अक्षय तृतीया के लिए सजे बाजार, साप्ताहिक बाजारों में हुई जमकर खरीदी

अक्षय तृतीया के लिए सजे बाजार, साप्ताहिक बाजारों में हुई जमकर खरीदी

shivmangal singh | Publish: Apr, 17 2018 05:51:06 PM (IST) Dindori, Madhya Pradesh, India

वैवाहिक आयोजन के लिये बर्तन व कपड़े की मांग ज्यादा

गोरखपुर। करंजिया विकासखंड के अंतर्गत कस्बा गोरखपुर में सोमवार को सप्ताहिक बाजार में लोगों ने स्वयं सिद्ध मुहूर्त अक्षय तृतीया के दिन मांगलिक कार्य लग्न शादी के लिये जमकर खरीदी की। इस बार 18 अपै्रल बुधवार को अक्षय तृतीया है। अक्षय तृतीया बैसाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं उनका अच्छा फल मिलता है। अक्षय तृतीया को ही भगवान परशुुराम का जन्मोत्सव भी मनाते हैं, इसलिये इसे परशुुराम तीज भी कहा जाता है। सोमवार को गोरखपुर कस्बा के साप्ताहिक बाजार में स्थानीय व दूर दराज से आये लोगों ने अक्षय तृतीया के दिन होने वाली शादी विवाह के लिये सोने चांदी के गहने, कपड़े, बर्तन लकड़ी से बने फॅर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामग्री की जमकर खरीदी की। बताया गया कि अक्षय तृतीया के दिन भले ही शादी-विवाह मांगलिक कार्य का मुहूर्त न हो पर इस शुभ मुहूर्त पर बड़ी संख्या में शादी विवाह रचाई जाती है। इस दिन गुड्डे गुडिय़ा की शादी करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन विवाह करने वालों का सौभाग्य अखंड रहता है। कस्बा के कपड़ा व्यवसायी लखन साहू ने बताया कि सभी प्रकार के कपड़ों के साथ नये फैंसी वस्त्रों की भी खरीददारी कर ली गई है। फर्नीचर के व्यापारी दिलीप ताम्रकार ने बताया कि बर्तन व्यवसाय विवाह आयोजन के चलते अच्छा चल रहा है। बड़ी संख्या में स्थानीय व ग्रामीण क्षेत्रों से लोग बर्तन खरीदने पहुंच रहे हैं मंहगाई बढऩे के बाद भी बर्तनों की मांग ज्यादा है। सोमवार को गोरखपुर कस्बे के साप्ताहिक बाजार में देर रात तक चहल पहल बरकरार रही।सराफा बाजार में लोग सोने चांदी के आभूषण खरीदते व आर्डर देते नजर आये। गारमेंटस के कन्हैया साहू ने बताया कि दुकानों पर ग्राहकों की सुविधा के लिये भुगतान के साथ ही इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से खरीददारी के बाद भुगतान की व्यवस्था की गई है।
श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
गोरखपुर। करंजिया विकासखंड के अंतर्गत कस्बा गोरखपुर में सोमवार को सोमवती अमावस्या पर कस्बे से तीन किलोमीटर दूर नर्मदा सिवनी नदी संगम तट पर स्थानीय व आसपास के सैकड़ों लोगों ने प्रात: चार बजे से 11 बजे दिन तक स्नान कर पूर्ण लाभ कमाया। स्नान के पश्चात श्रद्धालुओं ने दरिद्र नारायणों को यथाशक्ति दान देने का कार्य भी किया। पंडित महेश महराज ने बताया कि 16 अप्रैल सोमवार को सोमवती अमावस्या पर दस साल बाद खास योग बने हैं। इससे पहले 5 मई 2008 के बैसाख में सोमवती अमावस्या आई थी।

Ad Block is Banned