एक भी दिन कक्षा नहीं लगी, फिर भी विभाग ले रहा पांचवीं बोर्ड की परीक्षा

धौलपुर. राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम के प्रदेश उपसभाध्यक्ष सुरेश भारद्वाज ने शिक्षा मंत्री एवं शिक्षा निदेशक को पत्र भेजकर पांचवी कक्षा तक के विद्यार्थियों की परीक्षा ना लेकर अगली कक्षा में प्रमोट करने की मांग की है। भारद्वाज ने बताया कि पिछले एक वर्ष से कोरोना के चलते पांचवी कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल बंद है।

By: Naresh

Published: 05 Mar 2021, 11:53 AM IST

एक भी दिन कक्षा नहीं लगी, फिर भी विभाग ले रहा पांचवीं बोर्ड की परीक्षा
पांचवी कक्षा तक के बच्चों को प्रमोट करने की शिक्षक संघ सियाराम ने की मांग
धौलपुर. राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम के प्रदेश उपसभाध्यक्ष सुरेश भारद्वाज ने शिक्षा मंत्री एवं शिक्षा निदेशक को पत्र भेजकर पांचवी कक्षा तक के विद्यार्थियों की परीक्षा ना लेकर अगली कक्षा में प्रमोट करने की मांग की है। भारद्वाज ने बताया कि पिछले एक वर्ष से कोरोना के चलते पांचवी कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल बंद है। वहीं दूसरी ओर शिक्षा निदेशक पांचवीं बोर्ड की परीक्षा कराने की कह रहे हैं। इसके लिए शिक्षा निदेशक ने सभी संस्था प्रधानों को निर्देश दिए हैं कि कक्षा पांचवी एवं आठवीं के बच्चों की सभी प्रविष्टियां शाला दर्पण पर छात्र प्रवेश रजिस्टर के अनुसार की जाए, जिससे निकट भविष्य में पांचवीं बोर्ड एवं आठवीं बोर्ड के परीक्षा फॉर्म भरते समय कोई भी परेशानी नहीं आए। भारद्वाज ने कहा कि जब पांचवी कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए एक भी दिन कक्षा नहीं लगी है। स्कूल पूरी तरह पांचवी कक्षा तक के बच्चों के लिए बंद है। ऐसे में कक्षा पांचवी की बोर्ड परीक्षा कराने का औचित्य समझ से परे है। भारद्वाज ने कहा कि इसको लेकर अभिभावक भी परेशान है कि उनके बच्चे एक भी दिन विद्यालय नहीं गएए फिर वह परीक्षा कैसे देंगे घ्भारद्वाज ने कहा कि जो बच्चे इस वर्ष पांचवी कक्षा में है उन्होंने कक्षा चार की भी परीक्षा नहीं दी है। कोरोना के चलते उन्हें पिछले वर्ष कक्षा चार से पांच में प्रमोट किया गया था ।ऐसे में अब सीधे उनकी बोर्ड की परीक्षा लेना उचित नहीं है। भारद्वाज ने बताया कि हालांकि शिक्षा विभाग कह रहा है कि पांचवीं बोर्ड की परीक्षा सरल तरीके से आयोजित की जाएगी तथा पाठ्यक्रम भी कम कर दिया गया है। शिक्षा विभाग का तर्क है कि भले ही कोरोना के कारण विद्यार्थियों के लिए स्कूल बंद रहे हैं। लेकिन शिक्षकों ने स्माइल प्रोग्राम के तहत बच्चों को शिक्षण सामग्री एवं गृह कार्य अभिभावको के व्हाट्सएप पर भेजा गया है ।लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि स्माइल प्रोग्राम का कितने बच्चों को लाभ मिल पाया हैघ् ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादातर बच्चे एंड्राइड फोनए डाटा एवं इंटरनेट की अनुपलब्धता की वजह से वंचित ही रहे हैं

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