95 प्रतिशत नवजातों में दिल का इलाज संभव

Kamal Rajpoot

Publish: Aug, 24 2017 05:51:00 (IST)

Disease and Conditions
95 प्रतिशत नवजातों में दिल का इलाज संभव

आपको बता दें भारत में प्रतिवर्ष करीब डेढ़ लाख बच्चे दिल की बीमारी के साथ पैदा होते है। इनमें से 80 हजार को तुरंत ऑपरेशन की जरूरत होती है

कई बार हम अपने बच्चों की बीमारियों को सीरियस नहीं लेते है जिसकी वजह से आगे चलकर बड़ी परेशानी का सामना उठाना पड़ता है। ऐसी एक बीमारी है हार्ट की बीमारी। नवजातों में दिल की बीमारी हर एक हजार बच्चों में से 8-12 बच्चों में होती है। आपको बता दें भारत में प्रतिवर्ष करीब डेढ़ लाख बच्चे दिल की बीमारी के साथ पैदा होते है। इनमें से 80 हजार को तुरंत ऑपरेशन की जरूरत होती है, लेकिन इनमें से केवल चार हजार नवजातों को ही इलाज मिल पाता है।

बच्चों में हृदय की कौनसी बीमारियां ज्यादा होती हैं?
क्या आपको पता है बच्चों में हार्ट से संबधित कौन—कौनसी बीमारियों होती है ? अक्सर यह देखने में आया है कि बच्चों में ज्यादातर दिल में सुराग होना, धमनियों का गलत जुड़ाव व रक्त नलियों में रुकावट के मामले सामने आते हैं। लेकिन मां-बाप को बीमारी के शुरुआती संकेतों पर ध्यान रखना चाहिए जैसे बार-बार खांसी-जुकाम या निमोनिया, रक्त में ऑक्सीजन की कमी से शरीर का नीला पडऩा, बेवजह सांस फूलना, वजन ना बढऩा या ग्रोथ रुक जाना। ऐसे संकेत नजर आने पर बच्चे को तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

क्या सर्जरी के बाद बच्चा आम बच्चों की तरह जीवन जी सकता है ?
करीब 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों के हृदय रोगों का इलाज 95 प्रतिशत सफलता से किया जा सकता है। ऐसे लगभग सभी बच्चे सामान्य जीवन व्यतीत कर सकते हैं। स्थिति के अनुसार चिकित्सक कुछ सावधानी बरतने की सलाह अभिभावकों को देते हैं, जिनका ध्यान रखना जरूरी है।

हृदय रोग कम करने के लिए क्या करना चाहिए?
हृदय रोग कम करने के लिए दूरदराज के डॉक्टरों और समाज के लोगों द्वारा इन बीमारियों के प्रति जागरुकता बढ़ाई जानी चाहिए ताकि इन बच्चों को स्पेशलाइज्ड पीडियाट्रिक कार्डियक हॉस्पिटल में वक्त रहते सही इलाज दिया जा सके। ऐसे हालात में समय का काफी महत्व है।

डॉ. सुनील कौशल
पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जन, जयपुर

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