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सरकारी सिस्टम की पोल खोलता स्कूल, बारिश के मौसम में भर जाता है पानी

बाड़ी. उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत नौहरा का सबसे बड़ा स्कूल राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय नौहरा सरकारी सिस्टम की अनदेखी का शिकार हो रहा है। कहने को तो यह सीनियर सेकेंडरी स्कूल है, लेकिन विद्यालय की बिल्डिंग प्राइमरी विद्यालय के स्तर की भी नहीं है, जो भवन है। वह भी गांव के आम रास्ते से नीची होने के कारण बरसात के दिनों में

धौलपुर

Updated: July 29, 2021 07:23:59 pm

सरकारी सिस्टम की पोल खोलता स्कूल, बारिश के मौसम में भर जाता है पानी
-स्कूल में बच्चों को अध्ययन के लिए ना कक्षा-कक्ष, ना बैठने की व्यवस्था

बाड़ी. उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत नौहरा का सबसे बड़ा स्कूल राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय नौहरा सरकारी सिस्टम की अनदेखी का शिकार हो रहा है। कहने को तो यह सीनियर सेकेंडरी स्कूल है, लेकिन विद्यालय की बिल्डिंग प्राइमरी विद्यालय के स्तर की भी नहीं है, जो भवन है। वह भी गांव के आम रास्ते से नीची होने के कारण बरसात के दिनों में आम रास्ते का पानी विद्यालय प्रांगण में भर जाता है। जिससे विद्यालय में रखी पुस्तकें, फर्नीचर, सरकारी रिकॉर्ड एवं एमडीएम की खाद्य सामग्री खराब होने की पूरी-पूरी संभावना रहती है।
विद्यालय के कार्यवाहक प्रधानाचार्य राघवेंद्र मीणा ने बताया कि यह विद्यालय 2014 में माध्यमिक से उच्च माध्यमिक में क्रमोन्नत किया गया था, लेकिन विद्यालय के लिए कक्षाओं के अनुरूप भवन स्वीकृत नहीं होने के कारण विद्यालय भवन का नितांत अभाव है। इससे विद्यार्थियों के अध्यन्न में बहुत परेशानी आ रही है। कई कक्षाओं को मजबूरन खुले में संचालित करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि विद्यालय भवन आम रास्ते से नीचा होने के कारण पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। इस संबंध में ग्राम पंचायत सरपंच से लेकर विभागीय अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। आज भी विभागीय अधिकारियों के लिए पत्र लिखा है। उन्होंने बताया कि विद्यालय में वर्तमान में 345 बच्चे नामांकित हैं। विद्यालय में विभिन्न संवर्ग के कुल 18 पद स्वीकृत हैं। जिनमें से प्रधानाचार्य, व्याख्याता संस्कृत, शारीरिक शिक्षक एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद रिक्त हैं। कार्यवाहक प्रधानाचार्य मीणा ने बताया कि वर्तमान में विद्यालय को दान पत्र के आधार पर लगभग 2 बीघा जमीन विद्यालय भवन निर्माण के लिए उपलब्ध है। विद्यालय द्वारा भवन निर्माण के लिए पूर्व में प्रस्ताव भी विभाग को भेजा जा चुका है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में विद्यालय में कुल 6 कमरे उपलब्ध हैं। जिनमें से एक कमरा प्रधानाचार्य कक्ष, एक कमरा स्टोर सामग्री एवं एमडीएम खाद सामग्री के लिए काम में आता है। दो कमरों में विभाग द्वारा आईसीटी लैब स्थापित करवा दी गई है। मात्र दो कमरे कक्षा-कक्ष के रूप में उपलब्ध है। यह कमरे भी नीचे एवं क्षतिग्रस्त होने के कारण बच्चों के बिठाने के उपयुक्त नहीं हैं। उन्होंने बताया कि जब भी बारिश होती है विद्यालय पानी से भर जाता है। ऐसी स्थिति में स्वयं शिक्षकों को बाल्टियों से पानी बाहर निकालना पड़ता है। बुधवार को भी शिक्षकों ने भीगते हुए विद्यालय का पानी बाहर निकाला है। पानी की रोकथाम के लिए शिक्षकों ने ईट सीमेंट से रोक लगाने का प्रयास किया है।
The school exposes the government system, water gets filled during the rainy season
सरकारी सिस्टम की पोल खोलता स्कूल, बारिश के मौसम में भर जाता है पानी
इनका कहना है
पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने 2014 में पंचायत मुख्यालय के समस्त विद्यालयों को उच्च माध्यमिक स्तर में क्रमोन्नत किया था। बिना इस आकलन के कि विद्यालय भवन उपलब्ध है अथवा नहीं। इसी का खामियाजा कई विद्यालयों को उठाना पड़ रहा है। कई विद्यालयों में भवन आज भी प्राथमिक स्तर का ही है। फिर भी उन्हें क्रमोन्नत तो कर दिया गया, लेकिन विभाग भवन उपलब्ध नहीं कर पा रहा है।
सुरेश भारद्वाज, प्रदेश संगठन मंत्री, राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम

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