62 लाख खर्च, गड्ढों में तब्दील हुई सड़क, भरा बारिश का पानी

पीएमजीएसवाई की सड़क का बुरा हाल
नजर नहीं आती सड़क, लोगों का चलना हुआ मुश्किल
जगह-जगह उखड़ी सड़क, आए दिन हो रही दुर्घटना

By: ayazuddin siddiqui

Published: 06 Jul 2020, 07:07 PM IST

डिंडोरी/करंजिया. जिले के विकास के लिए न सिर्फ बड़ी मात्रा में पैसा खर्च किया गया है बल्कि विकास में कोताही न हो इसके चलते बड़ा शासकीय अमला यहां पदस्थ किया गया है। यहां तक की डिंडोरी को जिला बना कर सभी शासकीय विभागों और एजेंसियों के कार्यालय भी प्रारंभ किए गए है। इसके बाद भी क्षेत्र के विकास की रफ्तार नहीं बढ़ पाई। आज भी कहीं कहीं हालात जस के तस बने हुए है। शासकीय एजेंसियां जमकर शोषण करने में लगी हुई है। कुछ ऐसी ही स्थिति करंजिया विकासखंड के गोपालपुर कस्बे से 12 किमी की दूरी पर छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे ग्राम खारीडीह की है। इस वनग्राम को जिले से जोडऩे के लिए मुख्य रास्ता गोपालपुर होकर ही गुजरता है। वर्षों से यहां के निवासी कीचड़ और पत्थरों से होकर पैदल यात्रा करते रहे है। यहां वर्ष 2012 में प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत सड़क का निर्माण किया गया जो कि ठेकेदार की मनमानी और निर्माण एजेंसी के अधिकारियों की लापरवाही के कारण कुछ ही दिनों में दम तोड चुकी है। अभी बरसात की शुरुआत ही हुई है और सड़क के गड्ढे नदी में इस कदर तब्दील हो चुके है कि सड़क को देखना मुमकिन नहीं लगता। ऐसे में इस पर वाहन कैसे और कहां चलाया जाए ये समझना बहुत कठिन है।
लाखों रुपए किए खर्च
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 62 लाख 32 हजार रुपए की अनुमानित लागत से 6 किमी सड़क का निर्माण कार्य ठेकेदार द्वारा 12 दिसम्बर 2012 में प्रारंभ किया गया। जिसकी कार्य पूर्णता की अवधि वर्ष 2011 थी। इस मार्ग का आगामी पांच साल तक रखरखाव ठेकेदार को करना था। जिसके लिए 26 लाख 68 हजार रूपए की राशि का प्रावधान योजना में था। निर्माण स्थल पर लगे बोर्ड में वर्ष 2017 में कार्य पूर्ण होने का उल्लेख किया गया है। किन्तु इन पांच वर्षों में सड़क का न तो कोई रखरखाव हुआ न ही विभाग इसका अस्तित्व बचा पाया और ग्रामीण विकास विभाग की लगभग एक करोड़ रुपयों की राशि ग्रामीण सड़क योजना के माध्यम से खर्च कर के बनाई गई इस छह किमी सड़क पर इस आदिवासी अंचल के ग्रामीण रहवासी सड़क का अस्तित्व खोज रहे है।
गुणवत्ता के साथ समझौता
इस मार्ग निर्माण की गुणवत्ता में की गई गड़बड़ी और संबंधित एजेंसी की लापरवाही का अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि इस मार्ग पर जब बड़े वाहनों की बहुत कम आवाजाही है तब भी यह सड़क इतनी जर्जर हो गई कि लोगों का पैदल चलना भी मुनासिब नहीं है। ग्रामवासी बताते है की इस मार्ग की यह दशा पिछले दो सालों से ऐसी ही है। इस बीच इस सड़क से न जाने कितने अधिकारी और विधायक मंत्री सब गुजर चुके है किन्तु किसी ने इस बात की सुध नहीं ली। बनने के कुछ ही समय बाद सड़क पूरी तरह से खराब होने लगी थी जिसको ढकने की कोशिश बतौर मरम्मत भी की गई किन्तु उसके बाद भी ये सड़क ज्यादा दिन तक नहीं टिक पाई। अब तो इस पर पैदल निकलना भी मुश्किल है। रात में इस सड़क पर वाहन चलाना दुर्घटना को आमंत्रण देना है जबकि अभी बरसात की पूरी तरह शुरुआत भी नहीं हुई है।

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