काम पूरे नहीं हुए और जारी हो गई राशि, मशीनों से कराया काम

जिला पंचायत अध्यक्ष ने विकास समन्वय व निगरानी समिति की बैठक में उठाया मुद्दा

By: ayazuddin siddiqui

Published: 24 Jul 2020, 06:08 PM IST

डिंडोरी. केन्द्रीय इस्पात राज्यमंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते की उपस्थिति में विकास समन्वय व निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई। जिसमें जिला पंचायत अध्यक्ष ने बस्ती विकास योजना के अंतर्गत स्वीकृत कार्यांे को पूर्ण नहीं किएं जाने और अपूर्ण कार्यों की राशि जारी करने का मुद्दा उठाया। इसके साथ ही उन्होन बताया कि आरईएस विभाग द्वारा 34 तालाबों के निर्माण में जेसीबी लगाकर कार्य किया गया है। लोक निर्माण विभाग के पाकरबघर्रा मार्ग निर्माण का प्रकरण तथा बिछिया और मरवाही में गुणवत्ताहीन सडक निर्माण की होने पर उन्होंने सभी प्रकरणों पर कार्यवाही की मांग की। कलेक्टर ने कहा कि उक्त सभी प्रकरणों की जांच के लिए जिला स्तरीय जांच समिति का गठन किया जायेगा। जिला स्तरीय जांच समिति संपूर्ण प्रकरणों पर विस्तार से जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। बैठक में केन्द्रीय इस्पात राज्यमंत्री ने निर्देश दिए कि कोविड 19 कोरोना संक्रमण काल में आवश्यक वस्तुओं की दुकान जरूर खुली रहेंगी। लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा। सार्वजनिक स्थानों पर या घर से बाहर निकलते समय मास्क अनिवार्य रूप से पहनना होगा। उन्होने कहा जिले में कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए लोगों को जानकारी दें और जन जागरूकता अभियान चलायें। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष ज्योतिप्रकाश धुर्वे, जिला भाजपा अध्यक्ष नरेन्द्र राजपूत, जनपद पंचायत शहपुरा अध्यक्ष थानी सिंह धुर्वे, जनपद पंचायत बजाग अध्यक्ष रूद्रेश परस्ते, कलेक्टर बी कार्तिकेयन, पुलिस अधीक्षक, सीईओ जिला पंचायत, अपर कलेक्टर, एसडीएम, सहायक कलेक्टर, सीएमएचओ, डीपीसी, जिला आपूर्ति अधिकारी सहित अधिकारी कर्मचारी मौजूद थे।
9 हजार 663 महिलाएं लाभान्वित
सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग ने बताया कि आहार अनुदान योजना के अंतर्गत विशेष पिछडी बैगा एवं भारिया जनजाति की मुखिया महिलाओं को एक हजार रूपए प्रतिमाह प्रदान किया जाता है। जिले में 9 हजार 663 महिलाओं को इसका लाभ मिल रहा है। इस योजना के अंतर्गत 96 लाख 63 हजार का भुगतान किया जा चुका है। केन्द्रीय इस्पात राज्यमंत्री ने जिले में परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के निर्देश दिए। जिससे दुर्घटनाओं में कमी आ सके। केन्द्रीय इस्पात राज्यमंत्री ने इसी प्रकार से एमपी वनमित्र पोर्टल वनाधिकार प्रगति रिपोर्ट, वन विभाग द्वारा पौधरोपण एवं परिवहन की स्थिति, जिले में चल रहे सडक निर्माण कार्य, जल संसाधन विभाग द्वारा संचालित कार्यांे का विवरण, शैक्षणिक सुविधाओं की जानकारी, शालाओं में नामांकन, छात्रावास भवन निर्माण का कार्य, नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तक का वितरण, नि:शुल्क साईकिल वितरण, नि:शुल्क गणवेश वितरण तथा जिले व राज्य से आये प्रवासी बच्चों की संख्यात्मक जानकारी सहित अन्य कार्यों की समीक्षा की।
9 विद्यार्थी और 6 शिक्षक
केन्द्रीय इस्पात राज्यमंत्री ने कहा कि जिले में शिक्षा के स्तर में सुधार करते हुए विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा दी जाए। स्कूलों में विद्यार्थियों के अनुपात में शिक्षकों को पदस्थ करें। जिससे विद्यार्थियों को नियमित रूप से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। प्रत्येक जनपद में शिक्षा समिति की बैठक नियमित रूप से आयोजित करने के निर्देश दिए। जिला पंचायत अध्यक्ष ने बताया कि प्राथमिक शाला नागदमन में 9 विद्यार्थी हैं और 6 शिक्षक पदस्थ हैं। उन्होंने शिक्षकों को अन्यत्र स्कूलो में पदस्थ करने को कहा। इस दौरान जन प्रतिनिधियों ने विद्यालयों में शिक्षक व पहुंच मार्ग न होने की बात कही। जिस पर केन्द्रीय राज्यमंत्री ने समुचित व्यवस्था के निर्देश दिए।
बचाव के लिए सामाग्री उपलब्ध
केन्द्रीय इस्पात राज्यमंत्री ने जिले में कोरोना संक्रमण काल में की गई तैयारियों की समीक्षा की। सीएमएचओ ने बताया कि जिले में 53 अतिरिक्त बिस्तर तैयार किये गए हैं। जिला चिकित्सालय में 314 ऑक्सीजन सिलेण्डर उपलब्ध हैं और 11 आईसीयू का बिस्तर तैयार हो रहा है। जिले में कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए संपूर्ण व्यवस्था की गई है और पर्याप्त सामाग्री उपलब्ध है। केन्द्रीय इस्पात राज्यमंत्री ने कहा कि जिले व प्रदेश के बाहर से आने वाले लोगों की जानकारी लें। नियमित रूप से उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराएं। इस दौरान नगर पंचायत शहपुरा एवं डिंडोरी द्वारा कोरोना संक्रमण काल में किये जा रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई। केन्द्रीय इस्पात राज्यमंत्री ने कहा कि जिले में मलेरिया की रोकथाम के लिए समुचित उपाय किये जाएं। स्वास्थ विभाग का अमला उन क्षेत्रों को चिन्हित करें जिन क्षेत्रो में पहले से ही मलेरिया के प्रकरण मिलते रहे हैं। सीएमएचओ ने बताया कि जिले में मलेरिया पूरी तरह से नियंत्रण में है। अभी तक मलेरिया के 15 प्रकरण ही सामने आये हैं।

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