बारह महीने झिरिया के पानी से बुझती है ग्रामीणों की प्यास

बारह महीने झिरिया के पानी से बुझती है ग्रामीणों की प्यास
Twenty months extinguish the water of thirsty villagers thirst

Rajkumar Yadav | Publish: Jun, 18 2019 10:32:40 AM (IST) Dindori, Dindori, Madhya Pradesh, India

करंजिया विकासखण्ड के पंचायत खम्हारखुदरा के गांव उल्धौर का मामला
आधा किलोमीटर दूर पहाड की चढाई चढ लाते हैं पानी

डिंडोरी/गोरखपुर। ऊबड़ खाबड़ व पहाड़ी का रास्ता तय कर ग्राम खम्हारखुदरा के वनग्राम उद्धौर के 80 परिवार अपनी प्यास बुझाते हैं। यहां अन्य जल स्त्रोत न होने की वजह से लोगों को इतनी कठिन तपस्या करनी पड़ रही है। यह तपस्या एक दो माह की नहीं बल्कि पूरे साल करनी पड़ती है। ग्रामीणों के मुताबिक मौसम कोई भी हो बारह महीनें ऐसे ही पानी लाने की मजबूरी है। ऐसा भी नहीं कि जिम्मेदार इस समस्या से वाकिफ नहीं है। सबकुछ जानते हुए भी किसी ने इस समस्या को दूर करने के लिये ईमानदारी से प्रयास नहीं किया जिसका परिणाम ग्रामीण लंबे समय से भुगत रहे हैं।
आज भी पी रहे हैं झिरिया का पानी
उद्धौर गांव के ग्रामीण सुखदेव मरावी, जयसिंह परस्ते, गजरूप मरावी, मंगल सिंह धुर्वे, कोता बाई धुर्वे, चिरौंजा बाई आर्मो सुनीता चीचाम ने बताया कि वर्तमान में गांव की बसाहट दो टोले के बीच है जिसमें से एक उपर टोला है। इस टोला के वासिंदे गांव से लगभग आधा किलोमीटर दूर जंगल से नीचे बने झिरिया से पानी लाते हैं। झिरिया तक पहुंचने के लिये ग्रंामीणों को ढलान उतरना पडता है पानी भरे बर्तनों को सर पर रखकर उतनी ही चढाई चढना पडता है। मार्ग पथरीला होने के साथ साथ ऊबड खाबड है। चढाई के दौरान यदि संतुलन बिगडा या पैर फिसला तो सीधे नीचे लुढकने का खतरा बना रहता है। समस्या यहीं खत्म नहीं होती बारिश का मौसम तो और भी खतरनाक हो जाता है। रास्ते भर पानी के जमाव के बीच पानी का वजन लेकर चलना जान जोखिम में डालने जैसा रहता है पर क्या करें इस झिरिया के अलावा पेयजल के लिये और आसपास दूसरा कोई जलस्त्रोत भी नहीं है। बारिश के दौरान झिरिया के पानी में जंगल का पानी बहकर मिल जाता है पानी गंदा भी रहता है तब भी इसे मजबूरीवश पीना पड़ता है। उल्लेखनीय है कि वनांचलों में बसे ग्रामीणों को आज भी पानी के लिये तरसना पड रहा है। ऐसे हालात मे झिरिया का दूषित पानी पीने की मजबूरी है। वनांचलों में बसी आबादी को इस समस्या से अब तक निजात नहीं मिल पाई है। पहाडों के किनारे जलस्त्रोत के रूप में महज नाले और झिरिया ही हैं जो इसके लिये निस्तारी साधन बने हैं लेकिन इस जरूरत के बीच जोखिम भी बना हुआ है। झिरिया से आने वाला पानी दूषित होने के कारण जिंदगी पर संकट भी पैदा करता है।
मटमैला है कुआं का पानी, हैंडपंप भी खराब
गांव के नीचे टोला के ग्रामीण रामप्रसाद मरावी, करण मरावी, हेमंत कुरचाम, राजकुमार परस्ते, सेमवती कुरचाम, सतेन्द्र मरावी, लाल सिंह कुरचाम, कौशल्या उद्दे, कमलवती मरावी, शारदा कुरचाम ने बताया कि पूरे गांव के लिये वर्तमान में रही जाम दादर में एकमात्र हैंडपंप है इसमे भी यदि एक घंटा तक पानी भरा जाता है तो पानी आना बंद हो जाता है। फिर घंटो इंतजार करने के बाद मुश्किल से एक गुण्डी पानी मिलता है। ऊपर से इसका हैंडल इतना कड़ा है कि लोग चलाते चलाते हांफ जाते है। इसलिये इस हैंडपंप का भरोसा नही करते। इतना ही नही कुआं का पानी मटमैला तो है ही साथ में काई भी जमी हुई है। इन्होने बताया कि गांव की बसाहट चोरों और जंगल से घिरा है इसलिये और ग्रामीण जंगली जानवरों के डर से सूर्यास्त से पहले तक और सूर्योदय के बाद ही पानी लेने जलस्त्रोत तक जाते हे। सुबह की शुुरूआत से ही गांव में पानी के लिये भागदौड़ शुरू हो जाती है। बड़े बूढे बच्चे महिलाएं सभी दो वक्त के पानी के लिये परेशान नजर आते है।
मेहमान आने के नाम से डरते है
ग्रामीण अजय मरावी, ग्वालिन कुरचाम, ब्रिज कुमारी मरावी, मोनसुंदरिया मरावी, ष्ष्याम बाई धुर्वे, अमरतिया बाई परस्ते, सुनीता परस्ते, ललिया बाई मरावी, ललता बाई, परस्ते भागवती परस्ते ने भीषण जलसंकट से उपजे दर्द को बयान करते हुये बताया कि गांव के अंदर जिस तरह से पानी की कमी है। उसे देखकर हम लोग ईश्वर से मनाते है कि भगवान ऐसी स्थिति में कोई परिजन, रिश्तेदार मेहमान न आये नहीं तो उनके लिये पानी की व्यवस्था कहां से करेंगे। हमें तो मेहमान के आने के नाम से डर लगने लगता है क्योकि दिन का आधा हिस्सा तो स्वयं के घर परिवार के लिये पानी के इंतजाम मे बीतता है। ऊपर से मेहमान आ गये तो और फजीहत। ग्रामीणों को सबसे ज्यादा मुसीबत उस वक्त होती है जब गांव के किसी परिवार में सामाजिक मांगलिक कार्यक्रम का आयोजन होता है।
— गांव में पानी की भीषण समस्या है पंचायत के द्वारा यहां कुओं का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। गांव में जब भी किसी परिवार में बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है तो ग्रामीणों को टैंकर के माध्यम से पानी उपलब्ध करवाया जाता है।
कृष्ण कुमार पन्द्राम, सरपंच खम्हारखुदरा

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