scriptWhat happened that the new 400 bed hospital could not start even after | ऐसा क्या हुआ जो उद्घाटन के बाद भी नहीं शुरू हो पाया 400 बेड का नया अस्पताल | Patrika News

ऐसा क्या हुआ जो उद्घाटन के बाद भी नहीं शुरू हो पाया 400 बेड का नया अस्पताल

locationधौलपुरPublished: Dec 11, 2023 06:41:55 pm

Submitted by:

Naresh Lawaniyan

- प्रदेश में नई सरकार आने से इस भवन में जिला अस्पताल के शिफ्ट होने की बंधी उम्मीद

- मेडिकल कॉलेज स्टाफ की भी मिल सकेगी मदद

- जिले के लोगों को आगरा व जयपुर की नहीं करनी होगी भागदौड़

What happened that the new 400 bed hospital could not start even after inauguration?
धौलपुर. प्रदेश में नई सरकार का जल्द खाका खींचने वाला है। उधर, जिले के नागरिकों को भी नई सरकार से स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में कुछ आस बंधी, कि उन्हें मेडिकल कॉलेज व संयुक्त नवीन जिला अस्पताल में मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा, लेकिन यहां इलाज फिलहाल दूर की कौड़ी बना हुआ है। केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से आवंटित राशि से मेडिकल कॉलेज व संयुक्त जिला अस्पताल बनकर खड़ा है।
जिसमेंं मेडिकल कॉलेज पहले ही शुरू हो जाएगा। अब केवल नवीन जिला अस्पताल भवन के शुरू होने की तारीख का लोग इंतजार कर रहे हैं। जिससे जिला सहित आसपास जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सके। लेकिन प्रदेश और केन्द्र की सरकारों में तालमेल नहीं होने से दो साल से नवीन जिला अस्पताल का भवन सफेद हाथी बनकर खड़ा हुआ है। जबकि दोनों भवनों के लिए 320 करोड़ का बजट जारी किया था। दो साल के बाद भी जिला अस्पताल नवीन भवन में शिफ्ट नहीं हो पाया है। जबकि जिले के मरीजों को इलाज के लिए दूसरे जिलों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
शुभारंभ के बाद भी भवन में शिफ्ंिटग नहीं

खास बात ये है कि नया जिला अस्पताल का शुभारंभ होने के बाद भी यह शुरू नहीं हो पाया है। बाड़ी रोड स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज व संयुक्त नवीन जिला अस्पताल का जुलाई 2023 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्चुअल लोकार्पण किया था। लेकिन उस समय यहां मेडिकल कॉलेज तो शुरू हो गया। लेकिन नवीन 400 बेड का जिला अस्पताल नहीं शुरू हो पाया। दो साल से नए अस्पताल का भवन खाली पड़ा हुआ है। जिले के आला अधिकारियों ने भी इसको जल्द शुरू कराने में खास रुचि नहीं दिखाई। नया जिला अस्पताल ग्राउंड फ्लोर सहित चार मंजिला बनाकर तैयार है। केवल शिफ्टिंग का इंतजार है।
जनवरी 2022 में बनकर तैयार, झरने लगा रंग-रोगन

जिले में मेडिकल कॉलेज परिसर में बना नया जिला अस्पताल को संवेदक की ओर से जनवरी 2022 में ही तैयार कर दिया था। जिसके बाद उन्होंने भवन को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को हैण्डओवर करने को कहा था। दो साल से भवन तैयार है। इसमें हुआ रंग-रोगन अब झरने लगा है। पूर्व में केन्द्र और राज्य सरकार के आपसी तालमेल के अभाव में अस्पताल शुरू नहीं हो पाया था। सूत्रों के अनुसार कुछ अधिकारी अपनी कुर्सी बचाने के लिए शिफ्टिंग को लेकर सुस्ती दिखा रहे हैं। इस वजह से नवीन अस्पताल भवन सफेद हाथी बनकर रह गया है। जिनके लिए बनाया, उन्हें इसका फिलहाल कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।
कक्ष के बाहर चिकित्सक का नाम और समय लिखा होगा

नवीन जिला अस्पताल को शुरू होने के बाद पहुंचने वाले मरीजों को कोई परेशानी न हो। इसके लिए अस्पताल में सभी चिकित्सकों के कक्ष के बाहर उनका नाम और समय व विभाग की नेम प्लेट लगी होगी। जिससे मरीज अपनी बीमारी को आराम से दिखा सके। इससे पूर्व संभाग मुख्यालय पर नवीन अस्पताल भवन शुरू हो चुका है। यहां मेडिकल कॉलेज से मरीजों को काफी मदद मिल रही है।
रेडियोलॉजी विभाग में होगी 9 मशीनें

नवीन जिला अस्पताल में मरीजों को जांच कराने में कोई परेशानी न हो इसके लिए इसमें एक ही कक्ष में रेडियालॉजी विभाग को शामिल किया गया हैं। इसके साथ ही इसमें एक्स-रे जांच, सोनोग्राफी जांच, ईसीजी सहित अन्य मशीने लगाई गई है। जिसमें एक ही हाल कक्ष में 9 मशीनों को लगाया गया हैं।
नवीन जिला अस्पताल में हर फ्लोर पर सुविधा

लोअर ग्राउंड फ्लोर: लॉन्ड्री (कपड़ा धोने का) स्टोर, मोर्चरी, फार्मेसी, विद्युत शाखा आदि।

ग्राउंड फ्लोर: जनरल मेडिसीन, पंजीकरण काउंटर, इमरजेंसी, रेडियोलॉजी विभाग व स्टाफ, आर्थोपेडिक ओपीडी, कैंटीन आदि।
प्रथम तल: नेत्र रोग ओपीडी, जनरल सर्जरी, दंत ओपीडी, ईएनटी ओपीडी, ब्लड बैंक, सेंटल लैब, अभिलेख कक्ष आदि।

द्वितीय तल: जनरल वार्ड, सर्जरी वार्ड, ईएनटी वार्ड आदि।

तृतीय तल: जनरल सर्जरी वार्ड, ऑपरेशन थियेटर, गहन चिकित्सा इकाई, आंखों का वार्ड आदि।
चतुर्थ तल: हड्डी वार्ड व रिकार्ड कक्ष आदि।

राजकीय मेडिकल कॉलेज व संयुक्त अस्पताल का लोकापर्ण पूर्व में हो चुका है। लेकिन नए अस्पताल भवन में सामान नहीं पहुंचा है। जिसके लिए राजमेस को पत्र भी लिखा जा चुका है। उच्च प्रशासन को इसको लेकर व्यवस्था करनी चाहिए। जिससे मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।
- डॉ.श्रीकांत असावा, प्राचार्य एवं नियंत्रक मेडिकल कॉलेज धौलपुर

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