scriptThe streets of the city became a cowshed, a gathering of unclaimed ani | शहर की सडक़ें बनी गोशाला, दिनभर लावारिस पशुओं का जमघट | Patrika News

शहर की सडक़ें बनी गोशाला, दिनभर लावारिस पशुओं का जमघट

- आने-जाने वालों को होती है परेशानी, हाइवे पर बनी रहती है दुर्घटना की आशंका

- शहर में न कांजी हाउस और न नंदीशाला

- पशुओं को शहर से खदेड़ इतिश्री कर लेती है नगर परिषद

धौलपुर. शहर की सडक़ों और हाइवे पर वाहन चालकों को इन दिनों थोड़ा संभल कर चलने की जरूरत है। दरसअल, बीच सडक़ पर बैठे लावारिस पशु कभी भी वाहन चालकों के लिए मुसीबत बन सकते हैं।

धौलपुर

Published: August 01, 2022 08:37:31 pm

शहर की सडक़ें बनी गोशाला, दिनभर लावारिस पशुओं का जमघट

- आने-जाने वालों को होती है परेशानी, हाइवे पर बनी रहती है दुर्घटना की आशंका

- शहर में न कांजी हाउस और न नंदीशाला
 The streets of the city became a cowshed, a gathering of unclaimed animals throughout the day
शहर की सडक़ें बनी गोशाला, दिनभर लावारिस पशुओं का जमघट
- पशुओं को शहर से खदेड़ इतिश्री कर लेती है नगर परिषद

धौलपुर. शहर की सडक़ों और हाइवे पर वाहन चालकों को इन दिनों थोड़ा संभल कर चलने की जरूरत है। दरसअल, बीच सडक़ पर बैठे लावारिस पशु कभी भी वाहन चालकों के लिए मुसीबत बन सकते हैं। बारिश होते ही सडक़ों पर गोवंश की संख्या बढ़ गई है। ऐसे में ‘सावधानी हटी-दुर्घटना घटी’ वाली कहावत कभी भी चरितार्थ हो सकती है। पशुओं के स्वच्छंद विचरण से आवागमन तो बाधित होता ही है, साथ ही राहगीरों को जानवरों के आक्रमण का भय भी बना रहता है। सुबह से लेकर रात तक आवारा पशु सडक़ों पर डटे रहते हैं। कई बार तो बीच सडक़ पर इनके बीच जंग होने से दुर्घटना घट जाती है। सबसे बड़ी समस्या शहर के मुख्य बाजारों में बनी हुई है। सडक़ों पर खड़े रहने वाले गोवंश की वजह से छोटे-मोटे हादसे बारिश के दिनों में आम बात है। इसके बावजूद जिम्मेदार मूक दर्शक बने हुए हंै। राज्य सरकार ने सडक़ हादसों को रोकने, शहरों में घूमने वाले लावारिस गोवंश से निजात दिलाने व किसानों की फसलों को बचाने के लिए नंदीशाला खोलने की घोषणा की थी, लेकिन यहां जिला मुख्यालय पर नंदीशाला नहीं होने से आवारा मवेशी सडक़ों पर विचरण करते हुए नजर आते हैं। शहर की गलियों, मुख्य सडक़ों से लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग तक पर गोवंश का कब्जा है। आए दिन हादसों का कारण बनने के बावजूद जिला प्रशासन व नगर परिषद इन पशुओं से निजात दिलाने को लेकर पुख्ता इंतजाम नहीं कर पाया है।न कांजी हाउस न नंदीशालाशहर में आवारा मवेशियों को रखने की कहीं भी ठोर नहीं है। जिसके चलते भी सडक़ों पर आवारा मवेशियों को जमघट लगा रहता है। इसकी एक बड़ी समस्या शहर में न तो कांजी हाउस है न ही नंदीशाला। परिषद द्वारा आवारा पशुओं को पकडकऱ कांजी हाउस लाए जाने पर इनके मालिक पर जुर्माना व जानवरों की नीलामी का भी प्रावधान है। दोनों ही व्यवस्था यहां जिला मुख्यालय पर नहीं होने से समस्या बनी हुई है। जिम्मेदार भी फोरी कार्रवाई कर इतिश्री कर लेते हैं।कचरा व चारा डालने वालों ने बढ़ाई परेशानीशहर में कई जगह कचरा व चारा डालने वालों से भी परेशानी बनी हुई है। सब्जी मंडी के पास चारा डालने वालों के चलते कई बार गोवंश लड़ते हुए बीच सडक़ों पर आ जाते हैं। जहां देखो-गोवंश ही गोवंशशहर के सब्जी मंडी, पुरानी सब्जी मंडी, पैलेस रोड, संतर रोड, धूलकोट रोड, तलैया, जगन चौराहा, गौरव पथ, घंटाघर, सिटी जुबली हॉल, जगदीश तिराहा, नेशनल हाइवे 44 पर वाटर वक्र्स चौराहा, मचकुंड समेत शहर के गली व मोहल्लों में लावारिस पशुओं के झुंड देखे जा सकते हैं। शहर की कॉलोनियों में भी सांडों का आतंक कम नहीं है। दिनभर गोवंश का जमघट लगा रहता है।रात में भी बनी परेशानीलावारिस पशुओं के कारण रात के समय भी हादसे का अंदेशा बना रहता है। हाइवे पर बीच सडक़ पर झुंड के रूप में मवेशी बैठे रहते हैं। ऐसे में कई बार वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगानी पड़ती है। ऐसे में हादसे की आशंका हमेशा बनी रहती है।इनका कहना हैधौलपुर में कांजी हाउस की व्यवस्था नहीं है। समय-समय पर अभियान चला कर लावारिस पशुओं को शहर से बाहर किया जाता है।- लजपाल सिंह, आयुक्त नगर परिषद धौलपुरजिले में नन्दीशाला के लिए आवेदन मांगे गए थे। इसका रेस्पॉन्स ठीक नहीं मिला। - डॉ. रामावतार सिंघल, पशु चिकित्सक, धौलपुर

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