स्वच्छ भारत अभियान से बने सुविधाघरों की एक साल में मर्यादा हुई भंग

स्वच्छ भारत अभियान से बने सुविधाघरों की एक साल में मर्यादा हुई भंग
Sanjeev Bharat Abhiyan made facilities for a year

Rajkumar Yadav | Updated: 20 Jun 2019, 10:03:14 AM (IST) Dindori, Dindori, Madhya Pradesh, India

किसी पर छत नही कहीं दरवाजे टूटे, तो कही सीट नही बची उपयोग के काबिल
गुणवत्ताहीन कराया गया निर्माण कार्य

गोरखपुर। करंजिया विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंडरीपानी के गांव बर्थना में एक साल पूर्व स्वच्छ भारत अभियान के तहत निर्माण कराए गये। सुविधाघर निर्माण होने के बाद भी उपयोग होने की स्थिति में नही हैै। वर्तमान में गांव में बने सुविधाघर के वास्तविक स्थिति यह है कि किसी सुविधाघर की छत नही है, किसी के दरवाजे टूटे पड़े हैं तो कही की सीट उपयोग के लायक नही है इतना ही नही सुविधाघर को इतना छोटा और घटिया बना दिया गया है कि हितग्राही इसका उपयोग नही कर पा रहे है और शौचालय के निर्माण के बाद भी खुले में शौच को जाने मजबूर है। उल्लेखनीय है कि इन दिनों स्वच्छ भारत अभियान को लेकर केन्द्र से लेकर राज्य सरकार तक सक्रिय है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी घर घर सुविधाघर बनाकर गांवों को भी खुले मे शौच मुक्त करने के लिये जद्दोजहद जारी है। जहां सरकार हितग्राही के खाते में सुविधाघर बनाने के लिये बारह हजार रूपये का प्रोत्साहन राशि दे रही है वहीं जिम्मेदार की उदासीनता, मिली भगत के चलते कम राशि में घटिया स्तर के शौचालय निर्माण करा दिया गया है।
ठेकेदार ने बनाया है
बर्थना गांव के ग्रामीण सेमलाल ने जानकारी देते हुये बताया है कि पास के गांव नहरखुरी का रहने वाला ठेकेदार बुधराम ने गांव के अंदर शौचालय का निर्माण कराया है पिछले वर्ष ही बनी है। हालांकि राशि उसके खाते में ही आई थी लेकिन उसने उस राशि का पैसा दो अलग अलग लोगों को दिया है। वहीं जब इस विषय में पंचायत के सरपंच से चर्चा की गई तो उन्होने स्वयं और ठेकेदार का बचाव करते हुये कहा कि गांव के शौचालय का निर्माण स्वयं हितग्राही ने करवाया है। जब सुविधाघर की जमीनी हकीकत देखने के लिये हितग्राही के घर पहुंचे तो यहां सुविधाघर बदत्तर स्थिति मिले, कुछ स्थानों पर तो इतना छोटा सुविधाघर बनाया गया है कि बाहर से देखने पर लगता है कि मुर्गी का ढड़बा है एक स्थान पर बिल्कुल सड़क से सटाकर निर्माण करा दिया गया है। एक सुविधाघर की छत ही नही है। कहीं फर्श उखड़ गये है किसी के दीवार में दरार आ गई है तो कहीं प्लास्टर उखड़ रहा है। कहीं तो लगता है कि पैर रखते ही सुविधाघर की सीट जमीन में धस जाएगी कुल मिलाकर ठेकेदार द्वारा बनाए गये सुविधाघर हितग्राहियों के लिये अनुपयोगी साबित हो रहे है। सुविधाघर के निर्माण में भरपूर सामग्री का उपयोग न करते हुये गुणवत्ता को ताक पर रखकर कार्य किया गया है।
बारिश के मौसम में होगी परेशानी
ग्रामीणों की माने तो गांव के अंदर सुविधाघर का निर्माण होता देख वो सब मन ही मन बहुत खुश हो रहे थे कि अब खुले में शौच के लिये नही जाना पड़ेगा। क्योकि गांव की बसाहट चारों ओर जंगल से घिरा है ऐसे में यदि रात के अंधेरे में सुविधाघर के लिये जाना पड़ता था तो जंगल झाड़ी में जंगली जानवर सहित अन्य जीव जन्तुओं का खतरा बना रहता था। उससे छुटकारा मिलेगा लेकिन उन की खुशी कुछ माह के लिये ही थी जर्जर हो चुके सुविधाघर के कारण मजबूरन उन्हे खुले में शौच जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया है कि अभी बरसात के मौसम में गंाव देहात में बाहर खुले में शौच के लिये जाना परेशानी के साथ साथ खतरनाक होता है इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों मे सर्पदंश की ज्यादा घटना घटती है। अन्य दिक्कतों के चलते भी लंबी दूरी तय कर निर्जन इलाकों की खोज करनी पड़ती है। अथवा सूनसान इलाकों का रूख करना पड़ता है जो काफी खतरनाक है।
जिम्मेदारों की भूमिका पर उठ रहे सवाल
पंचायत स्तर पर पर होने वाले निर्माण कार्य चाहे वो सरकारी हो अथवा हितग्राही मूलक बेहतर और गुणवत्ता पूर्वक हो इसकी पूरी पूरी जवाबदारी स्थानीय पंचायत के सरपंच सचिव रोजगार सहायक की होती है ये अपने जवाबदारी और देखरेख की भूमिका से मुकर नही सकते। लेकिन बर्थना गंाव के घटिया सुविधाघर निर्माण में सरपंच ने सारा दोष हितग्राही के ऊपर ही मढ दिया गया है। जबकि यह गांव मध्यप्रदेश छत्तीसगढ की सीमा से कुछ दूरी पर बसा वनग्राम बैगा बाहुल्य है। जहां के लोग भोले भाले होने के साथ साथ अशिक्षित और जानकार नही है। ऊपर बैठे जवाबदार भी नीचे स्तर से भेजे गये कागजी जानकारी को सही मान लेते है कभी ये जमीनी हकीकत जानने का प्रयास भी नही करते जानकारी होने के बाद भी जिम्मेदार पदाधिकारी पर ठोस कार्यवाही नही करते यही कारण है कि गंाव के दर्जनों परिवार बड़े बूढे महिलाएं, बच्चे जवान सभी एक अदद साफ सुथरे सुविधाघर को मोहताज है पूरे पंडरीपानी पंचायत में बने सुविधाघर की स्थिति ऐसी ही है। सुविधाघर जमीदोज होने की स्थिति में पहुंच रहे है। गांव को कागजों मे ही खुले में शौच मुक्त घोषित करते हुये जनपद व पंचायत के पदाधिकारी प्र्रमाण पत्र लेने से चूक नही रहे है।
गैर जिम्मेदार बयान
पंयायत के सरपंच ने गैर जिम्मेदाराना बयान देते हुये पहले हितग्राही के द्वारा स्वयं निर्माण कराने की बात कहते है जब ठेकेदार का नाम आता है तो गुडफैथ में परिवार वालों का सुविधाघर निर्माण ठेकेदार करवाया है ऐसा खुद कहते है।
- पंचायत की जवाबदारी देखरेख की बनती है हमने हितग्राही को सुझाव दिया था कि अच्छे किस्म की सामग्री का उपयोग करें। हितग्राही किसे पैसे दिया कौन लिया हितग्राही समझे पानी की समस्या के कारण तराई सही ढंग से नही किया है।
सरपंच सुखलाल धुर्वे पंडरीपानी

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