शैक्षिक सत्र के दो माह बाद भी स्कूलों में नहीं पहुंची पूरी नि:शुल्क पुस्तक

धौलपुर. सरकारी स्कूलों में 7 जून से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है। शैक्षिक सत्र के दो महीने बाद भी स्कूलों में नामांकन के अनुरूप छात्रों के लिए विभाग की ओर से अभी तक निशुल्क पाठ्यपुस्तकों की आपूर्ति नहीं की गई है। जिले के स्कूलों मेआधी अधूरी ही किताबें दी गईं हैं। कई कक्षाओं व विषयों की तो एक भी किताब स्कूलों में नहीं पहुंची है।

By: Naresh

Updated: 01 Aug 2021, 05:53 PM IST

शैक्षिक सत्र के दो माह बाद भी स्कूलों में नहीं पहुंची पूरी नि:शुल्क पुस्तक

आधी अधूरी आपूर्ति के बाद, शिक्षक पुरानी किताबें बांटकर चला रहे काम
- छात्रों को पुस्तकों के बिना स्माइल कार्यक्रम का भी नहीं मिल पा रहा पूरा लाभ

धौलपुर. सरकारी स्कूलों में 7 जून से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है। शैक्षिक सत्र के दो महीने बाद भी स्कूलों में नामांकन के अनुरूप छात्रों के लिए विभाग की ओर से अभी तक निशुल्क पाठ्यपुस्तकों की आपूर्ति नहीं की गई है। जिले के स्कूलों मेआधी अधूरी ही किताबें दी गईं हैं। कई कक्षाओं व विषयों की तो एक भी किताब स्कूलों में नहीं पहुंची है। वहीं कक्षा एक में प्रथम तीन महीने जिस किताबों को बच्चों को पढऩा था, उस प्रथम भाग की आपूर्ति न कर तीसरा भाग भेज दिया गया है। ऐसे में शिक्षकों को छात्रों को पुरानी किताबें बांटकर काम चलाना पड़ रहा है। लेकिन इसके बाद भी पूर्ति नहीं हो रही है। छात्रों को स्कूलों से बिना किताबों के मायूस लौटना पड़ रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारी द्वितीय चरण में सभी किताबों की आपूर्ति करने का दावा कर रहे हैं। लेकिन छात्रों के स्कूल बंद अवधि में सुचारू शिक्षण के लिए चलाए जा रहे स्माइल-3 कार्यक्रम का भी फायदा बिना किताबों के छात्रों को नहीं मिल रहा है। यही नहीं कोरोना काल में संचालित नए शैक्षिक सत्र में बिना किताबों के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सबसे ज्यादा दिक्कत दसवीं और बारहवीं के छात्रों को आ रही है। जिनका पाठ्यक्रम इसी साल बदला गया है। लेकिन बोर्ड की इन दोनों कक्षाओं की भी सभी किताबें छात्रों को नहीं मिली हैं। कक्षा 8 की छात्रा रिंकी कुमारी ने बताया कि स्कूल से केवल तीन किताबें दी गई है। बिना किताबों के पढ़ाई में अनुकूलता नहीं आ पा रही है। शिक्षक जो गृह कार्य दे रहे हैं, उसको करने में भी बेहद मुश्किल आती है।

पुस्तक वितरण के ब्लॉक वार 6 केंद्र, ऐसे होती हैं स्कूलों में आपूर्ति

शिक्षा विभाग की ओर से कक्षा एक से 12वीं तक के विद्यार्थियों को दी जाने वाली निशुल्क पाठ्य पुस्तकों के वितरण के लिए धौलपुर, बाड़ी, बसेड़ी, राजाखेड़ा, सैंपऊ व सरमथुरा के उच्च माध्यमिक विद्यालयों में वितरण केंद्र बनाया गया है। इन केंद्रों पर पाठ्य पुस्तक मंडल की ओर से नामांकन के अनुरूप सभी विषयों की किताबें भेजी जाती है। इन केंद्रों से संबंधित ब्लॉक की पंचायत मुख्यालय के स्कूलों में संबंधित पीईईओ परिक्षेत्र के सभी विद्यालयों की किताबें भेजी जाती है। पंचायत मुख्यालय से संबंधित शिक्षकों को खुद के स्तर पर अपने स्कूलों की किताबें ले जानी पड़ती है। जिले के सभी स्कूलों में निशुल्क पाठ्य पुस्तक उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में तैनात प्रधानाचार्य कैडर के अधिकारी को दी गई है। लेकिन हर शैक्षिक सत्र में स्कूलों को नामांकन के अनुरूप किताबें विभाग उपलब्ध नहीं करा पाता है। ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई या तो रामभरोसे होती है या उनको अपने पैसे से किताबें खरीदनी पड़ती है। लेकिन शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी पाठ्य पुस्तक वितरण में इन खामियों को दूर करने में कोई दिलचस्पी नहीं लेते हैं।

सुखद भी: नन्हे कंधों को बस्ते के बोझ से मिली राहत

पहली से पांचवीं तक के विद्यार्थियों के बस्ते का बोझ कम करने के लिए बीते साल से शुरू हुआ नवाचार वर्तमान सत्र में पूर्ण हो गया। इस सत्र में विद्यार्थियों को सिर्फ तीन किताबों से पढ़ाया जाएगा और एक किताब तीन महीने पढ़ाई जाएगी। फिर अगली किताब से आगे की पढ़ाई होगी। इस बार पहली से पांचवीं तक के विद्यार्थियों को सभी विषयों हिंदी, अंग्रेजी, गणित, पर्यावरण की शिक्षा एक ही किताब से दी जा रही है और सभी विषयों को मिलाकर तीन किताबें पढ़ाई जाएंगी। पहली किताब जुलाई से सितम्बर तक, दूसरी किताब अक्टूबर से दिसम्बर, तीसरी जनवरी से मार्च तक पूरी कराई जाएगी। ऐसे में छात्र को तीन महीने तक एक ही पुस्तक लेकर स्कूल जाना होगा। ऐसे में छात्र के बैग का वजन नहीं के बराबर हो गया है।

इनका कहना है

कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों को बैग में एक किताब ही लानी होगी। नन्हें बच्चों के बस्ते का बोझ बेहद कम हो गया। सरकार का यह बेहद सराहनीय निर्णय हैं। कक्षा 1 के नव प्रवेशित छात्रों के लिए स्कूलों में अभी तक पहला भाग नहीं मिला है। अन्य कक्षाओं के छात्रों के लिए भी स्कूलों को आधी अधूरी किताबें दी गई है। जिससे बच्चों का ऑनलाइन शिक्षण कार्य बेहद प्रभावित हो रहा है।
राजेश शर्मा, जिलाध्यक्ष, राजस्थान शिक्षक एवं पंचायती राज कर्मचारी संघ, धौलपुर।

इनका कहना है
जिले में करीब 12 लाख किताबों की आवश्यकता होती है, इसमें से करीब छह लाख किताबों का वितरण सम्बंधित विद्यालयों तक कर दिया गया है। अब यह जिम्मेदारी विद्यालयों की है कि उनको विद्यार्थियों तक कैसे पहुंचाए। हमें कक्षा एक से पांच तक पहले भाग तृतीय ही प्राप्त हुआ है, ऐसे में उसे ही भेज दिया गया है, जैसे ही पहला व दूसरा भाग आएगा, उसे भी भेज दिया जाएगा। इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
जगदीश जैन, प्रभारी अधिकारी, पुस्तक वितरण, धौलपुर।

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