मधुमक्खिी पालन से किसानों कीे होगी अतिरिक्त आय

30 किसानों को किया गया प्रशिक्षित, दिए गए बाक्स

By: Rajkumar yadav

Published: 27 Nov 2019, 09:52 AM IST

डिंडोरी. आत्मा परियोजना संचालक पी डी सराठे डिंडोरी के द्वारा जिले के 30 किसानों को मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण कृषि विज्ञान केंद्र डिंडोरी में दिया गया। यह प्रशिक्षण प्रैक्टिकल रूप से दिया गया। इसमें मधुमक्खी पालन के लिए भी किसानों को बॉक्स उपलब्ध कराए गए। किसानों को मधुमक्खी पालन से अतिरिक्त आय हो सकेगी एक तो किसान मधुमक्खी पालन से अच्छे किस्म का शहद उत्पादन कर पाएंगे उसे अतिरिक्त आय होगी इसके अलावा किसानों को उनकी फसल की पैदावार भी ज्यादा मिलेगी। मधुमक्खी पालन से फसलों की पैदावार ज्यादा होती है क्योंकि मधुमक्खियां परागकण को स्थानांतरित करती हैं क्रास पॉलिनेशन होने से फसलों का उत्पादन बढ़ता है। प्रशिक्षण के लिए जिले कि 6 विकासखंड डिंडोरी अमरपुर समनापुर मेहंदवानी शाहपुरा एवं करनजिया के किसानों को चयनित किया गया। जिसमें प्रत्येक विकासखंड से 5 किसानों का चयन किया गया है यह किसान राम तिल, सरसों, यूकेलिप्टस जैसी फसलों से अच्छी किस्म का शहद उत्पादन कर सकेंगे। किसानों को एवं बीटीएम एटीएम तथा वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों को भी प्रशिक्षणकर्ताओं द्वारा प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें सभी को बताया गया मधुमक्खियों का जीवन बहुत अनुशासित होता है एक बॉक्स में एक ही मादा मधुमक्खी रहती है दूसरे सैनिक होते हैं तथा मजदूर होते हैं मजदूर फसलों पर जाकर शहद एकत्रित करते हैं। यह अपने स्थान से 3 किलोमीटर की परिधि में जाकर अपने बॉक्स में सायंकाल वापस आ जाते हैं।मधुमक्खियों को ततैया तथा चीटियों से नुकसान होता है। इसको इससे कैसे बचा जा सकता है इन प्रश्नों को भलीभांति बताया गया। मधुमक्खी के बॉक्स अभी किस स्थान पर रखना है कैसे रखना है क्या करना है क्या नहीं करना है यह सब किसानों को प्रायोगिक रूप से प्रशिक्षण दिया गया। अब जिले के किसान अपना स्वयं का व्यवसाय अपनाकर खेती के साथ साथ समन्वित कृषि के रूप में अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकेंगे। परियोजना संचालक आत्मा पी डी सराठे द्वारा भी किसानों को प्रशिक्षण दिया गया । उनसे चर्चा की गई उनकी समस्याओं का निराकरण किया गया। मधुमक्खी के बाक्स किसानों के निवास तक पहुंचाए जाएंगे मधुमक्खियों का परिवहन सिर्फ रात्रि के समय किया जा सकता है। दिन के समय इनको स्थानांतरित करने से मधुमक्खियां मर सकती हैं। गर्मी के दिनों में जब खेतों में फसलें नहीं होती हैं उस समय मधुमक्खियों के पोषण की व्यवस्था अतिरिक्त की जाती है। उन्हें शक्कर का घोल उपलब्ध कराया जाता है ताकि वह अपना जीवन बचा सकें। अगले वर्ष तक किसान अपना स्वयं के बॉक्स लगाकर इस व्यवसाय को और अधिक मात्रा में बढ़ा सकेंगे। रुचि तेकाम उप परियोजना संचालक आत्मा द्वारा समन्वय का कार्य किया गया और उनके प्रशिक्षण की पूरी व्यवस्थाएं की गई। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा भली.भांति प्रशिक्षण दिया गया।

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