जर्जर भवन का प्लास्टर गिरने से कुकर फटा, अध्यक्ष व तीन रसोइया घायल

जर्जर भवन का प्लास्टर गिरने से कुकर फटा, अध्यक्ष व तीन रसोइया घायल
Cooker cracked, president and three cooks injured by falling plaster o

Rajkumar Yadav | Publish: Jul, 11 2019 10:48:53 AM (IST) Dindori, Dindori, Madhya Pradesh, India

मध्यान्ह भोजन पकाते समय हुआ हादसा

डिंडोरी. विद्यालय में मध्यान्ह भोजन पका रही रसोइया हादसे का शिकार हो गई। दरासल जर्जर भवन होने की वजह से प्लास्टर कुकर में जा गिरा। जिसके चलते कुकर फट गया। इस हादसे में समीप बैठी स्वसहायता समूह अध्यक्ष व तीन रसोइया गंभीर रूप से घायल हो गई। जिन्हे इलाज के लिए स्थानीय स्वास्थ केन्द्र में भर्ती कराया गया है। हादसे में एक रसोइया को गंभीर चोंट आई है। घटना बुधवार को जनपद पंचायत अमरपुर की ग्राम पंचातय किसलपुरी में संचालित माध्यमिक शाला की बताई जा रही है। गनीमत थी कि मौके में कोई छात्र मौजूद नहीं थे अन्यथा वह भी इसकी चपेट में आ जाते। जानकारी के अनुसार जनपद पंचायत अमरपुर के ग्राम पंचायत किसलपुरी में माध्यमिक शाला में उस समय हडकंप की स्थिती निर्मित हो गई जब रसोईया मध्यान भोजन पका रहे थे तभी जर्जर किचिन की छत से प्लास्टर कुकर के ऊपर गिर गया जिससे कुकर फट गया और मध्यान भोजन पका रही तीन रसोईया घायल हो गई। मामले में बताया गया कि माध्यमिक शाला किसलपुरी के किचिन का जर्जर छत का टुकड़ा कुकर के ऊपर गिरा जिससे कुकर ब्लास्ट हो गया और घटना में अध्यक्ष सरोज तिवारी, रसोइया यशोदा वर्मन, चमेली बाई, लता बनबासी को चोंट आई है। घटना के बाद सभी घायलो को ग्राम के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में उपचार के लिए ले जाया गया। घटना में यशोदा बर्मन जो कुकर के कॉफी करीब थी उसे ज्यादा चोंट आई है। जिसका इलाज चल रहा है।
जिम्मेदार कौन
उक्त घटना के बाद सबसे अहम सवाल यह उठता है कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार कौन है। स्कूल प्रबंधन या फिर शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी जो कि विद्यालयों व वहां के भवनों की स्थिति से वाकिफ होने के बाद भी उसे नजर अंदाज कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि मध्यान्ह भोजन पकाने के लिए विद्यालयों में किचन शेड का निर्माण कराया जाना था। बताया जा रहा है कि जिले के कई ऐसे विद्यालय हैं जहां किचन शेड का निर्माण नहीं हुआ है और समूह द्वारा जर्जर भवन में ही एमडीएम पकाया जा रहा है।
स्कूल भवन भी जर्जर
जिले में ऐसे कई विद्यालय हैं जहां न तो किचन शेड हैं और न ही विद्यालय भवन। विद्यालयों में पढऩे वाले छात्र जर्जर भवन में बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इस बरसात में कब कौन सा भवन ढ़ह जाए कहा नहीं जा सकता है। कहीं की छत टपक रही है तो कहीं का प्लास्टर उखड़ रहा है। इसके बाद भी विभागीय अमला चुप्पी साधे हुए हैं।
यह कैसी तैयारी
नए शिक्षा सत्र प्रारंभ होने के पूर्व ही यह निर्देश जारी किए गए थे कि स्कूल भवनों को व्यवस्थित कर लिया जाए। रंग रोगन के साथ ही जर्जर भवनों के मरम्मतीकरण के साथ ही अन्य व्यवस्थाएं सुदृढ़ कर दी जाए। इसके बाद भी इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। जिसका ही परिणाम है कि ऐसी स्थितियां निर्मित हो रही हैं।

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