शिक्षकों का अटका दो माह का वेतन, कैसे हो परिवार का गुजारा

धौलपुर. कोराना महामारी में जारी लॉकडाउन अब शिक्षकों पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। राज्य सरकार की गाइड लाइन 'जो जहां है, वहीं रहेÓ तथा किसी भी सरकारी गैर सरकारी श्रमिक का वेतन नहीं काटा जाएÓ को नजरंदाज कर स्थानीय शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों ने अपनी ही गाइड लाइन तय कर सैकड़ों शिक्षकों का दो माह का वेतन रोक दिया है।

By: Naresh

Published: 05 May 2020, 07:31 PM IST

शिक्षकों का अटका दो माह का वेतन, कैसे हो परिवार का गुजारा

धौलपुर. कोराना महामारी में जारी लॉकडाउन अब शिक्षकों पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। राज्य सरकार की गाइड लाइन 'जो जहां है, वहीं रहेÓ तथा किसी भी सरकारी गैर सरकारी श्रमिक का वेतन नहीं काटा जाएÓ को नजरंदाज कर स्थानीय शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों ने अपनी ही गाइड लाइन तय कर सैकड़ों शिक्षकों का दो माह का वेतन रोक दिया है। वेतन नहीं मिलने से इन शिक्षक परिवारों के जीवन यापन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। गौरतलब है कि लॉकडाउन शुरू होने से पहले जिले के काफी शिक्षक शिक्षिकाएं रविवार की छुट्टी में अपने गृह जिलों को चले गए। सरकार की ओर से अचानक लॉकडाउन घोषित करने तथा आवागमन के साधन बंद होने की वजह से ये कार्मिक अपने मुख्यालय पर उपस्थित नहीं हो पाए। ऐसे सैकड़ों शिक्षकों का सम्बंधित पीईईओ संस्था प्रधानों की ओर से मार्च व अप्रेल का वेतन भुगतान रोक लिया गया है।
हालांकि शिक्षकों का यह भी कहना है कि शिक्षकों के मुखिया जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक सहित कई पीईईओ महीनों से मुख्यालय से बाहर हैं। स्वयं को वर्क फ्रॉम होम दिखाते हुए अपना मार्च व अप्रेल का वेतन उठा लिया है। शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा अधिकारियों व शिक्षकों पर एक समान विभागीय नियम लागू होते होने चाहिए। ऐसे में वर्क एट होम की परिभाषा अलग अलग नहीं हो सकती है। उनको भी वेतन मिलना चाहिए, ताकि परिवार का जीवन यापन कर सकें।

विभाग के आदेश लॉकडाउन समाप्ति के बाद ही मुख्यालय आएं

प्रदेश के शिक्षा मंत्री एवं निदेशक माध्यमिक शिक्षा ने 12 अप्रेल को जारी आदेश में मुख्यालय से बाहर वाले कार्मिक की संख्या सम्बंधित पीईईओ, सीबीईओ से शाला दर्पण पोर्टल पर अंकित करा ली गई। निदेशक माध्यमिक शिक्षा बीकानेर की ओर से जारी आदेश में साफ निर्देश दिए गए कि ऐसे कार्मिक जो वर्तमान मुख्यालय से बाहर अपने परिवारों के साथ अन्य जिलों में निवास कर रहे हैं। लौटने के लिए लंबी यात्राएं ना करें। लॉकडाउन समाप्ति के पश्चात ही मुख्यालय को प्रस्थान करें। यही नहीं शिक्षामंत्री ने सभी कार्मिकों की वर्तमान मुख्यालय पर जरूरत अनुसार ड्यूटी लगाने को लेकर भी निर्देशित करने की बात कही थी।

इनका कहना है

सरकारी लोक सेवकों के परिवारों का जीवन यापन उसके वेतन पर निर्भर करता है। जिला प्रशासन को ज्ञापन भेजकर ऐसे सभी शिक्षकों का वेतन वर्क फ्रॉम होम के आधार पर भुगतान कराने और यदि उनकी मुख्यालय पर जरूरत है तो वाहन और परमिशन जारी कर उन्हें बुलाने की मांग की गई है। शिक्षा अधिकारियों एवं शिक्षकों पर एक समान सेवा नियम लागू होते हैं। ऐसे में शिक्षा अधिकारियों ने अपना वेतन उठाकर शिक्षकों का वेतन रोक लिया, यह पूरी तरह गलत है। केवल शिक्षकों का वेतन रोकना गलत है।
राजेश शर्मा, जिलाध्यक्ष, राजस्थान शिक्षक एवं पंचायतीराज संघ, धौलपुर।

इनका कहना है

शिक्षकों के मामले में यह पड़ताल की जा रही है कि वे मुख्यालय छोड़कर किसके आदेश पर अपने घरों पर गए थे, या फिर किसी विभागीय कार्य से जाने के बाद फंस गए। इसके अलावा उनके गृह जिले में कोई ड्यूटी या अन्य विभागीय कार्य किया है या नहीं। इसकी जांच के बाद ही वेतन का निर्धारण किया जाएगा।

राकेश कुमार जायसवाल, जिला कलक्टर, धौलपुर

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