scriptThere is no playground in schools, how will India become fit | स्कूलों में नहीं खेल मैदान, कैसे फिट बनेगा इंडिया! | Patrika News

स्कूलों में नहीं खेल मैदान, कैसे फिट बनेगा इंडिया!

- एक पीईईओ क्षेत्र, 8 विद्यालय, 1059 छात्र और किसी में भी नहीं खेल मैदान

- अन्य कार्यों में उलझे रहते हैं शारीरिक शिक्षक

मनीष उपाध्याय

राजाखेड़ा. देश में खेलों के उन्नयन और स्कूली समय से ही छात्र-छात्राओं को फिट रखने के लिए दर्जनों योजनाएं केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित तो की जा रही हैं, लेकिन सिर्फ कागजों में ही

धौलपुर

Updated: February 18, 2022 06:53:25 pm

स्कूलों में नहीं खेल मैदान, कैसे फिट बनेगा इंडिया!

- एक पीईईओ क्षेत्र, 8 विद्यालय, 1059 छात्र और किसी में भी नहीं खेल मैदान

- अन्य कार्यों में उलझे रहते हैं शारीरिक शिक्षक
There is no playground in schools, how will India become fit!
स्कूलों में नहीं खेल मैदान, कैसे फिट बनेगा इंडिया!
मनीष उपाध्याय

राजाखेड़ा. देश में खेलों के उन्नयन और स्कूली समय से ही छात्र-छात्राओं को फिट रखने के लिए दर्जनों योजनाएं केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित तो की जा रही हैं, लेकिन सिर्फ कागजों में ही। इसकी बानगी भर ये है कि उपखण्ड की सिंघावली कलां ग्राम पंचायत के कुल 8 विद्यालयों में से किसी के पास खेल मैदान अब तक उपलब्ध नहीं हो पाया है। जबकि इनमें से एक ग्राम पंचायत का सीनियर सैकंडरी और 2 अन्य उच्च प्राथमिक विद्यालय भी शामिल हैं। जिनमें वर्षों से शारीरिक शिक्षकों का पदस्थापन है, जो अपने मूलकार्य के अभाव में अन्य कार्यों को कर समय व्यतीत कर रहे हैं। इन सभी विद्यालयों में कुल 1059 छात्र छात्राएं अध्ययनरत हैं, जो वर्षों से खेल मैदान का सपना पाले हुए हैं, लेकिन जंग लगी सरकारी व्यवस्थाओं के चलते उनका ये सपना संभवत: कभी पूरा नहीं हो पाए।यह हैं हालात ग्राम पंचायत सिंघावली कला के तहत मुयालय पर सीनियर सेकंडरी विद्यालय हैं। जिसमे 207 छात्र छात्राएं है। उच्च प्राथमिक सिंघावली खुर्द में 256, उच्च प्राथमिक देवदास का पूरा में 331, प्राथमिक विद्यालय तेजसिंह का पुरा में 83, श्रीनगर में71, ताल का पुरा में 39, बागर में 30, दिरावली में 62 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। जिसमे से सिंघावली कला, खुर्द और देवदासपुरा विद्यालयों में तो शारिरिक शिक्षक भी तैनात हैं। लेकिन इनमे से किसी भी विद्यालय में खेल मैदान उपलब्ध नहीं है। जिसके चलते छात्र-छात्राएं अपने स्वास्थ्य को खेल या शारिरिक विकास की गतिविधियों से जोड़ नहीं पा रहे हैं। कमोबेश क्षेत्र के सभी विद्यालयों में ही हालात बहुत अच्छे नही, बल्कि इसी प्रकार के हैं।अतिक्रमण के चलते हालात दुरूहक्षेत्र में सरकारी भूमियों (सिवाय चक या अन्य) की कोई कमी नहीं है, लेकिन अब वह सिर्फ कागजों में आंकड़ों की शोभा बढ़ा रही है। जमीनी तौर पर पूर्णत: अतिक्रमण का शिकार हो चुकी हैं। उपखंड प्रशासन तो दूर जिला प्रशासन भी इनको अतिक्रमण मुक्त करा कर इन्हें विद्यालयों को आवंटित करने में असफल रहा है। जहां आवंटन हो चुका है, वहां भी इन जमीनों पर फसलें ही लहलहा रही है। ग्राम पंचायतें भी इन्हें खाली कराकर विद्यालयों को सुपुर्दगी नही दे पा रही हैं। इस ग्राम पंचायत मुयालय के विद्यालय को आवंटित 12 बीघा के खेल मैदान की भूमि तक को अब तक अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया जा सका है। अब पीटीआई भी हो रहे रिटायरमुयालय के विद्यालय में खेल गतिविधियों के लिए 1993 में शारीरिक शिक्षक सुमेदीलाल जैन को पदस्थापित किया गया था, लेकिन खेल मैदान न होने के चलते बिना अपने मूल कर्तव्य को निभाए ही अगले माह रिटायर हो जाएंगे। वहीं सिंघावली खुर्द और देवदास के पुरा के शारीरिक शिक्षक भी मूल कार्य छोड़ कर अन्य कार्यों में ही समय व्यतीत कर रहे हैं।इनका कहना है विद्यालय को खेल मैदान के लिए भूमि का आवंटन तो किया गया था, लेकिन वहां अतिक्रमण है। इसलिए उसका हमें अब तक कब्जा नहीं मिल पाया है। इस सबंध में तमाम प्रयास किए गए हैं। - अम्बरीश कुमार, कार्यवाहक प्रधानाचार्य एवं पीईईओ सिंघावली कलांजमीनों पर तो पूरी तरह कब्जे हो चुके हैं। ग्राम पंचायत तो उन्हें खाली नहीं करा सकती। प्रशासन को ही इन्हें खाली कराकर विद्यालय को खेल मैदान के लिए आवंटित करना चाहिए। ये बाल हित में अत्यंत आवश्यक है।- बृजमोहन, सरपंच ग्राम पंचायत सिंघावलीहमने बड़ी आस के साथ पदभार संभाला था, कि हम बच्चों को शारीरिक स्वस्थ बनाने के लिए अधिकाधिक गतिविधियों का संचालन करेंगे, लेकिन खेल मैदान नहीं होने से हमें निराशा है। - जयंत, शारीरिक शिक्षक, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, सिंघावली खुर्दअधिकतर स्कूलों में खेल मैदान हंै। अगर कहीं नहीं है तो जिला प्रशासन के माध्यम से जमीन उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है। इस मामले को भी दिखवा कर व्यवस्था की जाएगी।- अरविंद शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी (मा.), धौलपुर

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