टूरिज्म के क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

डिंडोरी के विकास को लेकर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मिले युवा एडवोकेट
पर्यटन को लेकर पत्रिका द्वारा प्रकाशित खबरों का भी दिया हवाला
एडवोकेट ने भी किया शहर को रिप्रेजेंट
जिले के युवाओं के लिए रोजगार सहित स्वास्थ्य, शिक्षा आदि विषयों पर हुई चर्चा

By: ayazuddin siddiqui

Updated: 10 Jan 2021, 06:41 PM IST

डिंडोरी. जिले की पहचान आज भी आदिवासी जिले के रूप में है। जिला गठन के 22 साल में यहां से कई बड़े नेता और प्रशासक राज्य और केंद्र स्तर तक पहुंचे लेकिन आज तक आदिवासी जिले का टैग डिंडौरी के माथे पर यथावत है। हालांकि इसके कई कारण भी हैं जैसे रोजगार की कमी, शिक्षा का स्तर, स्वास्थ्य सेवाओं में शिथिलता और सबसे अहम रेलवे लाइन का अभाव। डिंडौरी रेल लाइन के लिए सर्वे बजट 2015-16 में सैंक्शन हुआ। इसमें डिंडौरी से होकर 240 किलोमीटर की जबलपुर.पेंड्रा रेलवे लाइन को स्वीकृति मिली थी। आगे कुछ भी नहीं हुआ। जिला अस्पताल में 19 विशेषज्ञ और 12 डॉक्टर्स सहित 104 हेल्थ वर्कर्स के पद रिक्त हैं। स्टाफ नर्स के 99 स्वीकृत पदों में से 31 और स्वीपर के 18 में से 18 पद खाली हैं। यह जानकारी सीएमएचओ डॉ आरके मेहरा ने कलेक्टर बी कार्तिकेयन को लिखित में भेजी थी। इसके अलावा भी कई चुनौतियां डिंडौरी के समग्र विकास में बाधक हैं। ऐसे ही ज्वलंत मुद्दों को लेकर नगर के युवा एडवोकेट सम्यक जैन, सहयोगी एडवोकेट दीपेश कुमार ठाकुर और एडवोकेट हिमाक्षी उत्तमचंदानी ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से हाल ही में मुलाकात की। उन्होंने राज्यपाल को जिले के विकास में बाधा बनने वाली चुनौतियों और उनके निदान का समाधानपरक ब्लूप्रिंट प्रस्तुत किया। राज्यपाल ने डिंडौरी एसपी संजय कुमार सिंह, जिला पंचायत सीईओ अरुण कुमार विश्वकर्मा और एएसपी विवेक कुमार लाल की कार्यशैली की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी भी जिले के समुचित विकास के लिए मॉरल पुलिसिंग और सकारात्मक प्रशासनिक रवैया अनिवार्य है। डिंडौरी जैसे जिले को पूर्ण रूप से विकसित करने के लिए कलेक्टर का विजनरी होना भी जरूरी है। जिले के पिछड़ेपन को दूर करने में पुलिस और प्रशासन को कंधे से कंधा मिलाकर काम करना चाहिए। राज्यपाल ने सम्यक से कहा कि आप जिले के विकास के लिए काम करते रहें और रिपोर्ट राजभवन को भेजें। इस दौरान पर्यटन के क्षेत्र में किए गए प्रयासों को भी सराह।
प्राइवेट क्लीनिक चलाना अस्पतालों की दुर्दशा का बड़ा कारण
राज्यपाल ने जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सरकारी डॉक्टरों का प्राइवेट क्लीनिक चलाना अस्पतालों की दुर्दशा का सबसे बड़ा कारण है। इस वजह से आए दिन आम नागरिकों के लिए विपरीत परिस्तिथियां निर्मित होती हैं। 7 लाख से अधिक जनसंख्या वाले डिंडौरी की सेहत गंभीर है। राज्यपाल ने कहा कि वह स्वास्थ्य विभाग से विषय की जानकारी लेकर जल्द ही रिक्त पद बहाल कराएंगी। जिले की शिक्षा के स्तर पर राज्यपाल ने चिंता जाहिर की और कहा अच्छी शिक्षा हर नागरिक का मूलभूत अधिकार है। प्रशासन स्तर पर सरकार की कई योजनाएं संचालित हो रही हैं। जिसका लाभ प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति को दिलाना जिला प्रशासन का काम है। इस दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की।
टूरिज्म को बढ़ावा देने प्राकृतिक स्थलों के संरक्षण पर फोकस
पत्रिका ने वल्र्ड टूरिज्म डे और वल्र्ड हेरिटेज डे सहित समय समय पर जिले की प्रकृतिक धरोहरों सहित खास खबरों का प्रकाशन किया था। जिन्हें देखने के बाद राज्यपाल ने कहा कि डिंडौरी प्राकृतिक रूप से संपन्न जिला है। साथ ही यहां मां नर्मदा की अपार जलसंपदा भी है। लिहाजा प्रशासन को जिले में टूरिज्म सेक्टर पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि स्थानीय लोगों को उनके क्षेत्र में ही रोजगार मिले और उनका पलायन रुक सके। सम्यक ने राज्यपाल को जिले के प्राकृतिक स्थल नेवसा फॉल, देवनाला, हल्दी करेली, डगोना फॉल, श्रीऋणमुक्तेश्वर मंदिर सहित अन्य स्थलों के महत्व के बारे में भी बताया। राज्यपाल ने टूरिज्म डिपार्टमेंट और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया से चर्चा करने और इन स्थानों के विकास के लिए निर्देश देने की बात कही।

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