पाला से बर्बाद हुई किसानों की फसल, सर्वे की मांग

बीज की लागत भी नहीं निकलने से किसान परेशान

By: ayazuddin siddiqui

Published: 05 Feb 2021, 06:29 PM IST

डिंडोरी/गोरखपुर. विकासखंड करंजिया अंतर्गत गोरखपुर कस्बा समेत आसपास के क्षेत्रों में गत दिवस हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बीच बर्फ बनकर जमी ओंस की बूंदों से फसलें झुलस गई हैं। पाला ने फसलों को काफी प्रभावित किया हैं। गुरुवार को क्षेत्र के दर्जनों किसानों ने अपना दु:ख व्यक्त करते हुए बताया कि दो दिन की धूप लगने के बाद गेहूं को छोड़कर अन्य सभी फसलों में स्पष्ट रूप से नुकसान दिखने लगा हैं । ऐसे आलम में फसलें बर्बाद होने से किसान परेशान हो रहे हैं। क्षेत्र के किसानों ने एक स्वर में अपनी आवाज को बुलंद करतें हुए इस संकट से उबारने के लिए जिला प्रशासन से गुहार लगाई हैं। उनका कहना था कि महामारी के दंश से वे अभी उबर भी नहीं पाए हैं और ऊपर से इस प्राकृतिक आपदा ने उनकी कमर तोड़ दी हैं। ऐसी स्थिति में शासन प्रशासन ही एकमात्र सहारा हैं। प्रशासन पाला से प्रभावित फसलों का सर्वे कराकर राहत राशि प्रदान करें ताकि किसान पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
बीज वापसी की उम्मीद नहीं
भुर्रीटोला के किसान समरु लाल जंगरिया ने दु:खी मन से बताया कि उसने 6एकड़ की कृषि भूमि पर मसूर की फसल के उत्पादन के लिए बोवनी किया था। फसल की स्थिति को देखकर किसान खुश थे कि इस बार मसूर के फसल की अच्छी पैदावार होगी लेकिन हाल ही के दिन में कड़ाके ठंड के बीच फसलों पर पड़े पाला ने अरमान पर पानी फेर दिया हैं पूरे पौधे झुलसकर सूख गएं हैं। बीज वापसी की भी उम्मीद नहीं हैं। फसल की दुर्दशा होने के बाद से वह अब खेत की ओर जाना बंद कर दिया हैं ।सेला सिंह नेताम ने बताया कि 5एकड़ की खेत में चना मसूर और बटरी की फसल बोया था। पाला से फसल तबाह हो चुकी हैं। चेतराम मांझी ने बताया कि उसने 3एकड़ की जमीन में बटरी चना अरहर की फसल लगाई थी। चना और अरहर की फसल में फलियां लग चुकी थी। पाला लगने के बाद फलियों के अंदर के दाने सूख रहें हैं। किसानों ने बताया कि पाला के कारण वर्तमान में फल एवं फूलों में आई फसल अधिक प्रभावित हुई हैं। पाला से फसलों के नुकसान की आशंका बढ़ गई हैं । क्योंकि चना एवं मसूर की फसल के पौधे उखडऩे लगें हैं । मसूर झुलस गई है और बटरी व मटर के पौधों के फूल झड़ गए हैं। फल्लियां भी सूखकर मुरझा गए हैं। अब फसलों में न तो दाने बनेंगे और न ही फूल।
उत्पादन पर असर
माधोपुर के किसान मंगल मरावी ने बताया कि गेहूं की फसल भी जो तैयार हो रही थी। उस पर भी पाला का काफी असर नजर आ रहा हैं। पाला की मार से गेहूं की फसल बेजान होकर झुकने लगी हैं। बालियों में दाने विकसित नहीं होंगे और जो फसल जैसे तैसे आ भी जाती हैं तो दानों में चमक नहीं रहेगी। वैसे भी शीतकालीन वर्षा नहीं होने से फसल की स्थिति उतनी मजबूत नहीं थी उस पर ये पाला अन्नदाताओं पर दोहरी मार पड़ी हैं जिसका सीधा असर फसलों के उत्पादन पर पड़ेगा ।
किसानों ने की सर्वे कराने की मांग
प्राकृतिक आपदा की मार लगातार झेल रहे किसान दीपक सिंह तेकाम गोरखपुरए प्रेम सिंह तेकाम, बहादुर सिंह मसराम, तिहारी सिंह, पवरू सिंह, सुमन बाइर्, मतवार यादव, मूसामुंडी, छोटी बाई धुर्वे समेत अन्य गांवों के अ अन्नदाताओं द्वारा शासन प्रशासन से सर्वे कराने की मांग की है। मौसम की मार झेल रहे किसानों का कहना है कि लंबे समय से प्राकतिक आपदा के चलते फसलों का अच्छा उत्पादन क्षेत्र में नहीं हो पा रहा हैं। प्रतिवर्ष एन मौके पर रबी की फसल पर प्राकृतिक आपदा की मार आ जाती हैं जिसके चलते किसानों की आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही हैं। वर्तमान स्थिति को देखते हुए सर्वे कराकर मुआवजा किसानों को दिया जाना चाहिए जिससे खेती के प्रति उनका विश्वास बना रहे। किसानों का कहना है कि सत्ता व सरकारी तंत्र से ही उम्मीद बची हैं। दिन रात मेहनत कर उन्होंने फसलों की देखरेख की थी। समय पर बीज बोया था। पानी लगाया था और खाद समेत कीटनाशक का छिडकाव भी किया था। पाला ने उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया हैं।
सब्जी व फलदार पेडों को भी नुकसान
किसानों ने बताया कि दलहनी फसलों के साथ टमाटर, बैंगन, मिर्च, गोभी, पालक, मेथी समेत फलदार पेड़ आम, पपीता को भी पाला से नुकसान पहुंचा हैं। अमरूद के पत्ते सूखने लगे हैं और पपीता के पत्ते भी सुखकर गिर गए हैं। गोभी के पत्ते भूरे रंग के होकर सुखने लगें हैं। गोभी से चमक गायब हो गई हैं।

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