टैलेंट टॉक; संगीत के क्षेत्र में बांसुरी वादन में देसी विदेशी शिष्यों को शिक्षा दे रहे हैं राजीव गर्ग

बाड़ी. यदि जीवन में कुछ करना है तो उसके लिए बचपन से ही तन और मन से उस क्षेत्र विशेष के लिए लीन होना पड़ता है। तभी जाकर मंजिल मिलती है। केवल पढ़ लिखकर बड़ा होना, जीविका उपार्जन के लिए कमाना और बच्चों एवं परिवार के साथ रहकर अंतिम समय में ईश्वर को प्राप्त हो जाना ही जीवन नहीं है, बल्कि ईश्वर को प्राप्त करने के लिए कुछ अभिरुचि भी होनी चाहिए।

By: Naresh

Published: 27 Sep 2020, 10:59 AM IST

टैलेंट टॉक; संगीत के क्षेत्र में बांसुरी वादन में देसी विदेशी शिष्यों को शिक्षा दे रहे हैं राजीव गर्ग

कुछ भी करो, लेकिन तन मन से लीन होकर मिलती है मंजिल
-जीवन में धन उपार्जन के साथ अभिरुचिओं का विकास भी जरूरी
-संगीत के क्षेत्र में बांसुरी वादन में देसी विदेशी शिष्यों को शिक्षा दे रहे हैं बाड़ी निवासी राजीव गर्ग

बाड़ी. यदि जीवन में कुछ करना है तो उसके लिए बचपन से ही तन और मन से उस क्षेत्र विशेष के लिए लीन होना पड़ता है। तभी जाकर मंजिल मिलती है। केवल पढ़ लिखकर बड़ा होना, जीविका उपार्जन के लिए कमाना और बच्चों एवं परिवार के साथ रहकर अंतिम समय में ईश्वर को प्राप्त हो जाना ही जीवन नहीं है, बल्कि ईश्वर को प्राप्त करने के लिए कुछ अभिरुचि भी होनी चाहिए। जिसका आजकल के युवाओं में नितांत अभाव देखने को मिल रहा है। यह कहना है बांसुरी वादक राजीव गर्ग का, जो इन दिनों पुणे में देसी-विदेशी शिष्यों को बांसुरी की धुनों की शिक्षा दे रहे हैं।
बाड़ी कस्बे के गांधी पार्क निवासी मथुरादास गर्ग के पुत्र राजीव गर्ग का कहना है कि उनका बचपन से ही सपना बांसुरी वादन करने का था। जिसमें वे पंडित हरिप्रसाद चौरसिया जैसी बांसुरी बजाना चाहते थे। इस ख्वाब को पूरा करने के लिए उन्होंने 14 साल पहले घरवार छोड़ दिया और मुंबई की चकाचौंध के बीच जाकर जब नई जिंदगी की शुरुआत की तो पेट पालन करने के लिए दर-दर भटके। कुछ फिल्मों के सेट पर भी काम किया। इस दौरान वे वृंदावन में पंडित हरिप्रसाद चौरसिया के गुरुकुल के चक्कर भी काटते रहे। एक दिन जब पंडित हरिप्रसाद चौरसिया के दर्शन हुए तो बांसुरी की धुन मन में बजने लगी, हालांकि वे पंडित हरिप्रसाद चौरसिया से तो शिक्षा नहीं ले सके, लेकिन उनके एक वरिष्ठ शिष्य हिमांशु नंदा ने उन्हें अपना शिष्य बनाया। बांसुरी की पूर्णरूपेण तालीम दी। आठ साल तक बांसुरी की धुनों को सीखने के दौरान उन्होंने उनके साथ कई मंचों पर संगत भी किया। वर्तमान में राजीव गर्ग गंधर्व महाविद्यालय में संगीत विशारद के छात्र के रूप में शिक्षा ले रहे हैं और पुणे शहर में बांसुरी का संस्थान चलाकर देसी-विदेशी शिष्यों को शिक्षा दे रहे हैं। उनका सपना है की वे अपने शहर के साथ पुणे शहर में संगीत अकादमी की स्थापना करें। बच्चों एवं युवाओं में लुप्त हो रही संगीत की इस कला में पारंगत करे। संगीत को गुरु और बांसुरी की धुनों को अपना परिवार मानने वाले राजीव गर्ग अविवाहित है और आखरी सांस तक इसकी सेवा करना चाहते हैं। बाकी सब उन्होंने अपने सारथी कृष्णा पर छोड़ रखा है, जो सही राह दिखाकर उन्हें मंजिल तक पहुंचाएगा।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned