। इसका ट्रीटमेंट करके इसका रियूज किया जा सकेगा।
पराग चौधरी, अतिरिक्त प्रभारी, स्वच्छ भारत मिशन, जयपुर।

इनका कहना है

ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन के घटक एफएसएम के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए डीआरजी सदस्यों को सक्रिय कर दिया गया है। साथ ही उनकी रिव्यू मिटिंग ली जा रही है। जिससे प्रबंधन ठीक प्रकार से किया जा सके।
चेतन चौहान, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, धौलपुर।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned