पानी के लिए रात तीन बजे से लगा रहे लाईन

पानी के लिए रात तीन बजे से लगा रहे लाईन
Line for water at three o'clock

Rajkumar Yadav | Updated: 04 Jun 2019, 10:44:41 AM (IST) Dindori, Dindori, Madhya Pradesh, India

बिठलदेह पंचायत के गांव रहटापकरी का मामला
कुआं का कीचड़ युक्त पानी पीना ग्रामीणों की मजबूरी बंद पड़े हैंडपप

डिंडोरी/गोरखपुर। करंजिया विकासखंड के अंतर्गत ग्राम बिठलदेह के गांव रहटा पकरी के लिये हजार की आबादी वाले लगभग एक सौ पचास परिवार के लोगों के सामने पेयजल प्रमुख समस्या बन रही है। आलम यह है कि गांव के हैंडपंप बंद पड़े है और जो कुआं का पानी है वो भी मटमैला कीचड़ वाला हैैं जिसे लोग मजबूरी में पी रह है। निस्तार व मवेशियों को पानी पिलाने लगभग एक किमी दूर नदी जाना पड़ रहा है। और इतना ही नही पर्याप्त पानी न मिलने के कारण लोग तीन से चार दिन में एक ही बार नहा रहे है।
ये है गांव के वर्तमान हालात
गांव के बैरागी धुर्वे, देवसिह मरावी, शकुंतला धुर्वे, इंद्रा मरावी, सुखतिया मरावी ने बताया कि वैसे तो गांव के अंदर 6 हैंडपंप है परंतु तीन पूरे तौर पर बंद पड़े हैं बचे तीन में एक हैंडपंप प्रायमरी स्कूल के पास वाला लगातार पानी निकालने में सक्षम नही है। शेेष दो हेंडपंप से यदि ज्यादा पानी निकाला जाता है तो कुछ समय बाद पानी का रंग लाल हो जाता है। तीन कुआं तो है लेकिन बराबर पानी देने में मात्र एक ही कुआं है जिस पर गांव की आधी आबादी निर्भर है। एक कुआं तो लगभग सूखने के कगार पर पहुंच चुका है। जबकि ग्रामीणों ने मिलकर इस कुंऐ की साफ सफाई कराकर इसके पानी को पीने लायक बनाया था मगर इसका पानी मटमैला होकर कीचड़ युक्त है जिसे पीने के बाद गले में खराश, सर्दी खासी जैसे लक्षण सामने नजर आ रहे है। यदि इस कुआं से भी लगातार पानी निकाला जाता है तो इसका जलस्तर कम हो जाता है। फिर घंटो रूकने के बाद जब इसमें पानी ऊपर आता है। तब दोबारा लोग मुश्किल से गिनी चुनी बाल्टी ही पानी निकाल पाते है।
स्नान करने के लिये नहीं मिलता पानी
ग्रामण बुधराम मरावी, चेतेश्वर धुर्वे, महर सिंह पेन्द्रो, अशोक मरावी जब्बार अली , बिल्सा धुर्वे, प्रेमलता मरावी, गायत्री मरावी, मेनजी मरावी, बेला बाई, सुनीता मरावी, फूलबती मरावी ने बताया कि गांव के अंदर जो पेयजल के साधन है उनसे ग्रामवासियों को इतना पानी नही मिल पाता कि ग्रामीण रोजाना स्नान कर सके। क्योकि कुंओं का कम होता जलस्तर बंद होते हेंडपंप के चलते लोग जो शेेष मात्र जलस्त्रोत है। इनसे सिर्फ पीने का पानी ही लेते है ऐसे स्थिति में दो तीन दिन में एक बार स्नान किया जाता है। इन्होने बताया कि चिलचिलाती धूप दूसरे नौतपा में पानी की अधिक आवश्कता पड़ रही है। जिसका इंतजाम बड़ी मुश्किल से हो पा रहा है। स्थानीय लोगों की आहट रात तीन बजे से जलस्त्रोत के आसपास सुनाई देने लगती है। अनेको बार अपनी बारी के पानी भरने को लेकर आपस में विवाद की स्थिति बनती है। क्या करे पानी तो सभी को चाहिये सबसे ज्यादा फजीहत गांव के मवेशियों की है। इन्हें अपनी प्यास बुझाने गांव से एक किमी दूर बह रहे नाले में जाना पड़ता है। गांव के रहवासी भी अपनी दूसरे अन्य जरूरतो एवं निस्तार के लिये नदी तक चलकर आते है।
जवाबदार की अनेदेखी
बताया गया कि रहटा पकरी गांव में पेयजल की स्थिति विकराल बन रही है और इसमें सबसे दुखमयी यह है कि प्रशासन के संसाधन बौने साबित हो रहे है। पेयजल स्त्रोत साथ छोड़ रहे है। यही कारण है कि ग्रामीण पेयजल के लिये गुंडी बर्तन लेकर जलस्त्रोत तक पहुंचते तो है परंतु जलस्त्रोत के सरकने से ये मायूस होकर खाली बर्तन लेकर वापस हो जाते है। ग्रामीणों की माने तो इस समस्या से जवाबदार भली भांति परिचित है। लेकिन इसके निराकरण का प्रयास अब तक नही किया गया। इसलिये गांव में पानी के लिये लोग यहां वहां भटकते रहते है। हैंडपंप से पर्याप्त मात्रा में जलापूर्ति नही हो पा रही है कुछ स्थानों पर दूषित पानी निकल रहा है। कुंओं का जलस्तर नीचे चले जाने से वहां का पानी पानी भी दूषित हो गया है। फिर भी मजबूरी में लोग में लोग दूषित पानी का उपयोग कर रहे है और जवाबदार अंजान बने बैठे है।
—गांव के अंदर पेयजल की समस्या तो है जलस्तर नीचे सरक जाने के कारण ऐसी स्थिति बन रही है। जो बंद पड़े हेंडपंप है उनकी जानकारी विभाग को दी जाऐगी ताकि शीघ्र मरम्मत कार्य हो। टेंकर के द्वारा भी पानी गांव में भेजने की व्यवस्था की जाऐगी।
प्रीतम परस्ते सरपंच बिठ्ठलदेह

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